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Giridih: सरकारी जमीनों को मुक्त कराने के लिए रेस हुआ प्रशासन, तालाब की जमीन पर मिले सिर्फ मकान  

Giridih: भूमाफियाओं से शहरी क्षेत्र के सरकारी जमीन को मुक्त कराने का अभियान एक बार फिर गिरिडीह प्रशासन ने शुरू किया है. गुरुवार को सदर एसडीएम प्रेरणा दीक्षित और सदर अचंल के सीओ रवीन्द्र सिन्हा नक्शा और हर प्लॉट के दस्तावेज के साथ हर उस सरकारी जमीनों की जांच करने पहुंचे जिसकी नापी पहले हो चुकी थी.

एसडीएम और सीओ सबसे पहले शहर के शास्त्री नगर के सौ वर्ष पुराने तालाब वाले प्लॉट पर पहुंचे जिस पर अवैध जमाबंदी के आधार पर शहर के दो बड़े भाजपा नेता पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी और कोडरमा सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव के संरक्षण में शहर के जमीन कारोबारी भगवान दास भदानी अधिकांश हिस्से को भर चुके हैं.

फिलहाल तालाब के इस प्लॉट का अतिक्रमण कर कई मकान तक बन चुके हैं. एसडीएम ने सर्वे नक्शा को देखा तो नक्शा में शास्त्री नगर का तालाब दिख रहा था लेकिन जमीन पर तालाब के बजाय सिर्फ मकान ही नजर आ रहे थे. जाहिर था कि एसडीएम भी नक्शा देख चौंक पड़ीं कि पूरे तालाब का स्वरुप ही शहर के भूमाफियाओं ने भर दिया है.

मौके पर एसडीएम ने सीओ को निर्देश दिया कि वह गुरुवार शाम तक तालाब की अवैध जमाबंदी को लेकर रिपोर्ट दें जिससे भूमि सुधार राजस्व विभाग को रिपोर्ट भेज कर जमाबंदी को रद्द कराने की अनुशंसा की जा सके. इस बीच एसडीएम शहर के कर्बला रोड स्थित दीनदयाल नदी घाट पहुंचीं. नदी घाट के तटीय हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में नजर आया. सर्वे नक्शा में नदी के अतिक्रमित क्षेत्र में एक-दो नहीं बल्कि कई मकान नजर आये.

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तीन एकड़ प्लॉट पर कब्जा कर फैक्ट्री का संचालन

इसके बाद एसडीएम और सीओ औद्योगिक क्षेत्र के झलकडीहा मौजा पहुंचे. इस दौरान अधिकारियों ने देखा कि झलकडीहा मौजा के तीन एकड़ प्लॉट को कब्जे में कर स्वाति कॉनकॉस्ट फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है. अचंल कार्यालय के दस्तावेजों में दर्ज खाता नंबर, प्लॉट नंबर पूरी तरह से जीएम लैंड के रूप में सामने आये.

जीएम लैंड पर सालों से स्वाति कॉनकॉस्ट फैक्ट्री को चलते देख एसडीएम भी चौंक गयीं. एसडीएम ने मौके पर ग्रामीणों से भी बातचीत की.

बातचीत के बाद एसडीएम को जानकारी मिली कि झलकडीहा मौजा के तीन एकड़ सरकारी प्लॉट पर संचालित स्वाति कॉनकॉस्ट सालों से अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर जीएम लैंड पर संचालित किया जा रहा है. एसडीएम और सीओ ने मौके पर फैक्ट्री मालिक से प्लॉट के दस्तावेज लेने का प्रयास किया. लेकिन फैक्ट्री मालिक पहले ही गायब हो चुके थे. एसडीएम ने सीओ से दो दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.

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