
Ranchi : लोकतंत्र बचाओ मंच के बैनर तले शनिवार को सामूहिक पदयात्रा निकाली गयी. पदयात्रा जिला स्कूल से राजभवन तक निकाली गयी. इसमें विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. पदयात्रा में स्वामी अग्निवेश, प्रशांत भूषण, सुबोध कांत सहाय, मेधा पाटकर, दयामनी बारला, सुशांत मुखर्जी, महुआ मांझी व अन्य लोग शामिल हुए. गौरतलब है कि पदयात्रा को लेकर मंच के स्टेन स्वामी ने बताया था कि राज्य सरकार अपने आकाओं के लिए कौड़ियों के भाव आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन हड़प रही है. गरीबों का राशन, स्कूलबंदी आदि राज्य सरकार का जनता के साथ क्रूर मजाक है. पिछले चार सालों में गरीब आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक जनता पर दमन और अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं. झारखंडी जनता संगठित रूप से झारखंड सरकार के इन कुकृत्यों का पुरजोर विरोध करती रही है. शासन और विकास के सभी आयामों में सरकार का प्रदर्शन फिसड्डी रहने से सत्ताधारी दल सभी उपचुनाव हारता रहा है.
सुनियोजित ढंग से हो रहा है हिंसा फैलाने का काम
स्टेन स्वामी ने कहा था कि अच्छे दिन के वादे और विकास की विफलता से जनता का ध्यान हटाने के लिए राज्य सरकार धार्मिक उन्माद और हिंसा फैलाने का काम सुनियोजित ढंग से कर रही है. सरकार की आलोचना करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवियों को धमकाया व प्रताड़ित किया जा रहा है. संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बचाये रखने के लिए और भूख, अन्याय, हिंसा, धार्मिक-उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष करनेवाले साथियों के समर्थन के लिए यह पदयात्रा निकाली जायेगी. पदयात्रा में स्वामी अग्निवेश, प्रशांत भूषण, मेधा पाटकर, प्रफुल्ल सामंतरे भी शामिल होंगे. इसके अलावा कई जनसंगठन, प्रताड़ित परिवारों के सदस्य एवं राजनीतिक पार्टियां भी सहयोग करेंगी.
क्या कहता है लोकतंत्र बचाओ मंच
लोकतंत्र बचाओ मंच का कहना है कि संगठित भीड़ द्वारा आधे दर्जन घटनाओं में 15 निहत्थे मुसलमानों, आदिवासियों की गो तस्करी-गोहत्या का बहाना बनाकर क्रूरतापूर्ण हत्या कर दी गयी. खनिज संपन्न होने के बावजूद यहां के आदिवासी गरीबी के कारण पलायन कर रहे हैं. सरकार ने राशन वितरण व्यवस्था में अव्यावहारिक बदलाव किये, फलस्वरूप लाचार गरीबों को राशन के लिए दर-दर भटकना पड़ा और दर्जन भर से ज्यादा भूख से मौतें हुईं. 14 अगस्त 2017 को एक प्रायोजित सेमिनार में सरकार के एक मंत्री द्वारा अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज को बेइज्जत किया गया, धमकाया गया. 26 जून की खूंटी की घटना से संबंधित फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर फादर स्टेन स्वामी, विनोद कुमार सहित बीस बुद्धिजीवी, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया. 17 जुलाई 2018 को पाकुड़ में जाने-माने बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी स्वामी अग्निवेश पर, जो पहाड़िया समुदाय द्वारा बुलाये गये थे, बिना किसी संदर्भ के जानलेवा हमला किया गया. इस हमले के आरोपियों की पुलिस द्वारा अभी तक कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई है.
क्या है मंच की मांगें
- सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह के मुकदमे वापस लिये जायें.
- अल्पसंख्यकों पर जुल्म करना बंद करो.
- लिंचिंग के दोषियों को जल्द सजा दो, हिंसा प्रभावित परिवारों को मुआवजा दो.
- दंगाइयों को सम्मानित करना बंद करो.
- मॉब लिंचिंग से संबंधित सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन लागू करो. स्वामी अग्निवेश के हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार करो.




