
Ranchi: चतरा और पूर्वी सिंहभूम के किसानों को अब 5000-5000 मीट्रिक टन की क्षमता का लाभ मिलेगा। इसके लिए गुरुवार को नेपाल हाउस, डोरंडा में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल की उपस्थिति में एमओयू हुआ। चतरा के कोल्ड स्टोरेज के लिए श्री तृप्ति राइस मिल प्रा लि और पूर्वी सिंहभूम के स्टोरेज के संचालन के लिए चयनित एजेंसी मेसर्स हजारीबाग होप एंड हेल्थ केयर प्रा लि के साथ करार हुआ.

इस मौके पर मंत्री बादल ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन भी लगातार कोल्ड स्टोरेज के निर्माण, उपयोग, संचालन को लेकर दिलचस्पी दिखा रहे थे। ऐसे में कृषि, सहकारिता विभाग ने लगातार पहल की। अब जब एमओयू हो रहा है तो किसानों के लिहाज से इसे देखते खुशी हो रही है। ये कोल्ड स्टोरेज किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। उनके आय में वृद्धि होगी.

सब्जियां और दूसरे फसलों के लिए कोल्ड स्टोरेज की सुविधा से समय पर उन्हें बाजार में उचित मूल्य पर बेचने में मदद मिलेगी.मिडिल मैन, बिचौलियों के हाथों औने पौने दाम पर बेचने की नौबत नहीं आएगी. आनेवाले समय में राज्य के 18 जिलों में भी कोल्ड स्टोरेज जल्द धरातल पर दिखेंगे। शेष चार जिलों धनबाद, खूंटी, रामगढ़ में भी स्टोरेज के लिए स्वीकृति मिल चुकी है. इस दौरान विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीख व अन्य भी मौजूद थे.
कोरोना संकट, सुखाड़ के बावजूद सकारात्मक पहल
बादल के मुताबिक पिछले दो सालों से लगातार सुखाड़ का सामना झारखंड के किसानों को करना पड़ा है. इससे पहले कोरोना संकट रहा. इन सबके बावजूद राज्य सरकार किसानों के लिए खडी़ रही। किसानों, पशुपालकों को प्रति लीटर 3 रुपये का प्रोत्साहन राशि देने का फर्क आया कि अब ढाई लाख लीटर दूध उत्पादन राज्य में हो रहा। दूध की कमाई, बोनस से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगा है.
58 लाख बिरसा किसानों के जीवन में बेहतरी के लिए दूसरे विभागों के समन्वय के साथ प्रयास हो रहे हैं।
सुखाड़ की समस्या का जिक्र करते बादल ने कहा कि हर पैरामीटर, बिंदुओं के आधार पर सुखाड़ संबंधी रिपोर्ट केंद्र को पिछले साल दी गई। 9600 करोड़ राहत के तौर पर मांगे गए। केंद्र से टीम भी यहाँ आयी। आश्वासन मिला। पर अंततः निराशा ही हाथ लगी। इस बार भी सुखाड़ की स्थिति है। 158 प्रखंडों में स्थिति कठिन है। विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार है। आपदा प्रबंधन विभाग से इसे शेयर करने के अलावा कैबिनेट में भी लाया जाएगा.




