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क्या बिना डिग्री के टाउन प्लानर बने मनोज कुमार और गजानंद राम को मिला था सरकारी संरक्षण 

  • मनोज कुमार की संविदा की गयी है खत्म, गजानंद राम को दिया गया है शोकॉज नोटिस

Ranchi : भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हुए हेमंत सोरेन सरकार ने सोमवार को रांची नगर निगम के दोनों टाउन प्लानर पर बड़ी कार्रवाई की. टाउन प्लानर मनोज कुमार की संविदा समाप्त कर उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया है.

वहीं एक अन्य टाउन प्लानर गजानंद राम को शोकॉज नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है.

बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के पीछे पिछली सरकार द्वारा निगम में बैठाये गये भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाना उद्देश्य है. इस कार्रवाई के बाद निगम में बैठे लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि बिना टाउन प्लानर की डिग्री लिए दोनों को टाउन प्लानर बनाने में उन्हें क्या सरकार का संरक्षण मिला था. ऐसा इसलिए क्योंकि बिना किसी टाउन प्लानिंग के अनुभव के ऐसे पद उनका बैठना सवाल खड़ा करता है.

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मनोज कुमार जा चुके हैं जेल

निगम के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि संविदा समाप्त कर हटाये गये टाउन प्लानर मनोज कुमार निगम में सिटी मिशन मैनेजर पद पर बहाल हुए थे. लेकिन बाद में निगम में टाउन प्लानर की कमी को देखते हुए उन्हें तत्कालीन नगर विकास मंत्री के निर्देश पर टाउन प्लानर पद पर नियुक्त कर दिया गया.

पिछले वर्ष जुलाई माह में एक प्रिंट मीडिया में मनोज कुमार के जेल जाने की खबर भी छपी थी. खबर थी कि बिल्डिंग अग्रीमेंट करने में धोखाधड़ी करने के आरोप में मनोज कुमार 2015 में जेल जा चुके हैं. इन्होंने गलत जानकारी देकर सुडा में अमृत योजना के तहत एक वर्ष के कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी पायी. यहां तक कि मनोज कुमार के पास टाउन प्लानर के काम करने की योग्यता तक नहीं थी. इसके बावजूद मंत्री के करीबियों और नगर विकास विभाग के अधिकारियों की कृपा से वे गलत तरीके से निगम में टाउन प्लानर के पद पर नियुक्त कर दिये गये.

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घूम फिर कर निगम में ही आ जाते हैं गजानंद राम

वहीं एक अन्य टाउन प्लानर गजानंद राम को भी पूर्व सरकार के कई मंत्रियों का करीबी बताया गया है. पहले यह चर्चा पर थी कि वे राज्य के एकमात्र टाउन प्लानर हैं. लेकिन अब यह जानकारी मिल रही है कि गजानंद राम के पास टाउन प्लानर की योग्यता नहीं है. उन्हें वास्तुशास्त्र की जानकारी ज्यादा है.

उनकी नियुक्ति पथ निर्माण विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर हुई थी. लेकिन बाद में वे तत्कालीन सरकार की कृपा से टाउन प्लानर पद पर नियुक्त कर दिये. कई बार उनका तबादला अन्य विभाग में किया गया, लेकिन बार-बार घूम फिर कर वे निगम के टाउन प्लानर पर नियुक्त हो जाते हैं.

बताया जा रहा है कि पहले राज्य सरकार के पास टाउन प्लानर की कमी थी. लेकिन अब की स्थिति यह है कि टाउन प्लानर की डिग्री लिए हुए ऐसे कई कर्मचारी भी निगम या आरआरडीए में काम रहे हैं.

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