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राज्य में 3378 की जगह हैं 1524 डॉक्टर, सदर अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, सीएम कह रहे मोहल्लों में भी बैठायेंगे MBBS

Kumar Gaurav

Ranchi: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि मोहल्ला क्लिनिक में सुबह और शाम दो घंटे डॉक्टर बैठेंगे. यह सुविधा राज्य के सभी मोहल्लों में शुरू की जायेगी. राज्य में रहनेवाले लोगों के लिए यह बहुत ही अच्छी खबर है. पर इस अच्छी खबर पर खुश होने से पहले इस बात को जानना जरुरी है राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स, पीएमसीएच, एमजीएम जैसे अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टरों की भारी कमी है और सरकार इस कमी को पूरा नहीं कर पा रही है. जिले के सबसे बड़े अस्पतालों में जब असहाय गरीब अपना ईलाज कराने पहुंचते हैं तो वहां डॉक्टरों के नहीं होने के कारण बेहतर ईलाज से वंचित रहना पड़ता है. ऐसे में मोहल्ला क्लिनिक में सुबह और शाम में दो घंटे बैठने के लिए डॉक्टर कहां से आयेंगे ये तो राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग ही समझ सकता है.

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आधे से भी कम हैं डॉक्टर

राज्य में डॉक्टरों के सृजित पदों को भी सरकार नहीं भर पायी है. डॉक्टरों के 3378 पद हैं, जबकि महज 1524 डॉक्टर सेवा दे रहे हैं. बचे हुए डॉक्टरों में से भी सौ से ज्यादा डॉक्टर मरीज देखने की जगह प्रशासनिक काम करते हैं.

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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ जीएनएम, एएनएम के भरोसे

प्राथमिक स्तर पर मौजूद प्राथमिक और प्रखंड स्तरीय अस्पतालों में तो एमबीबीएस चिकित्सकों की नियुक्ति तक नहीं होती. प्राथमिक और प्रखंड स्तर पर ईलाज का जिम्मा एएनएम और जीएनएम के भरोसे होता है. प्रत्येक दिन स्वास्थ्य केंद्रों में ईलाज कराने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं. अनुमंडल अस्पतालों में सिर्फ एक या दो डॉक्टर बमुश्किल रहते हैं. ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री मोहल्ला क्लिनिक में दो-दो घंटे सुबह-शाम चिकित्सक मुहैया कराने का दावा पूरा हो पायेगा इस पर संशय है.

हर जिले में डायलिसिस सेंटर में बिना डॉक्टर के हो रहा डायलिसिस

स्वास्थ्य विभाग की एक योजना के तहत हर जिले में डायलिसिस सेंटर खोला गया. जिन जिलों में डायलिसिस सेंटर चालू है, वहां डॉक्टर नहीं हैं. डायलिसिस का काम टेक्नीशियन के भरोसे किया जा रहा है. राज्यभर में डायलिसिस सेंटर को आउटसोर्सिंग के माध्यम से चलाया जा रहा है. पर सरकार इस बात से शायद अनजान है कि किडनी जैसी गंभीर बीमारी का ईलाज सरकार टेक्नीशियन से करा दे रही है.

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