
Bhopal: मध्य प्रदेश औऱ छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार के बाद इन प्रदेशों के पूर्व मुख्यमंत्रियों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और डॉ रमन सिंह के कार्यकाल की गड़बड़ियां कैग की रिपोर्ट में सामने आ रही हैं. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इस बात का इशारा किया गया है कि शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में कई विभागों में कथित तौर पर घोटाले हुए और वित्तीय अनियमितताएं बरती गयी हैं. कैग के अनुसार वाहन कर, स्टॉम्प पंजीकरण शुल्क, खनन, जल कर, वाणिज्यिक कर विभागों से सरकारी खजाने को कुल मिला कर 6270.37 करोड़ का नुकसान हुआ. कैग ने कई बिंदुओं पर सवाल उठाया है.
कई योजनाओं में गड़बड़ी हुई
रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि पेंच परियोजना में 376 करोड़ की अनियमितता बरती गयी गई. वहीं सार्वजनिक उपक्रमों में 1224 करोड़ का नुकसान हुआ है. छात्रावास संचालन में 147 करोड़ की अनियमितता हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शिवराज सरकार के दौरान 2016-17 के वित्तीय वर्ष में भारी अनियमितताएं हुईं.
निगम-मंडल लगातार घाटे में रहे
कैग रिपोर्ट के अनुसार सरकार निगम-मंडलों में निवेश करती रही, लेकिन नुकसान बढ़ता रहा. यह भी कहा गया है कि 2012 से 2017 के दौरान राज्य के निगम-मंडल लगातार घाटे में रहे. इसमें सरकार को 4 हजार 857 करोड़ का नुकसान हुआ. वहीं 2017 में एक हजार 224 करोड़ का नुकसान हुआ था. इतना ही नहीं सरकारी विभागों ने 18 हजार करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दिया.
छत्तीसगढ़ में 4601 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी
छत्तीसगढ़ में डॉ रमन सिंह के शासनकाल में भी करोड़ों के टेंडर में गड़बड़ी की गयी है. कैग रिपोर्ट के मुताबिक 4601 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी की गयी है. 17 विभागों के अधिकारियों ने 4601 करोड़ के टेंडर में 74 ऐसे कंप्यूटर का इस्तेमाल निविदा अपलोड करने के लिए किया गया था, जिनका इस्तेमाल वापस उन्हीं टेंडरों को भरने के लिए किया गया.
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