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मुठभेड़ में घायल नक्सली को तड़पता छोड़ भागे साथी, दूसरे दिन सुरक्षाबलों ने इलाज के लिए हेलिकॉप्टर से भेजा रांची

Ranchi : कोल्हान में नक्सलियों के खात्मे को लेकर सुरक्षाबल चौतरफा संयुक्त अभियान चला रहे हैं.  नक्सलियों के आखिरी गढ़ एवं शरण स्थली कोल्हान में एक करोड़ का इनामी शीर्ष नेता मिसिर बेसरा, अनल, असीम मंडल समेत शीर्ष नक्सली नेताओं एवं दस्ता सदस्यों के साथ कोल्हान जंगल में अपना ठिकाना बना कर विध्वंसक कार्रवाई को अंजाम दे रहा है. बीते शुक्रवार को कोल्हान के हुसीपी जंगली क्षेत्र में पहले से घात लगाये नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को लक्ष्य करते हुए अंधाधुंध गोली-बारी के साथ लैंड माइंस ब्लास्ट किया गया. सुरक्षा बलों द्वारा की गयी जवाबी कार्रवाई से नक्सली भीषण जंगली क्षेत्र का फायदा उठा कर भाग खड़े हुए. इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के जख्मी होने की सूचना प्राप्त हुई, साथ ही यह भी सूचना प्राप्त हुई कि नक्सली अपने एक दस्ता सदस्य को जख्मी हालत में मरने के लिए छोड़ कर भाग गये हैं. शनिवार को सुरक्षाबलों को सघन तलाशी अभियान के दौरान हुसीपी के घनघोर एवं दुर्गम जंगली क्षेत्र में एक नक्सली मरणासन्न की स्थिति में दिखाई दिया. जख्मी नक्सली को जान बचाने की नीयत से ईलाज के लिए हुसीपी लाया गया. अपनी जान को जोखिम में डाल कर आईईडी से भरे रास्तों पर पैदल चलते हुए उसे अपने कंधों पर उठा कर लगभग 5 किमी चल कर हाथीगुरू कैम्प लाया गया. जहां पर उपस्थित सीआरपीएफ के मेडिकल ऑफिसर ने प्राथमिक उपचार किया. इसके बाद विशेष प्रयास कर जान बचाने की नीयत से एवं बेहतर ईलाज के लिए हेलिकॉप्टर से रांची लाया गया.

लैंडमाइंस की चपेट में आने से कई सुरक्षाबल और ग्रामीण मारे गये

कोल्हान जंगली क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाये गये लैंड माइंस से सुरक्षा बलों के साथ इलाके के ग्रामीणों को भी नुकसान पहुंचा है. नवम्बर 2022 से लेकर अब तक 4 सुरक्षाबल शहीद हो गये.  28 सुरक्षाबल जख्मी हुए हैं. इसके अलावा 16 ग्रामीण मारे गये हैं एवं 08 ग्रामीण लैंड माइंस ब्लास्ट में गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं.

झारखण्ड सरकार एवं सुरक्षा बलों की नक्सलियों से अपील

राज्य में चलाये जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान का एकमात्र उद्देश्य उग्रवाद का खात्मा करना है, ताकि सरकार द्वारा राज्य में चलाये जा रहे विकासशील योजनाओं का लाभ सुदूर क्षेत्रों में भी पहुंचे. झारखण्ड में सरकार द्वारा एक बहुत ही प्रभावी एवं लाभकारी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति लागू की गयी है. इस नीति से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि सरकार एवं संयुक्त सुरक्षा बल आतंक का अंत बिना किसी जान-माल की हानि या नुकसान के करना चाहते हैं. नक्सलियों के शीर्ष नेताओं से झारखण्ड सरकार एवं झारखण्ड पुलिस यह अपील करती है कि आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा से जुड़े एवं अपने और राज्य के विकास के भागी बनें. सुरक्षा बलों द्वारा प्रस्तुत किया गया यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा.

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