
Ranchi : राज्य में कार्यकारी समिति के प्रधानों (पंचायत प्रतिनिधि) ने फ्रंट लाइन कोरोना वारियर का दर्जा दिये जाने की मांग सरकार से की है. इनका दावा है कि कोरोना संकट के बीच बतौर मुखिया, पंचायत समिति प्रमुख और जिला परिषद चेयरमैन के तौर पर सबों ने आगे बढ़ कर जिम्मेदारी ली थी. पर अब जब वैक्सिनेशन का समय आया तो उन्हें नकारा जा रहा है. प्रदेश मुखिया संघ ने इस मामले में सरकार को संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है.
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संघ के सचिव अनूप कुमार ने कहा है कि ऐसा नहीं किये जाने पर कार्यकारी समिति के प्रमुख के तौर पर कार्यरत सभी पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से तटस्थ हो सकते हैं. ऐसे में पंचायतों (त्रिस्तरीय) में कई काम प्रभावित हो सकते हैं.
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मुखिया संघ के मुताबिक कोरोना महामारी का दौर शुरू होते ही देश परदेश से सैकड़ों लोग गांवों को वापस लौटने लगे. ऐसे में गांव, परिवार, प्रवासियों की देखभाल, खाना पीना, संक्रमितों का इलाज जैसे तमाम जवाबदेही का निर्वाहन करने में पंचायत लगी रही. खतरा उठाते हुए पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था.
संघ का कहना है कि कोरोना काल में जितने भी लोग बतौर वारियर काम कर रहे थे, उन्हें कई स्तर से कई तरह के लाभ सरकार की ओर से दिये गये. पर पंचायत प्रतिनिधि अपने स्तर से ही खर्च करके काम करते रहे. वैक्सीन दिये जाने में भी भेदभाव हो रहा है. ऐसे में सरकार अब पंचायत प्रतिनिधियों ( वर्तमान में कार्यकारी समिति) को भी वैक्सीन दिये जाने का प्रावधान तय करे.




