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नक्सलियों के चंगुल से मुक्त हुई महिलाओं की कहानी, कहा- संगठन में होता है शोषण

Ranchi: माओवादी संगठन में महिला नक्सलियों के साथ जानवरों सा सलूक होता है. उनके साथ दुराचार और हिंसा की वारदातें आम हो चुकी हैं. साथ ही उनके साथ शारीरिक शोषण भी आम बात है.

अब तक पुलिस के समक्ष जितनी भी महिला नक्सलियों ने सरेंडर किया है या फिर जिन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है उन्होंने इस राज से पर्दा हटाया है. वहीं पुलिस ने भी इस बात का खुलासा किया है कि पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के बाद जब भी नक्सली कैंप ध्वस्त होता है तो वहां से भारी मात्रा में आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की जाती है.

21 मार्च को चाईबासा के गुदड़ी थाना अंतर्गत एक नाबालिग को नक्सलियों के चंगुल से पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने मुक्त कराया. मुक्त करायी गयी नाबालिग बच्ची ने नक्सली संगठन में महिला साथियों के साथ होने वाले दुष्कर्म की कहानी बयां की. सिर्फ यही बच्ची नहीं और भी कई महिला नक्सली इसी तरह की पीड़ा से गुजर चुकी हैं. जानिए सभी ने अपना दर्द बताते हुए क्या कुछ कहा.

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10 वर्ष की उम्र में नक्सलियों ने किया था अपहरण

चाईबासा जिले के गुदड़ी थाना क्षेत्र से एक नाबालिग को 21 मार्च को पुलिस व सीआरपीएफ की टीम ने नक्सलियों के चंगुल से मुक्त कराया. पुलिस को नाबालिग नक्सली ने बताया कि उसे भाकपा माओवादी 2017 में अपहरण कर ले गये थे. उस समय उसकी उम्र लगभग 10 वर्ष रही होगी.

माओवादी के एरिया कमांडर जीवन कंडुलना उर्फ लम्बु, सुरेश मुंडा, सुभाष उर्फ लोदरो लोहार, सूर्या सोय, चोकोय सुंडी के द्वारा अपने गिरोह में शामिल कर शारीरिक शोषण किया करते थे. माओवादी जहां भी जाते थे वह उसे अपने साथ लेकर जाते थे. जब भी वह अपने साथ हुए अत्याचार का विरोध करती थी तो उसे जान से मारने की धमकी दी जाती थी. बहुत बार बात नहीं मानने पर उसके साथ मारपीट भी की जाती थी.

नक्सलियों की धमकी और मारपीट के डर से वह उनके साथ रहती थी. उसे हमेशा माओवादी जीवन कंडुलना और सुरेश मुंडा के आसपास रखा जाता था, इसलिए दस्ते से कोई भी नक्सली अगर गिरफ्तार होता था तो वह पुलिस के सामने उसका नाम ले लेता था. जिसकी वजह से जिले के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ 7 मामले दर्ज हैं.

दस्ते में महिला नक्सलियों के साथ होता है अत्याचार: पीसी दी

दुमका पुलिस के समक्ष इस साल 17 जून को हथियार डालते वक्त हार्डकोर महिला नक्सली पीसी दी उर्फ प्रीशिला देवी काफी खुश थी. उसने नक्सलियों के साथ गुजारे कड़वे अनुभवों को साझा किया और दस्ता में महिला नक्सलियों के साथ किये अत्याचार के बारे में बताया.

यह अत्याचार रोंगटे खड़ कर देने वाले थे. भाकपा माओवादी संगठन में पीसी दी का स्थान सब जोनल कमांडर का था. सरेंडर करने वाले अन्य पांच नक्सलियों ने दस्ते में शोषण होने की बात स्वीकार की.

पीसी दी ने कहा कि दस्ता में महिला नक्सलियों के साथ अत्याचार होता है. उनका मानसिक व शारीरिक शोषण किया जाता है. एके 47 हथियार लेकर सरेंडर करने आयी पीसी दी ने कहा था कि नक्सली दस्ता में शामिल महिलाओं का जीवन सबसे कठिन है. उन्हें अधिकार नहीं दिया जाता है और हर प्रकार से शोषण होता है.

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झारखंड में माओवादी संगठन की स्थिति अराजक: नीलिमा

भाकपा माओवादी संगठन का पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ का इनामी सुधाकरण उर्फ सुधाकर और 25 लाख की इनामी उसकी पत्नी नीलिमा ने इस वर्ष 14 फरवरी को विधिवत तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था.

इस दौरान नीलिमा ने सनसनीखेज खुलासे किये. उसने कहा कि छत्तीसगढ़ में पति के साथ पहले संगठन में काम करती थी. वहां का अनुभव अच्छा रहा. जब झारखंड में आये, तो देखा कि माओवादी संगठन की स्थिति अराजक है.

यहां संगठन की नीति के विरुद्ध काम चल रहा था. इससे संगठन को नुकसान हो रहा था. संगठन में शामिल कुछ लोग महिलाओं का शोषण करते हैं. वहीं सुधाकरण ने कहा कि बाहर से बहुत लोग संगठन को समर्थन करते हैं.

यौन शोषण करना माओवादियों की फितरत: सुनीता

15 मई 2015 को हजारीबाग पुलिस की गिरफ्त में आयी भाकपा माओवादी संगठन की हार्डकोर नक्सली ललिता, सुनीता व तीन बच्चियों ने पुलिस के सामने जो बयान दिया था उससे संगठन के चरित्र और सिद्धांत दोनों बेनकाब हो गये थे. इन्होंने पुलिस के सामने खुलासा किया था कि माओवादी संगठन में महिला नक्सली सुरक्षित नहीं.

संगठन की महिलाओं का यौन शोषण करना माओवादियों की फितरत है. सुनीता ने बताया कि वो जिस पुरुष नक्सली से थोड़ा भी मुंह लगाती या उसकी योजनाओं का विरोध करती थीं तो वे उसके साथ दुष्कर्म करते थे. ऐसा केवल संगठन में शामिल महिलाओं के साथ ही नहीं होता था, बल्कि संगठन में लायी गयी नाबालिग बच्चियों के साथ भी होता रहता है.

सुनीता ने बताया कि ललिता व तीन बच्चियों को भी संगठन में शामिल किया था. वहीं 15 मई 2015 को मलकाना जंगल में सीआरपीएफ कोबरा बटालियन और भाकपा माओवादी संगठन के बीच मुठभेड़ हुई थी.

इस मुठभेड़ में सुनीता के दाहिने पैर में गोली लगी थी. इससे उसके जांघ की हड्डी फ्रैक्चर हो गयी थी. उसी के इलाज के लिए वह बहन के घर विष्णुगढ़ आयी थी, जहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. और फिर उसी की निशानदेही पर ललिता व तीन बच्चियों को गिरफ्तार किया गया था.

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माओवादी पूरी तरह विचारधारा विहीन हो गये हैं: भूषण

गुमला पुलिस लाइन में 18 सितंबर को वरीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करनेवाले भूषण यादव ने सरेंडर के दौरान कहा कि इन दिनों माओवादी विचारधारा विहीन होकर केवल लूट में लगे हुए हैं.

संगठन में महिलाओं और बच्चों का शोषण किया जा रहा है. आम जनता को परेशान किया जाता है. साथ ही सुरक्षाबलों के अभियान से माओवादियों में डर बना हुआ है.

पिछले कुछ वर्षों से लगातार अभियान और गिरफ्तारी के कारण माओवाद गुमला, लातेहार व लोहरदगा में लगभग खत्म हो चुके हैं. उसने बताया कि कई और माओवादी हैं जो मुख्यधारा में लौटने को तैयार हैं.

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