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बेरोजगारों के साथ ठगी की कोशिश करने वालों पर क्यों ना हो कार्रवाई ?

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Ranchi: कोई मीडिया हाउस अगर ये चाहे कि उसे सरकारी विज्ञापन मिल जाए, तो उसे कई पापड़ बेलने पड़ते हैं. लेकिन प्रशासन को कोई सरकारी विज्ञापन अखबार में लगाना चाहे, तो चुटकियों में यह काम हो जाएगा. चाहे वो विज्ञापन जनहित के लिए हो या ना. जिले से कोई भी विज्ञापन प्रकाशित होने से पहले संबंधित विभाग जिला प्रशासन के आला अधिकारी से जो झारखंड में डीसी हुआ करते हैं, उनसे अनुमति लेनी होती है.

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डीसी की अनुमति से ही विज्ञापन जन संपर्क की विभाग साइट पर अपलोड होती है. जिसे अखबार अपने पन्नों पर जगह देता है. इस प्रक्रिया के तहत छपने वाले विज्ञापन अगर गलत हों तो वो सभी दोषी माने जाने चाहिए. जिनके टेबल पर से विज्ञापन होते हुए अखबारों तक पहुंचा है. लेकिन, क्या बोकारो श्रम, नियोजन और प्रशिक्षण विभाग की तरफ से बेरोजगारों को गुमराह कर उनसे पैसे की वसूली करने वाले विज्ञापन पर सरकार या बोकारो प्रशासन कार्रवाई करेगा ?

बोकारो जिला प्रशासन की तरफ से छपा था विज्ञापन

रोजगार कैंप को लेकर अखबार में छपा विज्ञापन

जिले में हर विभाग की अलग भूमिका है. श्रम नियोजन विभाग की तरफ से आठ सितंबर को लोकल दैनिक अखबारों में एक विज्ञापन छपा. जिसमें साफ तौर से इस बात का उल्लेख था कि बोकारो आईटीआई कैंपस में 14 और 15 सिंतबर को रोजगार कैंप लगाया जाएगा. रोजगार कैंप के जरिए प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित लोगों को प्राइवेट कंपनियों में नौ हजार से लेकर 20,000 रुपए तक की मासिक सैलेरी वाली नौकरी दी जाएगी.

श्रम नियोजन और प्रशिक्षण विभाग के विज्ञापन में इस बात का साफ तौर से उल्लेख है कि GLOBAL HR SERVICES, NOIDA नाम की एक कंपनी रोजगार देने में कंस्लटेंसी के तौर पर काम करेगी. लेकिन नौकरी उन्हीं को मिलेगी जो 1000 रुपए का रजिस्ट्रेशन कराता है. विज्ञापन अखबारों में आने के बाद इस खबर को न्यूज विंग ने पूरी पड़ताल करने के बाद इसे प्रमुखता से छापा. खबर का असर हुआ और रोजगार मेला को बोकारो आईटीआई ने रद्द कर दिया.

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क्या कंपनी और साजिश करने वालों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ?

न्यूज विंग की खबर पर बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने बयान देते हुए कहा कि खबर छपने के बाद मैंने मामले में विभाग के मंत्री राज पलिवार से बात की. विभाग ने कार्रवाई करते हुए अविलंब रोजगार कैंप को रद्द कर दिया. विधायक ने न्यूज विंग को यह भी कहा कि बोकारो ही नहीं बल्कि झारखंड के किसी कोने में कोई कंपनी बेरोजगारों को ठगने का काम करेगी तो उसके लिए उचित कार्रवाई होनी चाहिए. विधायक बिरंची नारायण के इस सकारात्मक पहल की सराहना न्यूज विंग करता है.

लेकिन, सवाल है कि क्या कार्रवाई इसी मामले से शुरू नहीं होनी चाहिए. कार्रवाई आखिर श्रम, नियोजन और प्रशिक्षण विभाग के उस अधिकारी पर क्यों ना हो, जिसके दस्तखत से यह विज्ञापन निकाला. कार्रवाई बोकारो आईटीआई पर क्यों ना हो जिसने अपने स्टूडेंट्स को इस कैंप में शामिल होने को कहा और रोजगार कैंप के लिए कंस्लटेंसी से बात की. कार्रवाई आखिर उस कंपनी पर क्यों ना हो जिसने झारखंड के बेरोजगारों को ठगने की कोशिश की. क्यों बाहर से कंपनियां आकर यहां के बेरोजगारों को ठगे? क्या पूरे मामले पर डीसी बोकारो को संज्ञान नहीं लेना चाहिए? अगर आज बोकारो डीसी ऐसे मामलों पर संज्ञान लेते हैं और कार्रवाई करते हैं, तो निश्चित तौर पर अगली बार ऐसी गुस्ताखी करने से हर कोई बचेगा.

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