
- हाइकोर्ट की टिप्पणी के बाद एसपी, एसडीपीओ हुए खामोश
- धनवार के साथ परसन पुलिस की दिखी लापरवाही
- पूर्व एसपी ने भी नहीं लिया था मामले को गंभीरता से
- परसन पुलिस अब भी ऑनर किलिंग साबित करने के प्रयास में
- हाइकोर्ट की टिप्पणी के बाद पीड़िता के परिजनों की बढ़ी उम्मीदें
Manoj Kumar Pintu
Giridih: यूपी के हाथरस की घटना को लेकर आक्रोश देश में ठंडा भी नहीं हुआ था कि न्यायालय द्वारा संज्ञान लिये जाने के बाद गिरिडीह के ईटासानी गांव की घटना सुर्खियों में आ गयी.
धनवार थाना क्षेत्र के परसन ओपी अंतर्गत इस गांव की घटना पर हाइकोर्ट के कड़ी टिप्पणी के बाद शुक्रवार को न्यूजविंग पहली बार गांव में पहुंचा और और सच्चाई जानने का प्रयास किया.
जो मामला निकल कर सामने आया, उसके अनुसार धनवार के ईटासानी की और हाथरस की घटना में कोई खास फर्क नहीं है. अतंर सिर्फ इतना है कि हाथरस की घटना में पीड़िता के शव को प्रशासन और पुलिस ने जबरन रात के अंधेरे में बगैर परिजनों के दाह-संस्कार कर दिया था जबकि वहीं ईटासानी की घटना में रेप के बाद नाबालिग पीड़िता की हत्या होने के दूसरे दिन 31 मार्च को धनवार पुलिस ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया था.
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पुलिस की लापरवाही
इस मामले में जिले के पूर्व एसपी के साथ-साथ धनवार थाना और परसन ओपी पुलिस की लापरवाही साफ तौर पर नजर आ रही है. न्यूजविंग ने जब पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की तो बताया गया कि धनवार के परसन ओपी पुलिस ने अनुसंधान सही तरीके से नहीं किया.
अब स्थिति यह है कि परसन ओपी की पुलिस ने मामले का रुख मोड़ते हुए इसे ऑनर किलिंग बता दिया. हाइकोर्ट ने इसी पर तल्ख टिप्पणी की है.
पीड़िता के पिता शंकर पासवान ने धनवार थाना पुलिस को रेप और हत्या का आरोप लगाते हुए 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था.
बताया जाता है कि रेप व हत्या की घटना को सिर्फ पिंटू पासवान ने अंजाम दिया था लेकिन जब परिजनों ने उसे घर के बाहर खदेड़ कर दबोचा तो उसे पीड़िता के परिजनों के चंगुल से छुड़ाने वालों में सात लोग शामिल थे. इसमें मुख्य आरोपी के पिता इंदर पासवान, चाचा वीरेन्द्र पासवान, सीताराम पासवान, भोला पासवान, जीतेन्द्र पासवान, गोलू उर्फ दीपंकर पासवान और रोबिन पासवान शामिल हैं.
लिहाजा, पिंटू पासवान के खिलाफ जहां रेप व हत्या के आरोप में धारा 302 और 376 के तहत धनवार थाना कांड संख्या 63/20 दर्ज किया गया था. वहीं केस में आरोपी पिंटू पासवान को छुड़ाकर ले जाने के आरोप में सात लोग अलग धाराओं में नामजद अभियुक्त बनाये गये थे.
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हाइप्रोफाइल हुआ केस
हाइकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद अब मामला जब काफी हाइप्रोफाइल हो गया है. इसके बाद से मामले में एसपी अमित रेणु और खोरीमहुआ के एसडीपीओ नवीन सिंह भी बोलने से बच रहे है. हालांकि परसन ओपी प्रभारी रमाकांत उपाध्याय अब भी मामले को ऑनर किलिंग साबित करने का प्रयास करते नजर आये.
न्यूजविंग से बातचीत में चाचा ने पूरे मामले में धनवार थाना की पुलिस और परसन ओपी को जिम्मेवार बताते हुए कहा कि सिर्फ दो आरोपी फरार हैं जबकि छह आरोपी अब भी घर पर हैं लेकिन परसन पुलिस इन आरोपियों को अब भी दबोचने से कतरा रही है.
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