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गिरिडीह में नवजात की मौत मामले में जांच हुई शुरू, लाइन हाजिर थानेदार के साथ पुलिस अधिकारी के आने से भड़के ग्रामीण और परिजन

Giridih: देवरी थाना पुलिस के बूट के नीचे दब कर हुए चार दिन के नौनिहाल की मौत ने गिरिडीह पुलिस के मुंह में ताले जड़ दिया है. हद तो तब हो जाता है मामले में जिले के एसपी समेत अन्य वरीय अधिकारी यह कहकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ लेते है की प्रारंभिक रूप में नौनिहाल की मौत किसी पुलिस के बूट के नीचे दबने से नही हुआ है, कहकर मामले को शांत करने का प्रयास करते हैं. लेकिन मामला जब राजजधानी पहुंचता है तो हेमंत सरकार के कोप से बचने और मामले को ठंडा करने के लिए घटना के दूसरे दिन एसपी अमित रेनू देवरी थाना प्रभारी संगम पाठक को लाइन हाजिर करते है तो एक पुलिस अधिकारी समेत चार को एक ही आरोप में सस्पेंडेड कर दुबारा मामले को दबाने का प्रयास करते है। वैसे आरोप क्या क्या लगा है ये फिलहाल कोई वरीय अधिकारी बताना नही चाहते। तो दूसरी तरफ हैरान करने वाली बात तो यह भी है अभी तक किसी राजनीति दल इतने संवेदनशील मामले को चालू विधानसभा सत्र में उठाना तक जरूरी नहीं समझा.

वैसे हैरान करने वाली बात तो घटना के दूसरे दिन एक बार फिर सामने आया जब मामले को दबाने के लिए ही देवरी के लाइन हाजिर थानेदार समेत पुलिस जवानों को लेकर इलाके के सर्किल इंस्पेक्टर सहदेव प्रसाद गुरुवार की सुबह पीड़ित परिवार के घर जाते है। लेकिन लाइन हाजिर थानेदार संगम पाठक को देखते ही परिजनों समेत ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ता है। इस दौरान परिजनों को समझाने गए लाइन हाजिर थानेदार संगम पाठक समेत सर्किल इंस्पेक्टर सहदेव प्रसाद को भी ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ता है तो सभी वहा से निकलने में ही भलाई समझते है.

इधर घटना की रात ही चार दिन के नौनिहाल के शव का मेडिकल बोर्ड का गठन कर वीडीओ कराकर पोस्टमार्टम किया जाता है। पोस्टमार्टम में अब तक क्या निकला ये भी स्वास्थ विभाग के अधिकारी खुल कर कुछ नही बता रहे है। लेकिन स्वास्थ विभाग के सूत्र बता रहे है की देवरी के कोशोगोदोदिघी गांव निवासी भूषण पांडेय के पोते और रमेश पांडे और उनकी पत्नी नेहा देवी के चार दिन के नवजात की मौत का कारण भारी दबाव पड़ने के कारण ही सामने आ रहा है। लेकिन इसका आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नही हो पाया है। हालाकि मामला गंभीर देख कर मेडिकल बोर्ड में शामिल तीनो सदस्यों ने अब सिविल सर्जन को पत्रचार कर रांची से एक्सपर्ट के जरिए दुबारा रिपोर्ट दिखाने का सुझाव दिया है। संभवत एक्सपर्ट गुरुवार को गिरिडीह में रिपोर्ट देख सकती है और तीनो डॉक्टरों से इस गंभीर मामले में चर्चा कर सकती है। बहरहाल, इतने गंभीर मामले में भी जिम्मेवार जनप्रतिनिधियों द्वारा गिरिडीह के देवरी पुलिस के खिलाफ सदन में नही उठाया जाना, और जिले के वरीय अधिकारी के खामोशी पर सवाल उठ रहे है।

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