
New Delhi: चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के मामलों में अपने आयुक्त के असहमति नोट को सार्वजनिक करने से साफ इनकार कर दिया है. सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत इसकी मांग की गयी थी. EC ने कहा है कि ऐसी सूचना देने से छूट मिली हुई है जिससे किसी व्यक्ति की जान या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
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दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी पर भाषणों के जरिए आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाने वाली शिकायतों पर किये गये फैसलों पर लवासा ने असहमति जाहिर की थी. आयोग ने पीएम मोदी को सभी में क्लीन चिट दे दी थी. आपको बता दें कि तीन सदस्यों वाले पूर्ण आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और दो अन्य आयुक्त- अशोक लवासा और सुशील चंद्र शामिल हैं.
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आरटीआइ कार्यकर्ता को यह मिला जवाब
पुणे के RTI कार्यकर्ता विहार धुर्वे ने लवासा के असहमति नोट की मांग की थी, जिसका निर्वाचन आयोग ने जवाब दिया है. यह मामला पीएम मोदी की 1 अप्रैल को वर्धा, 9 अप्रैल को लातूर और 21 अप्रैल को पाटन और बाड़मेर तथा 25 अप्रैल को वाराणसी में हुई रैलियों में दिये भाषणों को लेकर था. चुनाव आयोग ने आरटीआइ ऐक्ट के सेक्शन 8 (1) (जी) का हवाला देते हुए कहा है कि ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है जिससे किसी व्यक्ति की जान या शारीरिक सुरक्षा या सूचना के सोर्स की पहचान या कानून प्रवर्तन एजेंसियों या सुरक्षा उद्देश्यों के लिए दी गयी सहायता खतरे में पड़ सकती है. धुर्वे ने अपनायी गयी प्रक्रिया और भाषणों को लेकर आयोग के फैसले के बारे में भी जानकारी मांगी थी. इस जानकारी को भी सेक्शन 8 (1) (जी) के तहत देने से इनकार कर दिया गया.
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