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भाजपा के कार्यकाल में सभी जरूरतमंदों का राशन कार्ड बनना मुश्किल: धीरज

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Ranchi:  राइट टू फूड कैंपेन के एक्टिविस्ट धीरज कुमार का मानना है राज्य राशन कार्ड रद्द किये जाने के बाद सरकार जरूरतमंदों के लिए राशन कार्ड बनाने में ध्यान नहीं दे रही है. राज्य में सूखे की संभावना के बाद भूख से मौत का सिलसिला सितम्बर माह से शुरू हो जाता है. गुमला जिला के बासिया प्रखंड स्थित लुंगटू गांव में 26 अक्टूबर को एक महिला की भूख से मौत का मामला सामने आया. उस महिला को दो महीने से पीडीएस की दुकान से अनाज नहीं मिला था. आसपास के लोग कुछ दिनों से महिला को खाना खिला रहे थे.

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बसिया प्रखंड के पदाधिकारियों को शुक्रवार को यह सूचना मिली थी कि लुंगटू गांव में एक वृद्ध महिला की मौत हो गई है. जिसके बाद प्रखंड के बीडीओ, सीओ और एमओ गांव पहुंचे थे. जहां अधिकारियों ने गांव वालों से एक कागज पर यह लिखवा कर लिया कि महिला की मौत भूख से नहीं हुई है. राज्य में यह पहला मामला नही है.

राज्य में 3 साल पहले अक्टूबर 2015 में खाद्य सुरक्षा कानून का क्रियान्वयन शुरू हुआ था, तब कुल 51,70,159 परिवार एवं 2,33,40,832 आबादी खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत पीडीएस के दायरे में थी. 3 साल बाद आहार वेबसाइट के अनुसार कुल 57,14,193 परिवार एवं 2,63,07,832 आबादी खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत पीडीएस के दायरे में है.

खाद्य सुरक्षा कानून के अनुसार, झारखंड में 2011 की जनगणना के अनुसार सिर्फ 80.16 प्रतिशत आबादी ( यानि कि 2,64,43,330 व्यक्ति) को ही पीडीएस के दायरे में रखना है. और यह आंकड़ा अगले जनगणना यानि कि 2021 तक फिक्स है. इसका मतलब है कि 2021 तक 1,35,498 लोगों के लिए जगह खाली है. यानि कि औसतन 5 सदस्यों के परिवार की संख्या मानी जाए तो लगभग 27,000 परिवारों के लिए जगह खाली है. झारखंड में कुल 24 जिला, 260 ब्लॉक और 4559 पंचायत हैं. यानि कि औसतन हर पंचायत में 6 परिवार के लिए जगह खाली है. (अगर शहरी क्षेत्र के वार्ड को शामिल कर दिया जाए तो यह संख्या और कम हो जाएगी).

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लेकिन इस सीमित मामूली खाली जगह में भी जरुरतमंदों का राशन कार्ड बन जाए यह जरुरी नहीं, क्योंकि हर दूसरे या तीसरे परिवार में 1 या 2 सदस्यों का नाम राशन कार्ड में नहीं है. यानि कि जितने परिवार अभी पीडीएस के दायरे में हैं उनका कम से कम एक चौथाई सदस्य पीडीएस के दायरे से बाहर है. और जितने लोगों का राशन कार्ड बना है, उनके परिवार के छूटे हुए सदस्यों को जोड़ा जाए तो कम से कम 15 लाख लोग उनमें से ही पीडीएस के दायरे से बाहर हैं. जबकि जगह सिर्फ लगभग 1 लाख 35 हजार लोगों के लिए ही खाली है. यानि कि अगली जनगणना (2021) तक फिर से जब तक पीडीएस के कवरेज को रीवाइज  किया जाए, तब तक सभी राशन कार्डधारियों के राशन कार्ड में छूटे हुए सदस्यों का नाम जुड़वाना या वर्तमान मानकों के अनुसार, योग्य परिवारों  को नया राशन कार्ड बनवाना असंभव लगता है.

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