
NW Desk: मुंबई की 26/11 (Mumbai Terror Attack) की वो ठंड भरी रात और शहर एकाएक बम के धमाके दहल गया था. एक नहीं कई जगहों पर आतंकियों ने बम धमाके किये. उस हमले के 10 साल होने के बाद भी आज तक दर्द ताजा है. जिन्होंने उसे देखा और महसूस किया. उनके जेहन से वो काली रात का मंजर अब तक मंडराता रहता है. सेना, मुंबई पुलिस से लेकर बॉलीवुड सितारे और नेता शहीदों को याद कर रहे हैं.
इस मौके पर आइए जानते हैं कि बॉलीवुड सितारों ने किस तरह मुंबई हमले को याद किया है. मुंबई हमले को लेकर मधुर भंडारकर, विवेक ओबराय, इम्तियाज अली, दीया मिर्जा, फरहान अख्तर से लेकर तमाम बॉलीवुड सितारों ने अपने दर्द को बताया है. खैर जिसने उस रात के दर्द को झेला है उसे तो वहीं बता सकते हैं. इस मौके पर ओडिशा के अंतर्राष्ट्रीय रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक के अलावा अन्य लोगों ने भी पेंटिंग और कला के जरिए इन वीरों को याद किया है.
विवेक ओबेरॉय: विवेक ओबेरॉय उस रात की बात बताते हैं कि फिलाडेल्फिया में सैफ अली खान, करीना कपूर , रेनसील के साथ शूटिंग कर रहे थे. जब हमें हमले की खबर मिली तो हम लोग चौंक गये. हमें परिवार की चिंता सताने लगी. हम लोग दूर होकर बहुत ही मजबूर हो गए थे. हमें परिवार की फिकर थी लेकिन कुछ कर नहीं सकते थे. उसके बाद हम लोग अपने शहर और घर-परिवार के लिए प्रार्थना करने लगे.
नील नितीन मुकेश: नील नितीन मुकेश ने बताया कि वे पिछले साल इसी दिन शूटिंग कर रहे थे. उनको बरबस काली रात की याद आ रही थी. उनका कहना है कि काश, वे मुबंई के खुशियों वाले दिन को लौटा पाते. जिन लोगों ने अपने परिवार और बच्चों को खोया उनको लौटा देते.
तुषार कपूर: तुषार कपूर बताते हैं कि वे उस दिन कैपटाउन में शूटिंग कर रहे थे. तभी इस घटना की जानकारी मिली. बस इसके बाद वह डर गये. जब वे मुंबई लौटे तो मंजर देखकर सहम गये. पहली बार उन्होंने मुंबई को गुमशुम होते देखा था.
इम्तियाज अली: मुझे याद है कि मैं देर रात फिल्म शूटिंग करके घर आया था. मुझे टीवी ऑन करने का मन किया. मैं जो देख रहा था, उसने मुझे अगले 70 घंटों तक डरा कर कैद रखा. हम उस वर्ष के डर से अब तक रिहा नहीं हो पाये हैं. हमें संवेदनशील होना चाहिए और 26/11 पीड़ितों के परिवारों को मीडिया कंटेंट के लिए याद नहीं दिलाना है.
फरहान अख्तर: फरहान अख्तर बताते हैं वे उस रात ओय एपिसोड की शूटिंग कर के लौटे थे. वे रितिक रोशन के साथ काम कर रहे थे. जब हमने टीवी खोला था देखा कि बाहर का मंजर बिल्कुल बदल गया है. मुंबई डर में कैद हो गयी है. हमारी आंखों के सामने सबकुछ हो रहा था लेकिन हम कुछ ना कर सके.




