
Chhaya
Ranchi : 2017 से केंद्र सरकार की ओर से टीबी मरीजों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं. जिसके तहत आदिवासी जिलों के मरीजों को टीबी होने पर उन्हें 750 रूपये इलाज कराने के लिए दी जाती है. यह राशि आरएनटीसीपी के तहत दी जाती है. 2017 के पूर्व यह राशि मरीजों को इलाज कराने के बाद दी जाती थी.
लेकिन 2017 से यह राशि मरीजों के पाये जाने पर इलाज कराने के पहले ही दे दी जा रही है. स्टेट टीबी सेल की ओर से मिले आंकड़े के अनुसार, राज्य में 2017 से कुल 23,539 मरीज टीबी के पाये गये. ये सभी मरीज आदिवासी जिलों के थे. लेकिन इनमें से मात्र 8165 मरीजों को ही 750 रूपये प्रोत्साहन राशि दी गयी.
आंकड़ों की मानें तो लगभग 15,374 मरीजों को सरकार ने प्रोत्साहन राशि नहीं दिया. गौरतलब है कि ये आंकड़े अप्रैल 2017 से अप्रैल 2019 तक के मरीजों के हैं. जबकि केंद्र सरकार की योजना है कि 2025 तक देश को टीबी मुक्त किया जाये.
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किसी जिले में नहीं दी गयी शत-प्रतिशत मरीजों को राशि
इन आंकड़ों को देखें तो 14 जनजातीय जिलों से किसी में भी शत-प्रतिशत मरीजों को प्रोत्साहन राशि नहीं दी गयी. पश्चिमी सिंहभूम में 2788 मरीजों को टीबी हुआ. इनमें से मात्र 63 मरीजों को ही प्रोत्साहन राशि मिल पायी.
वहीं साहेबगंज में इसी समय 1587 मरीज पाये गये. इनमें से 225 मरीजों को राशि लाभ दिया गया. अन्य जिलों के आंकड़े इस प्रकार हैं.
| जिला | मरीजों की संख्या | कितनों को मिली राशि |
| सिमडेगा | 763 | 77 |
| सरायकेला/खरसावां | 2745 | 475 |
| दुमका | 1916 | 578 |
| पाकुड़ | 2239 | 817 |
| गुमला | 889 | 266 |
| पू सिंहभूम | 4471 | 1551 |
| लोहरदगा | 639 | 213 |
| गोड्डा | 319 | 99 |
| खूंटी | 466 | 192 |
| जामताड़ा | 573 | 289 |
| लातेहार | 779 | 456 |
| रांची | 3392 | 2935 |
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मरीजों ने कहा- दो साल बीत गये नहीं मिल रही राशि
कांके प्रखंड अंतर्गत चामगुरू गांव में हर चार में से एक घर में टीबी मरीज है. इन गांव वालों से बात करने से जानकारी हुई कि इन मरीजों को न तो प्रोत्साहन राशि मिली और न ही निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत मिलने वाले पांच सौ रूपये. सरकार ये राशि दो माह में एक बार एक हजार रूपये देती है ( एक माह का पांच सौ ) .
वहीं इस बारे में चामगुरू गांव की ललिता देवी ने बताया कि उनका वर्तमान में दूसरी बार टीबी का इलाज चल रहा है. इसके पहले 2018 में भी उन्होंने छह महीने टीबी का इलाज कराया था. लेकिन न तो 2018 में छह माह और न ही इस साल ही उन्हें किसी तरह की सहयोग राशि मिली.
इनकी ही तरह एक और मरीज हमें मिले नाम मंगरा उरांव. मंगरा को भी दूसरी बार टीबी हुआ है. और इस बार भी उन्हें किसी तरह कोई लाभ नहीं मिला. कुछ परिजनों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र जाने पर बैंक खाता नहीं होने की बात की जाती है. लेकिन बैंक खाता समेत सभी जानकारियां दे दी गयी है. इसके बाद भी पैसा नहीं मिल रहा.
क्या है सरकारी प्रावधान
नियमानुसार मरीजों के टीबी होने की जानकारी मिलने पर उनका निबंधन कराया जाता है. इसमें बैंक खाता अनिवार्य रूप से लिया जाता है. जिन मरीजों का अपना कोई बैंक खाता नहीं होता, उनके परिजनों के बैंक खाता में 750 रूपये डीबीटी के माध्यम से दी जाती है. जो इलाज कराने का खर्च होता है.
इसके बाद प्रति माह मरीज के खाते में पांच सौ रूपये दी जाती है. जो पोषाहार के लिये होता है. मरीजों को दो माह का पैसा एक बार दिया जाता है. जो एक हजार की राशि है. स्टेट टीबी ऑफिसर से इस संबध में कई बार जानकारी लेने की कोशिश की गयी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.
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