
Ranchi : एसटी-एसएसी थाना में मामला दर्ज कराने पहुंचे आदिवासी युवक एफआईआर दर्ज नहीं होने के कारण थाना के समक्ष ही धरना पर बैठ गये. एसटी-एससी थाना के समक्ष बैठे अजय टोप्पो ने बताया कि कोतवाली थाना प्रभारी के खिलाफ मामला दर्ज कराने पहुंचे थे. यहां उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा रहा. अजय ने बताया कि 11 जनवरी को कोतवाली थाना प्रभारी एसएन मंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई. अजय ने कहा, “कोतवाली थाना प्रभारी एसएन मंडल और हवलदार मनोज प्रसाद ने तीन आदिवासी युवक शिबू तिर्की, नवीन उरांव और मेरे साथ बदतमीजी की थी. थाना प्रभारी ने हम तीनों को जाति सूचक गाली दी और मारपीट भी की, जबकि हमारी कोई गलती भी नहीं थी. यहां तक कि थाना प्रभारी ने गोली मारने की भी धमकी दी. वहीं, हमारे के एक साथी शिबू तिर्की को बगैर किसी जुर्म के हाजत में डाल दिया.” अजय ने कहा कि क्या आदिवासी होना अपराध है. आदिवासी युवक संजू ने बताया कि कोतवाली डीएसपी द्वारा इस संबंध में समझौता करने को कहा जा रहा है. इसके लिए हमें वार्ता के लिए बुलाया गया है.
क्या है पूरा मामला
अजय उरांव ने बताया कि 11 जनवरी को दोपहर में कचहरी चौक पर पुलिस और शिबू तिर्की के बीच कहा-सुनी हो गयी. विवाद बढ़ने के बाद शिबू तिर्की, अजय टोप्पो और नवीन उरांव को कोतवाली थाना ले जाया गया था. थाना में तीनों के साथ मारपीट की गयी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया. इसके बाद थाना प्रभारी ने नवीन और अजय को छोड दिया, लेकिन शिबू को हाजत में बंद कर दिया. अजय ने बताया, “मात्र तीन घंटे की कार्रवाई में पुलिस ने शिबू को जेल में बंद कर दिया और हमलोग पांच दिन से दोषी पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं, लेकिन हमारी कोई नहीं सुन रहा.”
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