
Manoj Kumar Pintu
Giridih: मोदी सरकार के पार्ट-2 के कार्यकाल में उम्मीद है कि गिरिडीह शहर को जल्द ही नये नेशनल हाइवे की सौगात मिल सकती है. शहर को मिलने वाला प्रस्तावित नेशनल हाइवे चार लेन का होगा. यह साफ हो चुका है. इसकी पुष्टि पथ प्रमंडल गिरिडीह के कार्यपालक अभियंता जयराम ने की है.
हालांकि शहर का यह नया नेशनल हाइवे कितने की लागत से तैयार होगा, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है क्योंकि हाइवे निर्माण का प्रस्ताव गिरिडीह पथ प्रमंडल ने कुछ महीनों पहले ही स्टेट हाइवे अथॉरिटी और सरकार को वित्तीय सहयोग करने वाली एजेंसी एशियन डेवलमेंट बैंक एडीबी को भेजा है. जिसकी स्वीकृति भी जल्द मिलने की उम्मीद है.
स्वीकृति मिलते ही हाइवे निर्माण की प्रकिया को तेज किया जायेगा. वैसे स्टेट हाइवे अथॉरिटी डीपीआर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रही है. डीपीआर को तैयार करने में चार माह का वक्त लग सकता है.
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अथॉरिटी के पास 80 प्रतिशत जमीन पहले से मौजूद है
डीपीआर तैयार होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि शहर का यह नेशनल हाइवे कितने की लागत से बनाया जायेगा. पथ प्रमंडल सूत्रों की मानें तो हाइवे निर्माण की लागत करोड़ो की होगी. पथ प्रमंडल सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित हाइवे निर्माण के लिए अथॉरिटी के पास 80 प्रतिशत जमीन पहले से मौजूद है.
जिसमें कुछ जमीनों पर अस्थायी अतिक्रमण की बात सामने आ रही है. पथ प्रमंडल के गिरिडीह कार्यपालक अभियंता जयराम और हाइवे अथॉरिटी के अधीक्षक अभियंता ने शुक्रवार को प्रस्तावित हाइवे निर्माण की जमीन का सर्वे किया.
सर्वे के दौरान साफ हो गया कि हाईव निर्माण के लिए जितनी जमीन की जरुरत पड़ेगी, वह मौजूद है.
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दो चरणों में होगा निर्माण
प्रस्तावित नेशनल हाइवे का निर्माण दो चरणों में किया जायेगा. इसकी कुल लंबाई 107 किमी बतायी जा रही है. दो चरणों में होने वाले हाइवे निर्माण में पहले चरण में बगोदर से बरमसिया होते हुए कोवाड़ और इसके बाद कोवाड़ से पचंबा में सड़क बनेगी. दूसरे चरण में शहर के बड़ा चैक से लेकर पचंबा तक की सड़क शामिल है.
बड़ा चैक से हो कर प्रस्तावित हाइवे बस पड़ाव से गुजरेगा, और बस पड़ाव से होते हुए हाइवे पचंबा से कनेक्ट होगा. इधर कार्यपालक अभियंता जयराम ने बताया कि प्रस्तावित चार लेन हाइवे के लिए जो सर्वे किया गया. उसके अनुसार पर्याप्त जमीन मौजूद है. सर्वे के दौरान कुछ स्थानों पर अस्थायी अतिक्रमण पाया गया.
जिसमें सरकारी और गैर सरकारी दोनों प्रकार के अतिक्रमण हैं. जिसे अतिक्रमणमुक्त करना कोई समस्या नहीं है.
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