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Corona Effect: 50 फीसदी गिरा रियल एस्टेट कारोबार, बिल्डिंग मटेरियल के दाम बढ़े

  • मजदूरों के सामने रोजगार का संकट
Sanjeevani

Ranchi: लॉकडाउन के बाद रियल एस्टेट पर उसका काफी असर देखा जा रहा है. इस सेक्टर में आयी गिरावट बताती है कि लोगों के पास पूंजी की कमी है. अनियोजित लॉकडाउन के बाद इस क्षेत्र में करीब 50 प्रतिशत कारोबार गिरा है.

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अपार्टमेंट्स, फ्लैट्स, बिल्डिंग्स बन कर तैयार हैं, लेकिन इसके खरीदार नहीं मिल रहे. वहीं लॉकडाउन के बाद बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों में हुई वृद्धि ने भी रियल एस्टेट सेक्टर को परेशान किया है. पहले से जिन अपार्टमेंट्स की बुकिंग हो चुकी थी, वो ग्राहक भी एडवांस के बाद भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं.

कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) के राष्ट्रीय सचिव चंद्रकांत रायपत ने बताया कि झारखंड में रियल एस्टेट ग्राहकों में बहुत कमी आयी है. रियल एस्टेट सेक्टर में पूंजी निवेश अधिक है. ऐसे में अभी अगर खरीदार नहीं मिलेंगे, तो भविष्य में निर्माण कार्य बाधित होगा.

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दाम वही, पर ग्राहक नहीं

लॉकडाउन के बाद से राज्य में अपार्टमेंट्स, फ्लैट्स, बिल्डिंगों के दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई. हालांकि स्थिति सामान्य होती तो शायद दाम बढ़ सकते थे. क्रेडाई के सह सचिव रोहित अग्रवाल ने बताया कि अपार्टमेंट्स, फ्लैट्स, बिल्डिंगों के जो दाम थे, वही अब भी है. लेकिन ग्राहक नहीं मिल रहे.

स्थिति यहीं रही तो, आने वाले समय में भी दामों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है. स्थिति से उभरने में छह महीने लग सकते हैं. लेकिन बाजार के जो हालात हैं, वे बताते हैं कि इससे अधिक वक्त भी लग सकता है. इन्होंने बताया कि दिवाली, धनतेरस जैसे त्योहार के लिए लोग अभी से ही एडवांस पेमेंट करते हैं, इस बार ये भी नहीं है.

बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों में हुई वृद्धि

सीमेंट और छड़ जैसे बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों में वृद्धि हुई है जिसका असर रियल एस्टेट सेक्टर में देखा जा रहा है. हालांकि विक्रेताओं का कहना है कि सप्लाइ नहीं होने के कारण दाम में वृद्धि हुई. इसका असर रियल एस्टेट में है.

लॉकडाउन के पहले सीमेंट 270 से 320 रुपये प्रति बैग रहा जो अब 310 से 370 रुपये प्रति बैग मिल रहा है. स्टील लॉकडाउन के पहले तक 40,000 रुपये प्रति टन बिका जो अब 50,000 रुपये प्रति टन है. बालू लॉकडाउन के पहले 3200 रुपये टरबो बिका, वहीं लॉकडाउन के बाद 6500 रुपये टरबो बिक रहा है.

हाइवा से पहले जहां 10,000 रुपये प्रति हाइवा बालू मिलता था, वहीं अब 15 से 16,000 रुपये प्रति हाइवा बालू है. हालांकि बरसात के कारण भी बालू की दामों की वृद्धि हुई है.

कौशल सीमेंट के संचालक ने जानकारी दी कि आमूमन बरसात के समय दामों में कमी आती है. लॉकडाउन के बाद सीमेंट, छड़ जैसी चीजों के दाम में वृद्धि हुई. इसका मुख्य कारण सप्लाइ कम होना है.

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खुद के मजदूरों को काम नहीं दे पा रहे

रोहित अग्रवाल ने जानकारी दी कि रियल एस्टेट की स्थिति खराब है. पहले तो राज्य में प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने की बात थी. लेकिन स्थिति ये है कि अपने ही मजदूरों को रोजगार नहीं दे पा रहे. एक तो ग्राहकों की कमी, ऊपर से कच्चे माल के दामों में लगातार वृद्धि.

पहले से जो प्रोजेक्ट्स तैयार हैं, उनकी बिक्री भी बहुत मुश्किल हो गयी है. तय ग्राहक भी हाथ पीछे खींच रहे है. जबकि रियल एस्टेट के अधिकांश काम ठेकेदारों के जरिये कराया जाता है. ऐसे में ठेकेदारों को भुगतान करना मुश्किल हो गया है. तो मजदूरों को काम कहां से मिलें. कई जगहों से मजदूरों को काम से निकालने की बात भी सामने आयी है.

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