
New delhi : पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को एक बार फिर बंगाल के डीजीपी और मुख्य सचिव को आज फिर दिल्ली तलब किया था.
हालांकि सूत्रों के अनुसार, दोनों ने ही दिल्ली आने से मना कर दिया है. डीजीपी मुख्य सचिव को आज शाम पांच बजे तक गृह मंत्रालय ने दिल्ली बुलाया था.
बता दें कि ममता सरकार ने कोरोना वायरस महामारी का हवाला देकर इन दोनों अधिकारियों के दिल्ली आने में असमर्थता जताई थी. हालांकि, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने के लिए तैयार हैं.
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गृह मंत्रालय ने शाम 5:30 बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाया
गृह मंत्रालय ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति के बारे में दिल्ली में एक बैठक के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाया है. इसके लिए मैसेज कल भेजा गया था और बैठक आज शाम 5:30 बजे होनी है.
राज्य सरकार ने डीजीपी-मुख्य सचिव को भेजने से किया था मना
इससे पहले गृह मंत्रालय ने जेपी नड्डा की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर पश्चिम बंगाल के डीजीपी और मुख्य सचिव से जवाब-तलब किया था. उन्हें बाद में दिल्ली बुलाया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें भेजने से इनकार कर दिया था.
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टीएमसी के एक और विधायक ने दिया इस्तीफा
टीएमसी नेता शुभेंदु अधिकारी के बाद टीएमसी के एक और विधायक शीलभद्र दत्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
ममता ने बुलाई आपात बैठक
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी की आपातकालीन बैठक बुलाई है. कल सुवेंदु अधिकारी ने पार्टी के विधायक सहित सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि पार्टी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि कोई आपातकालीन बैठक नहीं है. आज की बैठक नियमित बैठकों का हिस्सा है. हर शुक्रवार, अध्यक्ष बैचों में नेताओं से मिलते हैं.
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आईपीएस अधिकारियों का तबादला संघीय ढांचे पर ‘आघात’ : केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र पश्चिम बंगाल प्रशासन में जबरन हस्तक्षेप कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य के पुलिस अधिकारियों का तबादला संघीय ढांचे पर ‘आघात’ है.
केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘मैं बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था में जबरन हस्तक्षेप करने की निंदा करता हूं. राज्य के अधिकारों में दखल देते हुए चुनाव के पहले पुलिस अधिकारियों का तबादला करने का केंद्र का कदम संघीय ढांचे पर आघात है और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास है.’
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