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इस औरत ने जो किया या कर सकती है, वह कोई मर्द भी नहीं कर सका : प्रो. रीता वर्मा

धनबाद की दुर्दशा के लिये जन प्रतिनिधि ही जिम्मेवार हैं.

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Dhanbad : धनबाद लोकसभा क्षेत्र से तीन बार लगातार सांसद और एक बार केंद्रीय मंत्री रहीं अशोक चक्र शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा की पत्नी प्रो. रीता वर्मा एक बार फिर धनबाद की राजनीति की रपटीली राहों पर चल पड़ी हैं तो इसके स्पष्ट मायने हैं. कॉलेज से अवकाश ग्रहण करने के बाद मैडम सार्वजनिक जीवन में ज्यादा सक्रियता से भाग लेने को उत्सुक हैं.

पेश है न्यूज विंग से उनकी बातचीत के मुख्य अंश

कुछ दिनों से उनकी सक्रियता बढ़ी है. दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन आदि छोटे-मोटे कार्यक्रम के बाद पूर्व सांसद प्रो. रीता वर्मा ने बुधवार को झरिया थाना मोड़ पर सरदार बल्लभ भाई पटेल समिति की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया. इस मौके पर वर्षों बाद पहली बार उन्होंने राजनीतिक भाषण दिया. धनबाद की दुर्दशा क्यों है, इस प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि  जन प्रतिनिधि इसके लिए जिम्मेवार हैं. हालांकि न्यूज विंग से बातचीत में उन्होंने किसी पर आक्षेप लगाने से बचने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि किसी पर आक्षेप लगाने का कोई अर्थ भी नहीं है.

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उन्होंने पूछा- धनबाद में उनसे ज्यादा काम किसने किया? संसद में सवाल तक नहीं पूछ पाए. उनके काम के बाद धनबाद में क्या उल्लेखनीय प्रगति हुई? उन्होंने एमपीएल बनवाया. इसके बाद धनबाद में इतना बड़ा कोई उद्योग नहीं लगा. एक निरसा और एक बोकारो में दो नवोदय विद्यालय, पांच केंद्रीय विद्यालय खुलवाये. धनबाद को एक मेगावाट बिजली दिलाई. ऐसे बहुत से काम हैं, जिनको याद करना होगा. याद है उस समय ट्रेड यूनियन के लोग कहते थे कि यह औरत क्या करेगी. इस औरत ने जो किया और कर सकती है वह कोई मर्द नहीं कर सका.

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कोई रंगदारी, ट्रेड यूनियन नहीं

सच कहें तो उद्योगों के खिलाफ आंदोलन और विध्वंस को बढ़ावा देकर पूर्व सांसद एके राय ने लोगों की आदत बिगाड़ दी. लोगों ने उद्योग – धंधे खड़ा होने से पहले ही उससे नाजायज लाभ के लिए अराजक माहौल बनाने की परंपरा को अपना लिया. सबको पैसा चाहिए. प्रो. वर्मा ने कहा कि साल 2004 में मैं जब चुनाव हारी तो वापस कॉलेज में पढ़ाने चली गयी. कोई ट्रेड यूनियन या कोयला का धंधा नहीं किया. सिर्फ विकास किया.

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बताइए, क्या विकास है?

अब सबको कोयले के धंधे में हिस्सेदारी चाहिए. ट्रेड यूनियन के नाम पर रंगदारी वसूली का धंधा चल रहा है. सड़कें, नालियां बनती हैं, छह महीने में टूट जाती हैं. क्या इसी को विकास कहेंगे? मैंने देखा धनबाद में उनके पहले सिर्फ विध्वंस का ही काम राजनीति के नाम पर हुआ. मैंने कहा  बहुत विध्वंस हुआ. अब कुछ रचनात्मक काम होना चाहिए.

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मैं हूं धनबाद लोकसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदार

प्रो. वर्मा ने कहा कि पार्टी ने अगर टिकट दिया तो वह लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहेंगी. वह टिकट की दावेदार हैं. उनकी उम्र भी धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़कर जीतनेवालों से कम है. वह धनबाद के सांसद के रूप में अंतिम पारी खेलना चाहेंगी.

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