
- सरकार को यह पता चलना चाहिए कि आखिर किन सूदूर क्षेत्रों में झारखंडी मजदूर कर रहे हैं काम, ताकि विपदा में की जा सके मदद
Ranchi : लॉकडाउन में सुदूर क्षेत्रों सहित कई राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को विभिन्न माध्यमों से लाने और एयरलिफ्ट कराने के बाद अब हेमंत सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि अब सभी प्रवासी मजदूर सरकार की सहमति से ही अन्य जगहों पर काम करने जायेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि उन राज्यों या सुदूर क्षेत्रों में यदि मजदूरों का शोषण हो, तो सरकार फौरन कार्रवाई कर सके. गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि लॉकडाउन में मजदूरों को घर लाने के प्रयासों में सरकार को इन मजदूरों से जुड़ी कई जानकारियां मिलीं.
इसमें सबसे चौंकानेवाली बात यह थी कि प्रवासी मजदूरों में कई महिलाएं भी शामिल हैं. यदा-कदा इन महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं की जानकारी भी आती है. इसे देख कर सरकार ने निर्णय लिया है कि बिना सरकार की सहमति के वे बाहर नहीं जायेंगे.
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अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की चिंता
सीएम हेमंत सोरेन से बातचीत में कपड़े और जूता-चप्पल की दुकानों छूट नहीं मिलने से व्यवसायियों की नाराजगी की बात भी पूछी गयी. इस पर हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार धीरे-धीरे लॉकडाउन खोलने की प्रक्रिया पर काम कर रही है. सरकार यह भी जानती है कि लॉकडाउन में केवल छोटे या बड़े उद्योगों को ही नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि राज्य सरकार को भी काफी आर्थिक नुकसान हुआ है.
सरकार अभी सभी बातों का आकलन कर रही है. किस तरीके से अर्थव्यवस्था आगे बढ़े, इस पर सरकार चिंतित है. क्या बेहतर होगा, इस पर सरकार जल्द निर्णय लेगी. इससे पहले देर शाम सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री से प्रोजेक्ट भवन में ही मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सीएम से एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को पूरी तरह से खोलने की मांग की थी.
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