
Pravin Kumar
Ranchi: सीएनटी-एसपीटी एक्ट को लेकर सूबे की राजनीति हमेशा गर्म रही है. आदिवासी अपनी जमीन के लिए लड़ते नजर आये. वहीं डबल इंजन सरकार ने आदिवासी और सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण की जांच के लिए एसआइटी (विशेष जांच दल) गठित की थी. लेकिन रघुवर सरकार ने इसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक ही नहीं किया.
विधानसभा में भी लगातार एसआइटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग होती रही, लेकिन सरकार ने अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है. सीएम ने खुद कई बार खुले मंच से घोषणा की थी कि आदिवासियों की जमीन हड़पनेवालों की जगह होटवार जेल है.
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रांची जिले में ही लंबित करीब 3541 दखल दिहानी के मामले, जहां सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर आदिवासी जमीन ली गई है. मामले फाइलों में बंद पड़े हैं. सरकार ने एसआइटी का अस्तित्व समाप्त कर दिया. आदिवासी को उनकी जमीन से बेदखल कर सीएनटी-एसपीटी एक्ट उल्लंघन के मामले झारखंड विधानसभा चुनाव में चुनावी मुद्दे नहीं बन सके.
भूमि के अवैध हस्तांतरण का सिलसिला अब भी जारी
राज्य में सीएनटी-एसपीटी जैसे मजबूत कानून होने के बावजूद गैर-आदिवासियों के बीच भूमि के अवैध हस्तांतरण का सिलसिला अब भी जारी है. विभिन्न जिलों में आदिवासियों की 36492 एकड़ जमीन गैर आदिवासियों ने हथिया ली है. वहीं 4745 आदिवासियों ने अपनी जमीन वापसी के लिए विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे भी दायर किये हैं. इस पर भी फैसला अब तक अधर में लटका हुआ है.
मजबूत कानून रहने के बाद भी जमीन के अवैध हस्तांतरण का खेल जारी
एसआइटी का गठन सीएनटी-एसपीटी के दायरे में आनेवाली जमीन के अवैध हस्तांतरण की जांच करने के लिए किया गया था. इसके अलावा विशेष विनियमन पदाधिकारियों द्वारा अनुसूचित जनजाति की जमीन के तथ्यों को छिपाते हुए नियम विरुद्ध हेरा-फेरी कर भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करनी थी.
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सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण की जांच करनी थी. जांच प्रक्रिया में भू-राजस्व विभाग को सहयोग करना था. एसआइटी का गठन 24 मार्च 2015 को किया गया था.
एसआइटी गठन के पीछे सरकार ने स्वीकार किया था कि सरकारी भूमि गैर मजरूआ आम/खास को पंजी टू में बगैर हेराफेरी करते हुए अवैध रूप से जमाबंदी कायम करने का खेल राज्य में चल रहा है.
इस आधार पर हुआ था एसआइटी का गठन
भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची के तहत झारखंड के आदिवासियों की भूमि की सुरक्षा का विशेष प्रावधान है. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 एवं संताल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 नौवीं अनुसूची के अंतर्गत संरक्षित है.
इसके तहत आदिवासी भूमि की सुरक्षा के व्यापक प्रावधान किये गये हैं. साथ ही, सीएनटी एक्ट की धारा 71A द्वारा अवैध हस्तांतरित भूमि वास्तविक मूल रैयतों को वापसी का प्रावधान है. इसे ध्यान में रखते हुए एसआइटी का गठन किया गया था.
एसआइटी ने अपने कार्यकाल में क्या किया
एसआइटी के गठन के बाद जिलावार टीम गठित की गयी थी, जिसने गैर आदिवासियों के बीच आदिवासी जमीन के हस्तांतरण का डाटा तैयार किया था. इसकी रिपोर्ट भी तैयार की गयी थी. एसआइटी एक साल के लिए गठित की गयी थी.
इसका कार्यकाल 31 मार्च 2016 को पूरा होने के बाद इसे फिर एक साल का अवधि विस्तार दिया गया. विशेष जांच दल ने सरकार को जांच प्रतिवेदन भी सौंपा. यह प्रतिवेदन जिले के उपायुक्तों को भी उपलब्ध कराया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
किस जिले में आदिवासी जमीन के कितने मामले लंबित और कितने पर कब्जा
| जिला | लंबित मुकदमे | कब्जा |
| रामगढ़ | 59 | 64.64 एकड़ |
| पाकुड़ | 110 | 86.38 एकड़ |
| प. सिंहभूम | 37 | 11.32 एकड़ |
| पू. सिंहभूम | 22 | 15.43 एकड़ |
| सरायकेला-खरसावां | 56 | 70.46 एकड़ |
| रांची | 3541 | 1894.63 एकड़ |
| पलामू | 04 | 29.04 एकड़ |
| हजारीबाग | 07 | 27.69 एकड़ |
| धनबाद | 18 | 23.65 एकड़ |
| गुमला | 109 | 90.76 एकड़ |
| गिरिडीह | 02 | 16.83 एकड़ |
| लोहरदगा | 50 | 171.81 एकड़ |
| गढ़वा | 05 | 6.11 एकड़ |
| खूंटी | 08 | 7.56 एकड़ |
| सिमडेगा | 04 | 0.29 एकड़ |
| बोकारो | 19 | 45.17 एकड़ |
| गोड्डा | 22 | 17.73 एकड़ |
| साहेबगंज | 01 | 0.6 एकड़ |
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