DhanbadJharkhandLead NewsTOP SLIDER

धनबाद में नहीं थम रहा अवैध कोयला खनन के दौरान हादसों का सिलसिला, जिम्मेवार कौन?

बरोरा थाना क्षेत्र के बंद पड़ी डेको आउट सोर्सिंग परियोजना, फुलारीटांड़ में हादसा, आधा दर्जन लोग जख्मी

Manoj Mishra

Dhanbad: धनबाद कोयलांचल में अवैध कोयला खनन के दौरान होनेवाले हादसों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. फरवरी से 30 अप्रैल तक दस हादसे हो चुके हैं जिनमें से चार हादसे अप्रैल माह में ही हुए हैं. लगातार हो रहे हादसों में दो दर्जन से अधिक लोगों के मरने की खबर है वहीं दर्जनों के घायल होने की खबर लगातार सुर्खियों में है. ताजा मामला बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के बरोरा थाना क्षेत्र की है. जहां बंद पड़ी डेको आउट सोर्सिंग परियोजना, फुलारीटांड़ में हादसा हुआ है. शनिवार की सुबह चाल गिर जाने से यहां अवैध ढंग से कोयला खनन में लगे करीब आधा दर्जन लोग जख्मी हो गए. इनमें एक महिला की हालत नाजुक बताई जाती है.

मालूम हो कि बरोरू थाना क्षेत्र की बंद पड़ी लगभग एक किलोमीटर लंबी डेको आउट सोर्सिंग परियोजना, फुलारीटांड़ में कई जगह अवैध उत्खनन हो रहा है. लेकिन यह घटना नावागढ़ और डुमरा को जोड़नेवाली सड़क के बगल में संचालित परियोजना के व्यू प्वाइंट के नीचे घटी है.

कोयला चोरों ने पिलर काटकर अंदर पूरी खदान को मैदान बना दिया है. इससे आगे कभी भी भयानक दुर्घटना की संभावना बनी हुई है. पूरी की पूरी सड़क भी धंस सकती है.

इसे भी पढ़ें:Jharkhand PANCHAYAT ELECTION 2022: रांची जिले में अब 194 पदों पर ही होंगे चुनाव, 425 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित

जानकारी के मुताबिक, आज शनिवार की सुबह करीब साढ़े पांच बजे बंद पड़ी डेको आउट सोर्सिंग परियोजना, फुलारीटांड़ में अवैध और असुरक्षित ढंग से खनन के दौरान अचानक ऊपर से मलबा गिर गया. इसमें महिला दब गई. कई अन्य लोगों को भी चोट आई है. इस घटना से परियोजना में भगदड़ मच गई.

हादसे के बाद मलबे में दबी महिला को आनन फानन में निकालकर मौके पर मौजूद लोग डुमरा की ओर भाग निकले. जख्मी भी भागे.

जिस स्थान पर चाल धंसी है, वहां बाहर एक प्लास्टिक और पानी की बोतल पड़ी हुई थी. मामले की सूचना मिलने पर पड़ोस गांव से लोग पहुंचे, तब तक परियोजना लगभग खाली हो चुकी थी. वहीं हादसे के बाद भी दर्जन भर से ज्यादा लोग मौके पर मौजूद थे, बिना किसी डर के बोरियों में कोयला भरकर मोटरसाइकिल पर लाद कर ले जा रहे थे. परियोजना में कई जगह कोयले से भरी सैकडों बोरियां पड़ी हुई थीं.

हादसे के 5 घंटे बाद भी सुबह 11 बजे तक ना तो स्थानीय पुलिस और ना ही प्रबंधन का कोई अधिकारी मौके पर पंहुचा था. बीसीसीएल के दो पंप कर्मी वहां जरूर थे, जो डर से कुछ बोलने को तैयार नही थे.

उल्लेखनीय है कि गुरुवार की सुबह बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के वेस्ट मोदीडीह में संचालित बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच के पास बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कोयला उत्खनन के दौरान मलबा गिर जाने से पांडेडीह छह नंबर बस्ती निवासी करीब 64 वर्षीय वृद्ध महिला यशोदा देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गई. वहीं 4 अप्रैल को भी इसी वेस्ट मोदीडीह के बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में अवैध उत्खनन के दौरान मलबा गिर जाने से एक महिला जख्मी हो गई थी.

जबकि, 21 अप्रैल को निरसा के डुमरीजोड़ में 60 फीट सड़क धंस गई. शुरुआत में बताया गया कि अवैध खदान के धंसने से लगभग 60-70 कोयला मजदूर खदान में दब गये हैं. बाद में इसे अफवाह बताते हुए जिला प्रशासन और बीसीसीएल अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया.

यहां बता दें कि अवैध खनन के जयादातर मामले झारखंड में धनबाद के विभिन्न कोयला क्षेत्र के अलावा रामगढ़ और बेरमो कोयलांचल से है. इसके अलावा बंगाल का समीपवर्ती रानीगंज क्षेत्र है. देश में कोकिंग कोल के यही इलाके सबसे बड़े पॉकेट हैं. धनबाद इसमें सबसे बड़ा कोकिंग कोल भंडार वाला कोयला क्षेत्र है.

दर्जनों की संख्या में ऐसी खदानें हैं, जो 60-70 साल से बंद हैं. इन बंद खदानों में या अगल-बगल से मुहाना खोल कर अवैध खनन करना आसान होता है. गैलरी बनी होती है, इसलिए बिना ज्यादा मेहनत के खनन किया जाता है. डीजीएमएस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कई ऐसी पुरानी कोयला खदानें हैं, जिनका नक्शा तक उपलब्ध नहीं है. इन खदानों के आसपास अवैध खनन हो रहा है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह बेहद खतरनाक है.

इसे भी पढ़ें:पटना में ट्रेन में चेन पुलिंग करने से रोका तो उपद्रवियों ने किया पथराव, एसआइ घायल

वहीं कोकिंग कोल बहुल इलाकों में कई अवैध कोयला डिपो संचालित हैं. ये चोरी के कोयले की खरीद कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर यूपी, बिहार, बंगाल और पंजाब तक भेजते हैं. आउटसोर्सिंग परियोजनाओं से भी कोयला मिलता है. अभी हाल में तीन मामलों का खुलासा हुआ है.

धनबाद जिला अंतर्गत निरसा और महुदा थाना क्षेत्र में फरवरी माह में अवैध खनन से हुए हादसों की खबरें जब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई तो झारखंड सरकार की नींद में खलल पड़ी. तब पिछले दिनों राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह द्वारा विभिन्न जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक की गई.

उसके बाद पुलिस मुख्यालय के आईजी एवी होमकर अभियान ने संबंधित जिलों के एसपी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही अवैध उत्खनन पर नियंत्रण के लिए टास्क फोर्स की नियमित बैठक करने का सुझाव डीसी व एसपी को दिया गया.

इसके बाद से पुलिस-प्रशासन लगातार छापेमारी कर सैकड़ों टन कोयला जब्त किया है. दर्जनों ट्रक जब्त किए गए हैं. इसके बाबजूद कोयले का अवैध उत्खनन और तस्करी का बाजार फुल स्पीड में ऊंचाई पर है. और उतनी ही गति से हादसे भी हो रहे हैं और लोगों की जान भी जा रही है.

बड़ा सवाल यह है कि अवैध कोयला उत्खनन में हो रही मौत का जिम्मेवार कौन है? अवैध खनन रोकने के लिये सरकार का निर्देश जारी होता है, अधिकारियों की हाई लेबल मीटिंग होती रहती है, स्थानीय पुलिस को इसे रोकने के लिये दिशा निर्देश दिया जाता है. बावजूद इसके यह धंधा रुकने का नाम नहीं लेता क्यों? इसके पीछे किसका हाथ है?

इसे भी पढ़ें:Success Stories : मजदूर से मालिक का सफर, जाने रूपाली मंडी की सफलता की कहानी

अवैध खनन धनबाद कोयलांचल की बड़ी समस्या

देखा जाए तो अवैध खनन पूरे धनबाद कोयलांचल की एक ऐसी समस्या है जिसे खत्म करने का किसी स्तर पर कोई भी प्रयास नहीं किया जा रहा है. दरअसल होता यह है कि कोल कंपनियां बीसीसीएल और ईसीएल कई जगहों पर कोयला खदान को छोड़ चुकी हैं.

ऐसी खदानें जहां कोयले की मात्रा कम हो और उससे निकालने का खर्च ज्यादा हो उसे छोड़ दिया जाता है. उन खदानों के मुहाने को डस्ट वगैरह से बंद कर दिया जाता है. ऐसे में कोल माफिया सक्रिय हो जाते हैं.

300 से 350 मीटर तक गहरे खदान में जाते हैं मजदूर

कोयले के अवैध कारोबारी यानी कोयला माफिया हफ्तों तक सैकड़ों मजदूरों को लगाकर उन बंद मुहानों से डस्ट हटवा देते हैं और फिर उनके भीतर से कोयला निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है. इनकी लंबाई कई बार एक-एक किमी तक की होती है. वे स्थानीय गरीब मजदूरों के जरिये इन खदानों में अवैध खनन करवाते हैं.

इन मजदूरों को प्रतिदिन के हिसाब से 400 से 800 रुपये की कमाई होती है. ये मजदूर 300 मीटर से 350 मीटर तक अंदर जाकर कोयला काटते हैं और उसे निकालते हैं.

पूरी तैयारी के साथ होता है अवैध खनन

अंदर अगर पानी का जमाव मिलता है तो उसे मोटर पंप से निकालने की भी व्यवस्था होती है. यहां तक कि गैस वगैरह की परेशानी होने पर बड़े-बड़े पंखे लगाकर अंदर से उसे बाहर किया जाता है. मतलब हर हाल में बंद पड़े खदानों से कोयला निकालने की कोशिश की जाती है. इससे यह समझना जरा भी कठिन नहीं है कि अवैध खनन के लिए कोयला माफियाओं की तैयारी किस स्तर तक की है. जो बताता है कि बिना बीसीसीएल-ईसीएल के पदाधिकारी, सीआईएसएफ, प्रशासन और राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है.

माफिया करते मौज, जान गंवाते मजदूर

इस बात में कोई शक नहीं कि इस काम में जान का जोखिम है. बावजूद इसके कोयला मजदूर कोयले की खुदाई इन खदानों में करते हैं और कोयला निकालकर उसे एक निर्धारित जगह तक पहुंचाते हैं, जहां से ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और साइकिल के जरिये कोयले की ढुलाई की जाती है. इस धंधे में जो कोल माफिया सक्रिय हैं, वे इस धंधे से लाखों की कमाई कर रहे हैं, जबकि मजदूर बेमौत मारा जा रहा है.

इसे भी पढ़ें:BIG NEWS : सुप्रीम कोर्ट का आदेश, उपभोक्ता कानून से बाहर नहीं डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवाएं, दर्ज हो सकती हैं शिकायतें

कोयला काटने में लगते हैं बंगाल के गरीब मजदूर

दिलचस्प बात यह है कि इसमें स्थानीय मजदूरों को नहीं इस्तेमाल किया जाता है. कोयला माफिया इसके लिए बंगाल से गरीब मजदूरों को लाते हैं और उनसे कोयला निकलवाते हैं. बंगाल के मजदूरों को पूरी देख रेख में रखा जाता है. रात में काम करवाया जाता है और दिन को अपनी निगरानी में रखा जाता है.

खाना-पीना और रहने की सारी व्यवस्था कोयला माफियाओं के द्वारा किया जाता है ताकि कोई भी मजदूर किसी भी बाहरी व्यक्ति या प्रशानिक लोगों के संपर्क में नहीं आ सके. माइंस के भीतर कोयले की कटाई रात को ही होती है. इस काम के लिए जनरेटर वगैरह की भी पूरी व्यवस्था रहती है.

दरअसल, अवैध कोयले का कारोबार चार चरण में होता है. एक आदमी कोयला काटता है, दूसरा उसे बोरे में भरकर गन्तव्य तक पहुंचाता है, तीसरा डिपो में पहुंचाता है, चौथा चरण डिपो से राज्य के बाहर भेजा जाता है या फैक्ट्री वालों को भेजा जाता है. काटने वाले को एक रुपये किलो के हिसाब से रेट मिलता है, बाकी को वैध कोयले के 40 प्रतिश के कम दर पर बेचा जाता है.

राजस्व के साथ जीएसटी का भारी नुकसान

कोयले के इस अवैध कारोबार से राजस्व की हानि तो है ही जीएसटी का काफी नुकसान हो रहा है. रोज छापेमारी हो रही है. फिर भी अवैध उत्खनन रोज ब रोज बढ़ता जा रहा है. इस अवैध खनन का सबसे खतरनाक पहलू है कि इतनी तेजी से की जा रही कोयले की कटाई से कभी भी बहुत बड़ा हादसा हो सकता है.

कतरास थाना से 3-4 किमी दूर अवस्थित साखाटांड़, श्यामडीह, काको व टंडा बस्ती एरिया में अवैध कोयले का डिपो है जहां से हाइवा वगैरह से कोयले की सप्लाई की जाती है.

वहीं कतरास थाने के 1 से लेकर 5 किमी के दायरे में आने वाले आकाश कनाली, कौलूडीह, मलकेरा, कोसलपुर रोड, बुटूबाबू का बंगला, रामकनाली माइंस के क्षेत्र बेखौफ रूप से अवैध उत्खनन होता है.

इसे भी पढ़ें:शराब दुकानों में बंपर सेल, 1 मई को ड्राइ डे, 2 मई से नयी शराब नीति के तहत बिकेगी शराब

माफिआयों को प्राप्त है राजनीतिक संरक्षण

इधर, सोनारडीह थाना से मात्र तीन किलोमीटर दूर तेतुलिया माइंस में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. बाघमारा थाना क्षेत्र का भीम कनाली, नदखरकी, जमुनिया, टूंडो से लेकर नदखरकी, जमुनिया के इलाके में लगभग 10 अवैध कोल डिपो हैं. समझा जाता है कि ये तमाम अवैध कोल डिपो बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो के संरक्षण में ही नहीं बल्कि उन्हीं के द्वारा ही चलवाया जा रहा है. महुदा थाने से मात्र 4 किलोमीटर दूर है कोल माइंस भाड़डीह, लाल बंगला एरिया जहां बड़े पैमाने अवैध खनन हो रहा है. वहीं पुटकी थाना व भागाबांध थाने के बीच है खैरा माइंस, जो पुटकी थाना क्षेत्र में आता है.

यह थाने से मात्र 4 किमी दूर है और यहां बड़े धड़ल्ले से अवैध खनन होता है. केन्दुआडीह थाना और धनसार थाने के बीच है काली बस्ती माइंस जहां दोनों थाने की देखरेख में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. वहीं लोयाबाद थाना व जोगता थाने के बीच में है सेन्दरा माइंस वहां भी अवैध खनन अपने परवान पर है.

इसी तरह तेतुलमारी थाना क्षेत्र, बरोरा, मधुबन थाना क्षेत्र, झरिया, बोर्रागढ़, भौंरा, पाथरडीह, सुदामडीह, अलकडीहा, तिसरा, गौशाला ओपी, निरसा और मुगमा थाना क्षेत्र, गलफरबाड़ी ओपी आदि थाना क्षेत्रों में थाना से महज एक से 5 किलोमीटर के दायरे में बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध खनन किया जाता है.

इसे भी पढ़ें:राजेश्वरी बी को राज्य पोषण मिशन और निदेशक बाल संरक्षण का अतिरिक्त प्रभार

Related Articles

Back to top button