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#RajyaSabhaElection: रघुवर के बीजेपी प्रत्याशी होने पर आजसू पार्टी एनडीए के खिलाफ कर सकती है वोट!

  • पूर्व मुख्यमंत्री के राज्यसभा प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा जोरों पर
  • विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी केंद्रीय नेतृत्व रघुवर काल की कर चुका है तारीफ
  • विधानसभा चुनाव में रघुवर-सुदेश का मतभेद आ चुका है सामने

Ranchi : राज्यसभा के लिए झारखंड कोटे से खाली हो रही दो सीटों में एक सीट के लिए बीजेपी ने तैयारी शुरू कर दी है. राजनीतिक जगत में यह चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व सांसद रविंद्र राय जैसे नेताओं पर दांव खेल सकती है.

इसके अलावा पार्टी के कुछ पदाधिकारी भी राज्यसभा जाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व तक अपने पहुंच बनाने में लगे हैं. बीजेपी विधायकों की संख्या को देखें तो एक सीट जीतने के लिए बीजेपी को एक और विधायक की जरूरत है. इसके लिए पार्टी पूरी तरह से आजूस पर आश्रित होगी.

पार्टी के ही कुछ विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास प्रत्याशी बनाये जाते हैं, तो आजसू यूपीए के समर्थन में वोट कर सकती है. इस सबके पीछे विधानसभा चुनाव के पहले सीट बंटवारे में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के बीच हुई अनबन को देखा जा रहा है.

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एक सीट के लिए बीजेपी को चाहिए एक वोट

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक सीट दुमका छोड़ने के बाद वर्तमान में विधायकों की संख्या 80 है. ऐसे में पहली सीट के लिए 28 विधायकों की आवश्यकता होगी, इस पर जेएमएम के प्रत्याशी का जीतना तय है.

जेएमएम के पास अभी 29 विधायक हैं. कुल 80 विधायकों में से 28 विधायक के बाद 52 विधायक बचते हैं, ऐसे में जो पहली प्राथमिकता के 27 वोट लायेगा, जीत उसकी होगी़. वही बीजेपी के पास अभी 26 विधायक (25+1 बाबूलाल के शामिल होने के बाद) हैं. ऐसे में बीजेपी को अपने प्रत्याशी जिताने के लिए हर हाल में एक वोट की आवश्यकता होगी.

बीजेपी-आजसू का मतभेद आ चुका है सामने

विधानसभा चुनाव के पहले आजसू और बीजेपी के बीच सीट बंटवारे को लेकर आयी अड़चन दिख चुकी है. एनडीए में रहते हुए आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो चुनाव में 15 सीट चाह रहे थे. लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के विरोध के कारण यह गठबंधन चुनाव में मूर्त रूप नहीं ले सका.

गठबंधन नहीं होने का फायदा चुनाव में कांग्रेस-जेएमएम-आरजेडी गठबंधन को मिला. वहीं बीजेपी दूसरे बड़े दल के रूप में तो सामने आयी, लेकिन आजसू केवल 2 सीट पर सिमट कर रह गयी. इससे सुदेश महतो अभी तक नाराज बताये जा रहे हैं.

विधानसभा अध्य़क्ष के चुनाव में आजसू का हेमंत सरकार को समर्थन, बजट सत्र के पहले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में आजसू का शामिल होना बताता है कि राज्यसभा चुनाव में आजसू के दोनों विधायक बीजेपी के खिलाफ वोट कर सकते हैं.

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हार के बाद भी रघुवर कार्यकाल को बेहतर बता चुका है केंद्रीय नेतृत्व

बीजेपी की तरफ से फिलहाल रघुवर दास और रवींद्र राय के नाम की चर्चा सबसे तेज है. रघुवर के नाम की चर्चा के पीछे का कारण यह है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी केंद्रीय नेतृत्व रघुवर दास के पांच साल के कार्यकाल को बेहतर बता रहा है.

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेता सार्वजनिक मंच से यह बात कह चुके हैं. विधानसभा चुनाव में हार का ठीकरा भी उन पर नहीं फोड़ा जा रहा है. वहीं बाबूलाल के बीजेपी में आने के बाद माना जा रहा है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी चेहरे के रूप में उन्हें ही प्रोजेक्ट किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में रघुवर को राज्यसभा भेजे जाने की बात सामने आ रही है.

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