
♦अब दूषित पानी से राहत के लिए खर्च होंगे 572.24 करोड़
♦गढ़वा और दूसरे जिलों को आर्सेनिक युक्त पानी से मुक्ति दिलाने की बनेगी योजना
Ranchi : एनआरडीडब्ल्यू (National Rural Drinking Water) के मुताबिक झारखंड में पेयजल के 5,17,044 स्रोत हैं. इनमें घरेलू वाटर कनेक्शन के अलावा कुआं, चापाकल, बोरवेल आदि भी शामिल हैं. इन स्रोतों में से 2,90,927 की क्वालिटी की जांच की जा चुकी है. एनआरडीडब्ल्यू प्रोग्राम के अनुसार अब भी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के 44 फीसदी वाटर सोर्स ऐसे हैं जिनकी क्वालिटी टेस्टिंग नहीं की जा सकी है. राज्य सरकार (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) ने इस दिशा में पहल की है. पानी में आर्सेनिक और दूसरी समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीण इलाके के पानी स्रोत की क्वालिटी की जांच और इस आधार पर नयी कार्य योजना बनायी जायेगी. गढ़वा, साहेबगंज और पलामू को इसके लिए ट़ॉप पर रखा गया है.
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एक भी जिले में नहीं है मोबाइल लैब
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार झारखंड के 24 जिलों में एक-एक लैब हैं. इसके अलावा लातेहार में ब्लॉक लेवल पर भी एक लैब है. साथ ही साहेबगंज, रामगढ़, पलामू और गढ़वा में अनुमंडल स्तर पर भी एक-एक लैब की सुविधा है. पर किसी भी जिले में एक भी मोबाइल लैब नहीं है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के स्रोत और उसकी क्वालिटी की परख करते हुए प्लानिंग करने में दिक्कतें आ रही हैं.
जल शक्ति मंत्रालय से मदद
केंद्र सरकार की ओर से जल जीवन मिशन के लिए 572.24 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं. इसे वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही व्यय करना है. इसमें विशेष रूप से राज्य के तीन जिलों में पानी की क्वालिटी की जांच और इस आधार पर निदान के लिए कार्ययोजना बना कर काम किया जाना है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इसके लिए प्रमुख रूप से गढ़वा, पलामू और साहेबगंज को चुना है. गढ़वा के पानी में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा है. इसके चलते सैकड़ों लोगों को जान भी गंवानी पड़ी है. यह सिलसिला अब भी जारी है. इसे देखते हुए विभाग ने इस जिले में विशेष जोर दिया है.
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वाटर क्वालिटी मैपिंग का भी प्लान
बुसीबंद इंटरनेशनल संस्था अगस्त के आखिरी तक गढ़वा जिले में मोबाइल लैब सेवा के जरिये वाटर क्वालिटी टेस्टिंग करेगी. संस्था के प्रतिनिधि गौतम बंदोपाध्याय के अनुसार एनआरडीडब्ल्यू प्रोग्राम में साल में एक बार मानसून से पहले और एक बार मानसून के बाद पानी की क्वालिटी टेस्टिंग होनी चाहिए. फिलहाल राज्य में ऐसा हो नहीं पा रहा है. संस्था इसमें मदद करेगी. दो मोबाइल लैब पर मैनपावर और अन्य जरूरतों को मिला कर तकरीबन 60 लाख रुपये खर्च होंगे. यह खर्च संस्था अपने सीएसआर फंड के जरिये वहन करेगी. गढ़वा के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जा जाकर वाटर कलेक्शन किया जाना है. इसके बाद 24 घंटे के अंदर इंटरनेशनल क्वालिटी की रिपोर्ट बना कर पेयजल विभाग को दिया जाना है. रिपोर्ट को संस्था के सर्वर पर भी डाला जायेगा. वाटर क्वालिटी मैपिंग के आधार पर दूषित पानी के लिए समुचित कार्य योजना बनाने में सरकार को मदद मिलेगी. प्रयोग सफल रहा तो राज्य सरकार से मिलनेवाले वित्तीय और दूसरे सपोर्ट से सभी जिलों में वाटर टेस्टिंग और वाटर क्वालिटी मैपिंग पर काम किया जायेगा.
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