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राज्य के 12 जिलों के अल्पसंख्यक एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों के 400 शिक्षकों को छह साल से नहीं मिल रहा वेतन

Rahul Guru

Ranchi : राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित अल्पसंख्यक एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक बीते छह साल से वेतन की आस लगाये बैठे हैं. राज्य में ऐसे स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या लगभग 400 है. ये 400 शिक्षक राज्य के 12 जिलों के विभिन्न अल्पसंख्यक एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत हैं. अल्पसंख्यक एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूल संघ के मुताबिक प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की उदासीनता की वजह से ये शिक्षक दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं. आलम है कि ये शिक्षक ट्यूशन पढ़ा कर गुजारा तो कर रहे थे, लेकिन इस लॉकडाउन में ट्यूशन का सहारा भी बीते चार माह से नहीं है.

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राज्य के 24 जिलों में हैं 847 स्कूल

झारखंड अल्पसंख्यक एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालय शिक्षक संघ की ओर से उपलब्ध कराये गये आंकड़े के मुताबिक राज्य में ऐसे अल्पसंख्यक और सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या 847 है. इन स्कूलों में शिक्षकों के सृजित पद 4478 हैं. जहां 4,036 शिक्षक फिलहाल बहाल हैं. वहीं पढ़नेवाले छात्रों की संख्या लगभग 2,09,423 है. यहां एक शिक्षक 47 स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं. इन स्कूलों में क्लास एक से आठ तक की पढ़ाई होती है. जिन जिलों के अल्पसंख्यक और सहायता प्राप्त विद्यालय हैं उनमें खूंटी, चाईबासा, लोहरदगा, सिमडेगा, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, पाकुड़, गोड्डा, साहेबगंज, गिरिडीह, दुमका, धनबाद सहित अन्य जिले हैं.

ऐसे संचालित होते हैं स्कूल

राज्य के जिलों में चल रहे अल्पसंख्यक और सहायता प्राप्त स्कूल सीधे सरकार की ओर से संचालित नहीं होते हैं. इन स्कूलों के लिए भवन आदि का निर्माण उस ट्रस्ट की ओर से होता है, जो इन स्कूलों को संचालित करते हैं. या जनप्रतिनिधियों की मदद से भवन आदि का निर्माण होता है. इसके बाद शिक्षा विभाग से अनुमोदन लिया जाता है. अनुमोदन मिलने के बाद शिक्षकों की बहाली जिला शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रबंधन की निगरानी में होता है. परीक्षा सहित अन्य कामकाज डीएसई की निगरानी में ही होता है. यानी सबकुछ योजना मद के तहत चल रहे प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक स्कूल और हाई स्कूल की तरह ही होता है.

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वेतन निर्धारण नहीं होने से नहीं मिल रहा पैसा

इन स्कूलों के शिक्षकों के वेतन मिलने की प्रक्रिया काफी लंबा है. इन स्कूलों के शिक्षकों को गैर योजना मद से वेतन मिलता है. इसके लिए विद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से वेतन बिल डीएसई को भेजा जाता है. इसके बाद डीएसई प्राथमिक शिक्षा निदेशक को भेजते हैं. इसके बाद प्राथमिक शिक्षा निदेशालय से वित्त विभाग में जाने के बाद वेतन बनता है. जिन 400 शिक्षकों को छह साल से वेतन नहीं मिल रहा है, उन शिक्षकों का अब तक वेतन निर्धारण किया ही नहीं गया है. संघ के महासचिव निरंजन कुमार के मुताबिक इन अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के समय डीएसई का अनुमोदन मिलता है. इसके बाद प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की मोहर लगती है. जिन 400 शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है, उसकी वजह प्राथमिक शिक्षा निदेशालय है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की उदासीनता की वजह से इन शिक्षकों को बीते छह साल से वेतन नहीं मिल रहा है.

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