
Ranchi: हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल विस्तार पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शपथ लिए चार दिन बीत गए. लेकिन अभी तक मंत्रिमंडल की तस्वीर साफ नहीं हुई है. मंत्रिमंडल के गठन में देर की वजह से सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है. देर की वजह कांग्रेस है. कांग्रेस कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों का नाम तय नहीं हो रहा है. कांग्रेस कोटे से चार मंत्री बनाए जाएंगे. चार नामों के चयन में कांग्रेस आलाकमान को परेशानी हो रही है क्योंकि दावेदार अधिक हैं. कांग्रेस के अधिकतर विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं. दिल्ली में अपने-अपने संपर्क के माध्यम से कांग्रेस हाईकमान तक पैरवी कर रहे हैं. इधर, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी दिल्ली में ही हैं. दिल्ली जाने से पहले उन्होंने रांची में हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी. सूचना है कि सीएम भी जल्द मंत्रिमंडल का गठन कर कामकाज में तेजी लाना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस की वजह से देर हो रही है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से जल्द नाम देने को कहा है. मंत्रिमंडल गठन में हो रही देरी के कारण संदेश भी अच्छा नहीं जा रहा है.
दिल्ली में केशव महतो कमलेश की मुलाकात सोमवार को कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर से होगी. कमलेश प्रभारी के साथ महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित अन्य बड़े नेताओं से मिल सकते हैं. सोमवार की रात तक या फिर मंगलवार तक कांग्रेस अपने मंत्रियों के नाम पर मुहर लगा सकती है. कांग्रेस कोटे से डा.रामेश्वर उरांव व दीपिका सिंह को फिर से मंत्री बनाया जा सकता है. दो अन्य नामों में प्रदीप यादव, अनूप सिंह, इरफान इंसारी व निशत आलम की चर्चा है. निशत आलम व इरफान अंसारी के बीच मामला फंस गया है. जेल में बंद आलमगीर आलम अपनी पत्नी के लिए पैरवी कर रहे हैं. आलमगीर की पकड़ हाईकमान तक मजबूत है.
झामुमो कोटे से शामिल होने वाले मंत्रियों का नाम हेमंत सोरेन को तय करना है, इसलिए बहुत परेशानी नहीं है. हेमंत सोरेन ने तय कर लिया है कि वह किसको मंत्री बनाएंगे. सिर्फ नाम का खुलासा होना बाकी है. राजद कोटे से सुरेश पासवान का नाम आगे है. हालांकि हुसैनाबाद व गोड्डा विधायक भी लालू व तेजस्वी के दरबार में पैरवी कर रहे हैं. लेकिन सुरेश पासवान की संभावना अधिक है. माले ने साफ कर दिया है कि वह सरकार में शामिल नहीं होगी. सरकार को पूर्व की तरह बाहर से ही समर्थन देगी.
इधर, 9 दिसंबर से विधानसभा का सत्र शुरू होगा. मुख्यमंत्री इससे पहले मंत्रिमंडल का गठन करेंगे. सदन में वह मंत्रियों के साथ जाना चाहते हैं. सदन संचालन के लिए संसदीयकार्य मंत्री का होना जरूरी है. जब मंत्रिमंडल का गठन होगा तभी किसी को संसदीयकार्य मंत्री का दायित्व दिया जाएगा. संभावना है कि एक-दो दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी. मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर कांग्रेस, झामुमो व राजद के विधायक जमकर लॉबिंग कर रहे हैं. दिल्ली, पटना से लेकर रांची तक हलचल है.




