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राज्य में 5 फीसदी भी पन बिजली नहीं,  हाइडल पावर प्लांट पर ग्रहण, 68 स्थान किये गये थे चिन्हित

 फीडबैक वेंचर को किया गया था परमार्शी नियुक्त, 400 मेगावाट बिजली उत्पादन का था लक्ष्य.

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Ranchi : राज्य में स्थापित होने वाले हाइड्रोपावर प्लांट(जल विद्युत परियोजना) पर ग्रहण लग गया है. इस पर दो साल तक कसरत भी की गई, लेकिन स्थिति जस की तस है. राज्य में एक मात्र हाइड्रो पावर प्लांट सिकिदिरी हाइडल है. जल विद्युत परियोजना के लिये 68 जगह चिन्हित किये गये थे. इन जगहों पर पांच से 400 मेगावाट तक के पावर प्लांट स्थापित किये जाने की योजना थी. फीड बैक वेंचर को परामर्शी नियुक्त किया गया था. 10 कंपनियों ने प्लांट लगाने की इच्छा भी जताई थी.

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क्या किया गया था प्रावधान

प्रावधान यह किया गया था कि जहां भी जल विद्युत परियोजना(हाइडल पावर प्लांट) स्थापित किया जायेगा, उस प्लांट से राज्य को 14 फीसदी मुफ्त बिजली मिलेगी. साथ ही जहां प्लांट स्थापित होगा वहां के स्थानीय लोगों को दो फीसदी बिजली दी जायेगी. 12 फीसदी बिजली राज्य सरकार लेगी. शेष बिजली बेची जा सकेगी.

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जरेडा लगाता दो हाइडल पावर प्लांट

दो हाइडल पावर प्लांट लगाने की जिम्मेवारी जरेडा को मिली थी. ये पावर प्लांट 3-3 मेगावाट के होते. इसके लिये मनोहरपुर और चांडिल में जगह चिन्हित किये गये थे. प्लांट का निर्माण पीपीपी मॉड में होता. अन्य प्लांटों के लिये शंख नदी के आस-पास के क्षेत्र, जोन्हा, नेतरहाट, बसिया, कोलेबिरा, सिमडेगा, मानगो, मनोहरपुर, चांडिल, लोहाजीभी, देवघर, गोड्डा और गढ़वा में जगह चिन्हित किये गये थे.

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क्या है केंद्रीय मापदंड

केंद्रीय मापदंड के अनुसार किसी भी राज्य में 60 फीसदी थर्मल पावर और 40 फीसदी हाइडल पावर का होना जरूरी है. ऐसा होने से प्रदूषण की शर्तों का अनुपालन होता. वर्तमान में राज्य में पांच फीसदी भी पन बिजली नहीं है. पावर प्लांट लगने से ग्रीन पावर विकसित होता. प्रदूषण की समस्या नहीं होती. केंद्रीय मापदंड को पूरा किया जाता. हाइडल प्लांट लगने से ग्रिड में स्थायित्व आता. बिजली उत्पादन का खर्च भी न्यूनतम होता.

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