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सारंडा के आदिवासियों की हकमारी, शाह बदर्स को SDO ने चेताया- मजदूरों काे जल्द करें भुगतान, वरना सख्त कार्रवाई

नाम बड़े और दर्शन छोटे : करमपदा खदान में 2001 से 2018 तक कार्यरत मजदूरों का बकाया पीएफ और ग्रेच्युटी भुगतान की मांग को लेकर मजदूर नेता अनुमंडल कार्यालय में धरना पर बैठे 

  • एक हफ्ते में पैसा नहीं मिला, तो शाह ब्रदर्स के चाईबासा कार्यालय के सामने थाली-कटोरा के साथ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेंगे श्रमिक 

Chaibasa :  झारखंड खनिज बहुल राज्य है. सरकार उद्यमियों को खनिज आधारित उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. अभी पिछले महीने नयी औद्योगिक नीति लांच की गयी, लेकिन कुछ उद्यमी ऐसे भी हैं, जिनके कारण यहां के स्थानीय लोग उद्योगों के खिलाफ हो गये हैं. कारण है प्राकतिक संसाधनों का बेहिसाब दोहन, प्रदूषण और स्थानीय लोगों का शोषण. सारंडा में एक खनन कंपनी है शाह बदर्स. शाह ब्रदर्स बड़ा नाम है. कंपनी हाल के समय में काफी विवादों में भी रही है. एक बार फिर कंपनी चर्चा में है. चर्चा इसलिए कि सांरडा से करोड़ों-अरबों का खनिज निकलनेवाली इस कंपनी ने मजदूरों के हक का पैसा मार रखा है. अब मजदूर आंदोलन के रास्ते पर हैं. खनिज की ढुलाई रोक दी गयी है. झारखंड जनरल कामगार यूनियन के जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया मजदूरों के समर्थन में  जगन्नाथपुर अनुमंडल कार्यालय के समक्ष 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे हैं. जगन्नाथपुर एसडीओ ने शाह ब्रदर्स के प्रति सख्त रवैया अख्तियार करते हुए कहा है कि कंपनी मजदूरों का पैसा जल्द भुगतान करे,  नहीं तो सख्त कार्रवाई की जायेगी. उधर करमपदा में अपनी जायज मांगों को लेकर मजदूरों ने आठवें दिन भी शाह ब्रदर्स की रेलवे साइडिंग में हड़ताल जारी रखी.

शाह ब्रदर्स की रेलवे साइडिंग पर हड़ताल करते मजदूर.

कंपनी ने झंडीबुरु आयरन ओर माइंस, करमपदा में 2001 से 2018 तक कार्यरत मजदूरों को पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं दिया है. कुछ मजदूरों को फुल एडं फाइनल पेमेंट के रूप में महज 10 से 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया है. सैकड़ों मजदूर अभी भी बकाया पैसा मिलने की आस में हैं. मजदूर नेता मानसिंह तिरिया कहते हैं  कि मजदूरों ने सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय), चाईबासा के समक्ष फॉर्म (N) भरकर जमा किया था, लेकिन मजदूरों के पास पहचान पत्र नहीं होने से कार्रवाई नहीं हुई. मजदूर दो-तीन महीने से दौड़ रहे हैं.  तिरिया कहते हैं कि मजदूरों को पीएफ, ग्रेच्युटी का लाभ नहीं देने से भले ही कंपनी प्रबंधन कुछ पैसा बचा लेगी, लेकिन इससे सारंडा में रहनेवाले गरीब आदिवासी मजदूरों का कोई विकास नहीं होगा, जिनके पहाड़ों और जंगलों को विकास के नाम पर होनेवाले खनन ने बर्बाद कर दिया है.

तिरिया कहते हैं कि उनकी यूनियन मजदूरों के पक्ष में भूख हड़ताल कर यह मांग कर रही है कि खान में कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम 15 लाख और अधिकतम 20 लाख रुपया दिलाया जाये, ताकि मजदूर अपने परिवार का भरण-पोषण आराम से कर सकें. माइंस दोबारा चलने पर उन्हीं मजदूरों एवं उनके परिवार के सदस्यों को काम पर रखा जाए और उस क्षेत्र से श्रम के पलायन को रोका जाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि मजदूरों को पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ अविलंब दिलाया जाये, अन्यथा सप्ताह के बाद शाह ब्रदर्स के चाईबासा कार्यालय  के समक्ष थाली-कटोरा के साथ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जायेगा.

जगन्नाथपुर एसडीओ शंकर एक्का ने बताया कि  झारखंड जनरल कामगार यूनियन के जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया शाह ब्रदर्स द्वारा मजदूरों का पीएफ,ग्रेच्युटी और मेहनताना का पैसा नहीं देने के विरोध में 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे हैं. शाह ब्रदर्स के संचालक राजकुमार साह को कई बार पपत्लेर देकर भुगतान करने को कह गया है, लेकिन कंपनी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. अब अंतिम पत्राचार किया जा रहा है. माइंस संचालक बताया गया है कि माइंस प्रबंधन के लापरवाही के चलते विधि-व्यवस्था भंग होने की संभावना है. इसलिए यथाशीघ्र मजदूरों की जायज मांग को देखते हुए बकाया राशि का भुगतान करें,नहीं तो सख्त कार्रवाई की जायेगी.

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