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निगम की लापरवाही ने बर्बाद किये सरकार के 18 करोड़, कांके स्थित स्लॉटर हाउस पड़ा है बेकार

Ranchi :  पांच मई 2018 को राजधानी के कांके स्थित इलाके में 18 करोड़ रुपये की लागत से रांची नगर निगम ने एक स्लॉटर हाउस बनाया था. उद्देश्य था राजधानीवासियों को हाइजेनिक मीट खिलाना.

इसके लिए यहां विदेश से आयातित की गयी कई अत्याधुनिक मशीनें लगायी गयी थीं. लेकिन आज तक इस स्लाटर हाउस को चालू नहीं किया जा सका है.

निगम जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों की लापरवाही से राज्य सरकार की 18 करोड़ रुपये राशि कैसे बर्बाद हुई, इसकी जिम्मेवारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है. इस स्लॉटर हाउस को चलाने का जिम्मा राज्य से बाहर की एक कंपनी माइक्रो ट्रांसमिशन सिस्टम कंपनी (एमटीएस) को दिया गया था.

18 करोड़ रुपये की लागत से 5 एकड़ में बने यह इस स्लॉटर हाउस से एक दिन में 500 बकरे काटे जाने की बात की गयी थी.

बाद में इस काटे गये मीट को कूलर वैन से राजधानी के मीट विक्रेताओं को उपलब्ध कराया जाना था. लेकिन लोगों को हाइजेनिक मीट खिलाने का सपना पूरी तरह से अधूरा ही रह गया.

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 बोर्ड बैठक में उठा स्लॉटर हाउस का मुद्दा

दरअसल करीब दो साल बाद स्लॉटर हाउस का मुद्दा निगम परिषद की बैठक में उठा था. वार्ड 10 के पार्षद अर्जुन यादव ने परिषद में बंद पड़े इस स्लॉटर हाउस का कारण पूछा. तो उन्हें बताया गया कि मामला कोर्ट में है.

लेकिन कोर्ट में जाने का कारण नहीं बताया गया. हालांकि बाद में पार्षद को पता चला कि यह स्लॉटर हाउस अब किसी स्थानीय कंपनी को दी गयी है. जिसके मालिक सत्ताधारी पार्टी के ही नेता है.

इससे पहले अगस्त 2018 को न्यूज विंग ने भी यह खबर प्रमुखता से पोस्ट किया था कि स्लॉटर हाउस चलाने का जिम्मा ‘अर्स एंड एलम लाइव स्टोक एक्सपोर्टर’ नामक कंपनी को दिया गया है.

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 करोड़ो की मशीनें होने लगी है खराब

निगम स्वास्थ्य शाखा से जुड़े एक कर्मी का कहना है कि निगम के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच स्लॉटर हाउस चलाने की कोई मंशा नहीं दिखती है. वरना दो साल बाद भी इसे नहीं चलाया जा सकना समझ से परे है. करोड़ो की लागत से लायी मशीनें यूं ही खराब होने लगी है.

एक तो राजधानी से इतनी दूरी पर बनाया जाना और उसपर से देखरेख के अभाव में मशीनों का खत्म होना साफ बताता है कि राज्य सरकार का 18 करोड़ पूरी तरह से बेकार हो चला है.

 विरोध के बीच बना था चार मीट शॉप

लोगों को हाइजेनिक मीट खिलाने के लिए बने इस स्लॉटर हाउस को लेकर राजधानी के कई मीट कारोबारियों के विरोध का सामना भी निगम को करना पड़ा था. इन कारोबारियों का यह कहना था कि ऐसा होने से उनके व्यवसाय पर काफी असर पड़ेगा.

हालांकि इस विरोध के बाबजूद भी निगम ने राजधानी के कुछ चिंह्रित इलाकों में मीट शॉप बनाया था, ताकि स्लॉटर हाउस से पैकेटबंद मीट को यहा से बेचा जा सके. ऐसे शॉप के लिए बूटी मोड़, मोरहाबादी, मधुकम और डोरंडा इलाके को चिन्हित किया गया था.

लेकिन हकीकत यही है कि स्लॉटर हाउस शुरू ना हो पाने के कारण आज यह सभी शॉप पूरी तरह से बंद हैं.

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