
- 2011 की जनगणना में 4957467 लोगों ने अपना धर्म सरना बताया
- धर्मगुरु बंधन तिग्गा मिले ग्रामीण विकास मंत्री से
Ranchi: “सरकार आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठायेगी. आदिवासी समाज की धार्मिक और संस्कृतिक पहचान अलग है. जिसका सरकार सम्मान करती है.”
उक्त बातें ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहीं. उनसे मंगलवार को राजी पडहा सरना प्रार्थना सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने मुलाकात की.
धर्मगुरू बंधन तिग्गा ने इस दौरान जनगणना आयुक्त की ओर से जनगणना प्रपत्र में अन्य धर्म कॉलम हटाये जाने का विरोध जताया. साथ ही राज्य में सरना आदिवासियों की स्थिति और उनकी संस्कृति से परिचित कराया.
मिलने गये प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर सहमति जताते हुए मंत्री ने कहा कि सदन से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जायेगा.
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2011 की जनगणना में 4957467 लोगों ने सरना धर्म बताया
बंधन तिग्गा समेत मिलने गये अन्य प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री आलमगीर आलम को जानकारी दी कि जनगणना आयुक्त गृह मंत्रालय के अंतर्गत है. ऐसे में 2021 के जनगणना प्रपत्र में अन्य धर्म कॉलम को हटाये जाने से लोगों में आक्रोश है.
मंत्री को बताया कि पिछले कई वर्षों से देश के 12 करोड़ प्रकृति उपासक आदिवासी समुदाय सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं.
यही नहीं 2001 की जनगणना में अन्य धर्म के कॉलम में 4075246 और 2011 के जनगणना में 4957467 लोगों ने अपना धर्म सरना लिखा.
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धर्म कोड आवंटित करे सरकार
इस दौरान तिग्गा ने कहा कि केंद्र सरकार को सरना धर्म कोड आवंटित करना चाहिये. ऐसा करना छोड़ सरकार अन्य धर्म के कॉलम को हटाकर हिन्दू या ईसाई धर्म कॉलम में शामिल होने के लिए बाध्य कर रही है. जो समानता के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है. और अन्याय भी है.
मंत्री को मांग पत्र देते हुए मांग की गयी कि राज्य सरकार केन्द्र को 2021 के जनगणना में अन्य धर्म के कॉलम को शामिल करने हेतु प्रस्ताव भेजे.
2021 के जनगणना में सरना धर्म कोड शामिल हो इसके लिए सदन से प्रस्ताव पारित कर भेजें. इस दौरान संजय पाहन, सागर केरकेट्टा, रवि तिग्गा, शाशिकांत उरांव समेत अन्य लोग उपस्थित रहे.
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