
♦राजधानी के 3000 कपड़ा व्यवासायियों के सामने कारोबार बचाने की चुनौती
Ranchi : लॉकडाउन के बाद भले ही केंद्र सरकार ने व्यापारियों को व्यापार करने की अनुमति दे दी है, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार होती नहीं दिख रही. कपड़ा के कारोबार पर कोरोना का खास असर पड़ा है.
लॉकडाउन के दौरान तीन महीने की मार और अब ग्राहकों की कमी से कपड़ा व्यवसाय जूझ रहा है. राजधानी रांची में सिर्फ होलसेल और रिटलेर मिला कर 3000 दुकानें हैं. इनमें रांची के आसपास के इलाके भी जैसे हटिया, नामकुम के कपड़ा व्यवसायी भी शामिल हैं.
कपड़ा व्यवसायी थोक विक्रेता संघ के अध्यक्ष अनिल जालान की मानें तो कारोबार 30 प्रतिशत रह गया है. ग्राहकों की कमी सबसे बड़ी समस्या है. पहले के स्टॉक गोदाम में पड़े हैं. ईद और लगन के कपड़ों को अब बेचा नहीं जा सकता. वाहनों की कमी के कारण नया माल आ नहीं रहा. यातायात सुविधाएं रहतीं तो गांवों से लोग खरीदारी करने शहर आते. व्यवसायियों का कहना है कि बड़े होलसेलरों में यहां 30 प्रतिशत कारोबार हो रहा है. वहीं छोटे दुकानों में यह 10 प्रतिशत है. ऐेसे में दुकान के किराया से लेकर लोन देना काफी मुसीबत भरा है.
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राजधानी में कपड़े का होता था 80 करोड़ का कारोबार
राजधानी में कपड़े का 80 करोड़ का कारोबार हर महीने किया जाता था. लॉकडाउन के बाद से यह ठप है. दिन भर में एक्का दुक्का लोग आते हैं. होल सेलरों से लेकर रिटेलर तक परेशान हैं. राजधानी में होलसेल की 155, होजियरी की 125, स्कूल ड्रेसों की 175 दुकानें हैं. रिटलेरों की संख्या लगभग 2500 है. हालांकि छोटे कारोबारियों की दुकाने बंद होने की खबर अब तक नहीं है. लेकिन व्यवसायियों ने माना कि कुछ व्यवसायी दुकान बंद करने के कगार पर है. व्यवसायियों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी किराया और लोन चुकाने की है. पहले जहां एक से दो लाख तक करोबार हर महीने होता था. वहीं अब 20 से 25 हजार तक का करोबार है. ऐसे में लोन नहीं चुकाया जा सकता है. पहले के जो स्टॉक थे वो भी खराब हो गये.
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आयोजन नहीं होने से प्रभावित है बाजार
मेन रोड व्यवसायी समिति के अध्यक्ष सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि त्योहार और आयोजन नहीं होने से बाजार ज्यादा प्रभावित है. ईद, लगन के सभी स्टॉक बबार्द हो गये. व्यापारियों को नुकसान हुआ. रिटेलरों का सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत कारोबार हो रहा है. पहले त्योहार-आयोजन होते थे तो लोग खरीदारी करते थे. लेकिन आयोजन नहीं होने से बाजार बुरी तरह प्रभावित है. उन्होंने बताया कि लोग फैशन के लिए कपड़े खरीदते हैं.
स्कूल ड्रेस दुकानदारों की स्थिति बहुत खराब
व्यवसायियों से बात करने से पता चला कि सिर्फ स्कूल ड्रेस बेचनेवाले दुकानदारों की स्थिति बहुत खराब है. स्कूल बंद हैं. लोग ड्रेस नहीं खरीद रहे हैं. ये बंदी के कागार पर हैं. महामारी की स्थिति नहीं होती तो सिर्फ स्कूल ड्रेस से करोड़ों का कारोबार होता. विशेष कर फरवरी से अप्रैल महीने के दौरान. व्यवसायियों का कहना है कि स्थिति कब सुधरेगी नहीं पता, लेकिन वर्तमान स्थिति बदतर है.
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