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राजधानी रांची के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लहलहा रही अफीम की खेती

♦नामकुम के हुंडारडीह में प्राइमरी स्कूल के पीछे बड़े क्षेत्र में तैयार हैं पोस्ते के पौधे

Sohan Singh

Ranchi : आप इस जानकारी पर चौंक सकते हैं, लेकिन यह सच है कि अब झारखंड की राजधानी रांची के ग्रामीण इलाकों में भी अफीम की खेती लहलहा रही है. इस रिपोर्ट के साथ अफीम की लहलहाती फसलों की जो तस्वीरें आप देख रहे हैं, वह झारखंड पुलिस मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर और रांची के नामकुम थाना से लगभग छह-सात किलोमीटर दूर हुंडारडीह गांव की है.

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जब न्यूजविंग की टीम पहुंची मौके पर

न्यूजविंग की टीम को सूचना मिली थी कि नामकुम के हुंडारडीह स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास अफीम की खेती की गयी है. हमारी टीम मौके पर पहुंची. यहां स्कूल के पीछे बड़े भू-खंड पर अफीम की खेती की गयी है. इस बारे में हमने स्कूल के शिक्षक से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली. उन्होंने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं जानते. जिस स्थान पर अफीम की फसल लहलहा रही है, वहीं पास में हमें एक महिला मिली. जब हमने पूछा कि यह किसका खेत है, तो महिला ने पहले कहा कि उसे नहीं पता. लेकिन, जब हमारी टीम के लोगों ने खुद को अफीम का खरीदार बताया तो उसने स्वीकार किया कि जिस जमीन पर अफीम की खेती हुई है, उसका कुछ हिस्सा उसके परिवार का भी है. उसने बताया कि एक लाख रुपये में एक किलोग्राम अफीम बिक रहा है. उसने स्वीकार किया कि गांव के कई युवा अफीम बेच रहे हैं. महिला ने बताया कि बाहर से लोग आते हैं, जो खेतों से निकाला गया अफीम ऊंची कीमत देकर ले जाते हैं.

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यह अकेले हुंडारडीह की कहानी नहीं

असल में यह अकेले नामकुम के हुंडारडीह की कहानी नहीं है. हकीकत में रांची, खूंटी, हजारीबाग, चतरा, लातेहार और पलामू के कई सुदूर इलाकों में सैकड़ों एकड़ क्षेत्र में अफीम की खेती हुई है. पुलिस इन इलाकों में आये रोज अफीम की खेती नष्ट भी कर रही है, लेकिन इसके बावजूद धंधेबाज बेखौफ हैं.  अफीम की खेती के लिए दुनिया में अफगानिस्तान बदनाम है, लेकिन पिछले एक दशक से झारखंड में बड़े पैमाने पर नशे का यह कारोबार खूब फल-फूल रहा है.

झारखंड के कई इलाकों में पोस्ते के सफेद और गुलाबी फूल दूर से ही नज़र आ जाएंगे. पोस्ते के फल पर चीरा लगाने पर उससे जो रस बाहर आता है, वही अफीम के रूप में बिकता है. अफीम की खेती एमपी, यूपी और राजस्थान के कुछ इलाकों में वैध तरीके से होती है जिसका इस्तेमाल दवाइयां बनाने में होता है. पोस्ते की खेती के लिए सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो से लाइसेंस लेना होता है. लाइसेंसी किसान पोस्ते की पूरी पैदावार सरकार को सौंपते हैं, लेकिन झारखंड में अब राजधानी के इलाके में भी इसकी खेती बेखौफ तरीके से होने लगी है. इस बाबत पूछे जाने पर रांची के ग्रामीण एसपी नौशाद आलम ने कहा कि कई जगहों पर अफीम की खेती की सूचना मिली थी. सूचनाओं के आधार पुलिस अभियान चलाकर अफीम की खेती नष्ट भी कर रही है.

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