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CM के पास IFS अफसरों के लिए समय नहीं, झारखंड में एक्सपोजर नहीं-हो रहे डिमोरलाइज

34 आइएफएस अफसरों की प्रोन्नति बाधित, एसोसिएशन बोलाः झारखंड में मौखिक होता है हर काम, डंप की जाती है फाइल

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Ravi Aditya

Ranchi: आइएफएस अफसरों की बात सुनने के लिए सीएम के पास समय नहीं है. अफसरों ने सीएम से दुर्गा पूजा से पहले कैडर मैनेजमेंट को लेकर मिलने के लिए समय मांगा, लेकिन नहीं मिला. इसके बाद राज्य सरकार की व्यवस्था से त्रस्त होकर राष्ट्रपति से भी गुहार लगाई. अब झारखंड आइएफएस एसोसिएशन का दर्द छलक रहा है. एसोसिएशन के अध्यक्ष एमपी सिंह के अनुसार, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने के लिए जो सिस्टम होना चाहिए, वह झारखंड में नहीं है. यहां हर काम मौखिक ही चलता है. फिर से दिवाली बाद सीएम से समय मांगा जायेगा.

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आइएफएस अफसरों का छलका दर्द

एसोसिएशन ने कहा कि अब अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने के लिए आवेदन ही नहीं कर रहे हैं. वे जानते हैं कि आवेदन देने से सचिवालय में फाइल डंप हो जायेगी. अफसर डिमोरलाइज महसूस कर रहे हैं. एसोसिएशन का यह भी कहना है कि झारखंड कैडर में अफसरों की कमी नहीं है, लेकिन उनका उपयोग सही तरीके से नहीं हो रहा है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने से नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर सीखने को मिलता है. वापस कैडर में आने पर उसका उपयोग झारखंड के लिए किया जा सकता है. यह समझ से परे हैं कि राज्य सरकार अफसरों को क्यों रोक रही है?

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30 वरीय आइएफएस की प्रोन्नति बाधित

झारखंड आइएफएस एसोसिएशन ने कहा है कि 1988 बैच वाले अफसरों को अब तक प्रधान मुख्य वन संरक्षक बन जाना चाहिए था. लेकिन अब तक नहीं हुआ. 1987 बैच के अफसर सर्वेश सिंघल की प्रोन्नति की डीपीसी हो गई, लेकिन नोटिफाई नहीं किया गया. 1991 से 1993 बैच तक के वरीय अफसरों की प्रोन्नति बाधित हो गई है. जिन्हें अब तक प्रोन्नति मिल जानी चाहिए थी. 4 अफसरों को प्रधान मुख्य वन संरक्षक, 15 अफसरों को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, 15 अफसरों को मुख्य वन संरक्षक पद पर प्रोन्नति मिल जानी चाहिए थी. जबकि इस बैच के आइएएस अफसर प्रधान सचिव के रैंक तक पहुंच गये हैं.

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवेदन एक साल से सीएमओ में अटका

झारखंड आइएफएस एसोसिएशन ने कहा है कि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने वाले अफसरों का आवेदन सचिवालय में चक्कर काट रहा है. एक साल से आवेदन को फॉरवर्ड नहीं किया गया. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने के लिए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एमपी सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक आशिष रावत, मुख्य वन संरक्षक आरके वाजपेयी और डीएफओ पीआरके नायडू ने आवेदन दिया है.

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राज्य सरकार को भी आईएफएस अफसरों पर भरोसा नहीं

इधर राज्य सरकार को भी आईएफएस अफसरों पर भरोसा नहीं है. झारखंड में आईएफएस के राज्य प्रतिनियुक्ति के 25 फीसदी पद हैं. इस हिसाब से 21 अफसरों का राज्य प्रतिनियुक्ति में रहना जरूरी है. वहीं आईएफएस के पदस्थापना के लिए पदों को भी चिन्हित नहीं किया गया है. सरकार के पास इसका कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं है. पीसीसीएफ रैंक के अफसरों को भी विशेष सचिव रैंक का पद मिलता है.

सिर्फ छह अफसर हैं राज्य प्रतिनियुक्ति में

राज्य प्रतिनियुक्ति में सिर्फ छह आइएफएस ही कार्यरत हैं. इसमें पीसीसीएफ रैंक के अफसर एके रस्तोगी वन विभाग में विशेष सचिव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक रैंक के अफसर सर्वेश सिंघल आईटी में विशेष सचिव, सीसीएफ रैंक के अफसर डीके सक्सेना महिला बाल विकास विभाग में विशेष सचिव, सीसीएफ रैंक के अफसर परितोष उपाध्याय ग्रामीण विकास में विशेष सचिव, सीसीएफ रैंक के अफसर रवि रंजन स्कील डेवलपमेंट में सीईओ और सीएफ रैंक के अफसर सिर्द्धाथ त्रिपाठी मनरेगा आयुक्त के पद पर राज्य प्रतिनियुक्ति में हैं.

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