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जानिए पाकुड़ के नक्सली कुणाल मुर्मू एनकाउंटर का पूरा सच, जिसपर अब डीसी उठा रहे हैं सवाल

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi/Pakur: 12 अक्टूबर 2017 यानि एनकाउंटर वाला दिन. उससे कुछ दिनों पहले कुछ माओवादी पाकुड़ में एक निर्माणाधीन स्कूल पर पहुंचे. वहां काम करने वाले मिस्त्री और लेबर को उन्होंने धमकाया. कहा मालिक से कहना ज्यादा होशियार ना बने. अगर काम करना है तो हमारी बात मान ले. माओवादियों ने वहां एक पर्चा भी छोड़ा. जिसपर साफ तौर से लिखा था कि चार दिनों के अंदर संगठन को 80 लाख रुपए चाहिए. पैसा नहीं देने पर या किसी तरह की होशियारी करने पर बेमौत मारे जाओगे.
यह भी लिखा कि पैसा नहीं मिलने तक स्कूल बनाने का काम रोक दो.

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इस कांड के बाद नक्सलियों ने स्कूल बना रहे एक ठेकेदार से कॉन्टैक्ट किया. दोनों के बीच फोन पर बात शुरू हो गयी. इसी बीच ठेकेदार ने पाकुड़ एसपी से मिलकर सारी बात बतायी और एफआईआर दर्ज करायी. पुलिस ने ठेकेदार के फोन को रिकॉर्ड करने लगी. अब जो भी बात ठेकेदार और नक्सलियों के बीच होती थी, वो पुलिस सुन रही थी.

ठेकेदार ने बनाया बीमार होने का बहाना तो कहा बम से उड़ा देंगे स्कूल को

नक्सली लगातार फोन कर ठेकेदार को पाकुड़ आने और पैसा देने की दबाव बनाने लगे. ठेकेदार ने फोन पर नक्सलियों से कहा कि वो 80 लाख रुपए नहीं दे सकते हैं. अपना सारा घर-बार बेच देंगे तो भी इतने पैसे का इंतजाम नहीं हो पाएगा. नक्सली नहीं मान रहे थे. उनका कहना था कि वो एक बार में ही सारा पैसा लेंगे. ठेकेदार ने मोल-मोलायी शुरू कर दी. 50,000 से बात शुरू हुई. इतना कम पैसा सुनते ही नक्सलियों ने धमकी देना शुरू कर दी. बात एक लाख से होते हुए पांच लाख पर रुकी.

ठेकेदार बार-बार फोन पर नक्सलियों को कहते थे कि वो एक बार बैठकर बातचीत करना चाहते हैं. लेवी तय करने के बाद ही ठेकेदार पैसा देने की बात करने लगे. लेकिन नक्सली नहीं माने. ठेकेदार अपनी तबियत खराब होने की बात करने लगा. कहा कि वो दो दिन के बाद ही आ सकते हैं. इसपर नक्सली भड़क गए. उन्होंने कहा कि ज्यादा होशियारी करोगे तो, साइट को बम से उड़ा देंगे. धमकी देते हुए साफ कहा कि कल ही पाकुड़ पहुंचो.

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कहानी में आया ट्विस्ट, पुलिस ठेकेदार का पार्टनर बन गयी

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ठेकेदार पाकुड़ पहुंच गया. नक्सली का फोन आया. वो रात में ही ठेकेदार को उनके ठिकाने पर आने को कहने लगे. लेकिन ठेकेदार तैयार नहीं हुआ. ठेकेदार ने किसी तरह अपनी जान की दुहाई देते हुए प्लान को कल के लिए टाला. 12 अक्टूबर का दिन आ गया. जिस दिन एनकाउंटर हुआ. नक्सलियों ने उन लोगों को पाकुड़ के आमड़ापाड़ा आने को कहा. नक्सली बार-बार पूछ रहे थे कि कितना लेवी लेकर आए हो. इसी बीच बड़ी चालाकी से ठेकेदार ने फोन पुलिस के एक कर्मी को पार्टनर बनाते हुए फोन दे दिया. अब शुरू हुआ पुलिस का खेल.

बड़ी ही चालाकी से पुलिस के कर्मी ने नक्सलियों से बात की. 10 लाख रुपए पहुंचाने के लिए वो तैयार हो गया. कई दफा इस बीच नक्सलियों का फोन आया. वो ठेकेदार को अकेले आने को कहते थे. ठेकेदार ड्राइवर समेत तीन आदमी आने की बात करता था.

नक्सलियों ने कहा पैसा गाड़ी से नीचे पुल के पास रख दो, हुआ एनकाउंटर

अपने बताए हुए पते पर नक्सली ठेकेदार को पहुंचने की बात कहने लगे. ठेकेदार के वेश में पुलिस कर्मी बताए हुए जगह पर पहुंचे. करार हुआ कि पुल के पास वो पैसा रख कर वहां से चले जाएंगे. नक्सलियों ने कहा कि मेरे आदमी हर वक्त तुमलोगों को देख रहे हैं. गाड़ी पुल के पास पहुंची गाड़ी में बैठा शख्स पैसे को नीचे रख दिया और वहां से गाड़ी आगे बढ़ गयी. गाड़ी के वहां से जाते ही पांच नक्सली हथियार के साथ वहां पहुंचे. एक ने जैसे ही पैसा उठाया. पुलिस की टीम वहां पहुंच गयी. पुलिस ने जैसे ही नक्सलियों को सरेंडर करने को कहा, नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में पैसा उठाने वाले कुणाल मुर्मू को पुलिस की गोली लगी. लेकिन अंधेरे का फायदा उठाते हुए बाकी चार नक्सली वहां से फरार हो गए. पुलिस ने वहां से एक पाइन गन, एक देसी कट्टा और कुछ कारतूस बरामद किए. कुछ दिनों के बाद इस पूरे कांड के मास्टर माइंड सुनील मुर्मू को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

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एसडीएम कर चुके हैं एनकाउंट सही होने की पुष्टि, डीसी ने की सीबीआई जांच की मांग

एनकाउंटर के बाद डीसी पाकुड़ दिलीप कुमार झा ने पूरे मामले की जांच करने का निर्देश एसडीएम को दिया. एसडीएम ने तमाम पहलूओं पर जांच करते हुए मुठभेड़ को सही करार दिया. डीसी को सौंपे अपनी रिपोर्ट में एसडीएम ने फॉरेंसिक साक्ष्य के साथ ग्रामीणों के बयान तक दर्ज कराए. बावजूद इसके डीसी पाकुड़ ने मामले की सीबीआई जांच करने के लिए गृह विभाग को लिखा. गृह विभाग ने मामले पर अब पुलिस विभाग ने उनका पक्ष मांगा है.

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