
Ranchi: वर्ष 2005 से वर्ष 2007 के बीच में झारखंड विधानसभा में करीब डेढ़ सौ लोगों की अवैध नियुक्ति की जांच कराने का आग्रह करने वाली शिव शंकर शर्मा की जनहित याचिका की सुनवाई मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में हुई. मामले में विधानसभा सचिव की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया गया. कोर्ट ने मामले में जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की रिपोर्ट विधानसभा सचिव को शपथ पत्र के माध्यम से अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 18 जुलाई निर्धारित की. सुनवाई के दौरान झारखंड विधानसभा के सचिव की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली कमीशन की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है. कमीशन का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया है, रिपोर्ट तैयार किए जाने की प्रक्रिया जारी है. इस पर प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार ने कोर्ट से कहा कि मामले में जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की रिपोर्ट आई थी, अब इस रिपोर्ट को जांचने के लिए दूसरी कमीशन बनाई गई है. यह उचित प्रतीत नहीं होता है. जिस पर कोर्ट में जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. विधानसभा की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार ने पैरवी की.
दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने विधानसभा सचिव से पूछा था कि जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली कमीशन की रिपोर्ट का क्या हुआ? यह रिपोर्ट कब तक आएगी. प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार की ओर से पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि मामले की जांच को लेकर पहले जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की अध्यक्षता वाली वन मैन कमिशन बनी थी. जिसने मामले की जांच कर राज्यपाल को वर्ष 2018 में रिपोर्ट सौंपी थी. जिसके आधार पर राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को एक्शन लेने का निर्देश दिया था. लेकिन वर्ष 2021 के बाद से अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है. इस पर विधानसभा की ओर से बताया गया था कि जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की कमीशन की रिपोर्ट पूरी तरीके से स्पेसिफिक नहीं थी. जिस कारण जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद के कमीशन की रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए एक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली कमीशन बनी है.




