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राज्य सरकार ने सरना आदिवासी धर्मकोड का मामला केंद्र के पाले में डाला

Ranchi: झारखंड सरकार ने विधानसभा से सरना आदिवासी धर्मकोड का मामला अब केंद्र सरकार के पाले में डाल दिया है. झारखंड विधानसभा ने सरना आदिवासी धर्मकोड पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेज दिया है.

बता दें कि जनगणना में सरना धर्मकोड का प्रावधान करने के लिए राज्य सरकार ने संकल्प संख्या 4242 दिनांक 3112020 के माध्यम से प्रस्ताव भेजा है. इससे पहले सरकार आदिवासी/सरना धर्मकोड के नाम से प्रस्ताव भेजने वाली थी.

विधानसभा में इसके लिए विशेष सत्र बुलाया गया था. सत्र में चर्चा के दौरान भाजपा के विधायकों ने आदिवासी और सरना के बीच से ऑब्लिग हटा देने की मांग की थी जिसे सरकार ने सकारात्मक रूप से लिया और सरना आदिवासी नाम से प्रस्ताव भेजने पर सहमति जता दी.

बता दें कि झारखंड में लंबे समय से सरना धर्मकोड की मांग की जा रही थी. विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न पार्टियों ने सरना धर्मकोड लागू कराने की बात अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल की थी.

सीपी सिंह ने सीएम से पूछा जिन्होंने सरना आदिवासी धर्मकोड को हटाया उनके साथ गलबहियां कितना उचित है.
चर्चा के दौरान कई बार ये बातें कही गयी कि 1951 तक जनगणना के कॉलम में आदिवासियों के लिए धर्मकोड का कॉलम था जिसे 1961 में हटा दिया गया था.

इसपर भाजपाइयों ने बार-बार पूछा कि 1961 में किसकी सरकार थी. इसी पर सीपी सिंह ने सीएम से यह पूछा कि आखिर जिन्होंने आदिवासियों सरना के लिए धर्मकोड को हटाया उनके साथ गलबहियां कितना उचित है.

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कांग्रेस पार्टी के सदस्यों को सरना धर्मकोड पर बोलने का कोई अधिकार नहीं

चर्चा के दौरान यह बातें आ गयी थीं कि जब 1961 की जनगणना से आदिवासियों के कॉलम को हटाया गया तब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे और कांग्रेस की सरकार थी. इसके अलावा नीलकंठ सिंह मुंडा ने सदन में कहा कि 2005 में हमारी सरकार ने जाति प्रमाण पत्रों में सरना जोड़ने का प्रस्ताव किया था जिसे 2006 में यूपीए की सरकार ने हटा दिया था. फिर 2014 में हमारी सरकार आने के बाद इसे लागू किया गया. इसलिए कांग्रेस के लोगों को सरना धर्मकोड पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है.

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जहां राजनीतिक दल के लोग बैठते हैं वहां राजनीति न हो ये कैसे संभव हैः मुख्यमंत्री

बुधवार को चर्चा के दौरान नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि मुझे शक लग रहा है, ये षडयंत्र लग रहा है. सब ठीक है पर सरकार आदिवासी और सरना के बीच में आब्लिग (/) लगाकर सरकार राजनीति कर रही है. इसके अलावा भाजपा के कई सदस्यों ने राजनीति करने वाली बात को दोहराया था.

जिसपर सीएम ने जवाब देते हुए कहा कि सदन में जहां प्रस्ताव रखा गया है, सभी सदस्य इसकी गंभीरता को समझते हैं वहां राजनीति नहीं होनी चाहिये, पर इतने सारे राजनीतिक दल बैठते हों, वहां राजनीति न हो ये कैसे संभव है.

साथ ही उन्होंने कहा कि हम लाठी के बल पर सरकार नहीं चलाना चाहते और प्रस्ताव में संशोधन कर रहे हैं और सरना आदिवासी धर्मकोड की मांग को लेकर केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा जिसके बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया.

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