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अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को कार्य मुक्त करने के निर्णय पर शिक्षा सचिव ने लगायी रोक, हाइकोर्ट में लंबित है मामला

  • सचिव ने कहा हाइकोर्ट से फैसला आने तक आदेश किया गया स्थगित

Ranchi: स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग के सचिव ने अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को कार्य मुक्त करने के निर्णय पर शनिवार को रोक लगा दी गयी.

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने इस संबध में विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी. जिसमें बताया गया कि राज्य सरकार के विद्यालयों में कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षकों एवं अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की सेवा समाप्त करने संबंधी आदेश को राज्य सरकार ने स्थगित कर दिया है.

वहीं शिक्षा सचिव एपी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार के विद्यालयों में कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षकों एवं अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को सेवा मुक्त करने का मामला झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित है.

इस मामले में न्यायालय का आदेश आने तक इसे स्थगित कर दिया गया है. शिक्षा सचिव की ओर से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की सेवा समाप्त न करने के आदेश के पहले, कई जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों पर कार्रवाई करने का आदेश जारी कर दिया. बता दें 20 दिसंबर को हाइकोर्ट की ओर से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को हटाये जाने पर रोक लगायी गयी थी.

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24 दिसंबर को शिक्षा सचिव ने सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया

इसके पहले 24 दिसंबर को शिक्षा सचिव एपी सिंह की ओर से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया गया. सचिव ने इस पत्र के जरिये आदेश दिया था कि तत्काल प्रभाव से राज्य में कार्यरत सभी अनट्रेंड शिक्षकों की सेवा वापस ले ली जाये.

साथ ही कहा गया था कि निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि अनट्रेंड शिक्षकों को वेतन का भुगतान नहीं किया जाये और उनसे कार्य लिये जाने की स्थिति में शिक्षकों के वेतन संबंधी दावों की वसूली कार्य लेनेवाले पदाधिकारी से की जाये.

पारा शिक्षकों के मामले में यह जिम्मेदारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सह जिला शिक्षा पदाधिकारी की होगी कि अनट्रेंड शिक्षकों से कार्य नहीं लिया जाये और उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया जाये. विभाग के इस निर्देश पर रघुवर दास सरकार के मंत्री का अनुमोदन था.

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31 मार्च 2019 तक ट्रेंड होना अनिवार्य था

पूर्व में शिक्षा विभाग की ओर से 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षित होने का निर्देश विभाग की ओर से दिया गया था. अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार संशोधन अधिनियम 2017 के तहत 4 वर्ष के अंदर निर्धारित अहर्ता को पूरा कर लेने के लिए कहा गया था. जिसके तहत 31 मार्च 2019 तक सभी शिक्षकों को ट्रेंड होना अनिवार्य था. झारखंड सरकार ने भी ट्रेनिंग के लिए कार्यक्रम चलाये थे. जिसकी जिम्मेवारी एनआइओएस भारत सरकार की संस्था को दी गयी थी.

इस कार्यक्रम के तहत सेवारत शिक्षक भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते थे. वर्तमान में राज्य में अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की संख्या लगभग चार हजार है. सचिव के इस निर्णय का एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने स्वागत किया.

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