
NewsWing Desk: दीवाली से दो दिन पहले आने वाले धनतेरस पर्व का खास महत्व है. इस साल शुक्रवार (25 अक्टूबर) को धनतेरस पूरे देश में मनाया जा रहा है. कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन अमृत का कलश लेकर देवताओं के वैद्य धनवंतरि प्रकट हुए थे.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं. और स्वास्थ्य रक्षा और आरोग्य के लिए धनवंतरि देव की उपासना की जाती है. भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ-साथ यमराज की पूजा भी की जाती है.
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धनतेरस को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन-संपन्नता के लिए भगवान कुबेर की पूजा की जाती है. इस दिन लोग मूल्यवान धातु, नये बर्तन और सोना-चांदी से बनी चीजें खरीदते हैं. जिसकी दीवाली वाले दिन पूजा होती है. धनतेरस पर समान की खरीदारी करना शुभ माना जाता है.
धनतेरस पर इन चीजों की करें खरीददारी?
– धातु के बने बर्तन, उसमें भी अगर पानी का बर्तन हो तो ज्यादा अच्छा होगा
– गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां. दोनों मूर्तियां अलग-अलग होनी चाहिए
– खील-बताशे के साथ मिटटी के दीपक, एक बड़ा दीपक भी जरूर खरीदें
– साथ ही अंकों का बना हुआ धन का कोई यंत्र भी खरीदना चाहिए.
धनतेरस पर खरीदारी और पूजा के मुहूर्त
सुबह 8:10 से 10:35 तक
सुबह 11:42 से दोपहर 12:20 तक
दोपहर 12:10 से 01:20 तक
शाम 04:17 से 05:35 तक
रात्रि 09:00 से 10:25 तक
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धनतेरस पर कैसे करें पूजा उपासना करें?
शाम में उत्तर की ओर कुबेर और धनवंतरि की स्थापना करनी चाहिए. सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जलाएं. साथ ही भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरि को पीली मिठाई चढ़ाएं. “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” का जाप करें.
इसके बाद “धन्वन्तरि स्तोत्र” का पाठ करें. इसके बाद प्रसाद ग्रहण करें. पूजा के बाद दीवाली पर कुबेर को धन स्थान पर और धन्वन्तरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें.
इन बातों का खास ध्यान रखें?
घर की साफ-सफाई का काम धनतेरस के दिन नहीं करना चाहिए. इस दिन कुबेर के साथ-साथ धनवंतरि देवता की उपासना भी जरूर करें. दीवाली के लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और अन्य पूजन सामग्री भी धनतेरस के दिन ही खरीद लें.
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