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दस लाख मजदूर हुए रजिस्टर्ड, कंपनियों की डिमांड 7000 की, कितनों को मिला रोजगार विभाग को पता नहीं

लेबरनेट से सितंबर में किया गया एमओयू

Ranchi : कोरोना लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में राज्य सरकार ने जोर दिया. इसके बाद इन्हें रोजगार दिलाने की तैयारी शुरू हई. श्रम विभाग की ओर से मजदूरों को रोजगार दिलाने और मॉनिटरिंग के लिए लेबरनेट नामक समाजिक उद्यम से एमओयू किया गया. एमओयू सितंबर में किया गया. लेकिन अभी तक श्रम विभाग ने कितने मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया, यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

अधिकारियों से जानकारी मांगने पर स्पष्ट कहा गया कि इस तरह का आकंड़ा नहीं है. वहीं मजदूरों के रजिस्ट्रेशन और कंट्रोल रूम चलाने के लिए फिया फाउंडेशन को कार्यभार दिया गया. ऐसे में विभाग और कंट्रेाल रूम दोनों के पास इसकी जानकारी नहीं है. बता दें लॉकडाउन और अनलॉक के अलग-अलग चरणों से लगभग दस लाख मजदूर रजिस्टर्ड हुए.

लेबरनेट के पास मात्र 7000 रोजगार

विभाग की मानें तो लेबरनेट के पास मात्र 7000 रोजगार उपलब्ध है. अक्टूबर तक संस्था के पास महज 250  रोजगार उपलब्ध थे. बता दें लेबरनेट चेन्नई की संस्था है. जो मुख्य रूप से राज्य के प्रवासी मजदूरों को नौकरी दिलाने और मॉनिटरिंग के लिए कार्यरत है.

संस्था की ओर से जो 7000 रोजगार की डिमांड है वह टेक्निकल स्किल की है. इनमें वे लोग शामिल हो सकते हैं जिन्होंने आइटीआइ या डिप्लोमा किया हुआ हो. जानकारी के अनुसार श्रम विभाग के पास ऐसे लोगों की संख्या काफी कम है. लेबरनेट के द्वारा जिन लोगों को काम दिया जाना है उन्हें चेन्नई जैसे शहरों में रहना होगा. इधर श्रम विभाग जिन लोगों की मैपिंग कर रहा है उनमें ऐसे कुशल लोग बहुत कम संख्या में हैं. राज्य के प्रवासी मजदूर इतने प्रशिक्षित नहीं है.

राज्य सरकार ने कुछ उद्योगों में लगायी नौकरी

लेबरनेट को छोड़, राज्य के अलग-अलग विभागों में भी प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है. जिसमें उद्योग विभाग अंतर्गत संचालित अलग-अलग इंड्रस्ट्रीज शामिल हैं. वहीं लगातार श्रम विभाग की ओर से इन मजदूरों की सूची भी मांगी जा रही है. पिछले दिनों कोयंबटूर से रेस्क्यू कर लायी गयी 22 युवतियों में से 14 को उद्योगों में नौकरी दी गयी. अन्य बच्चियां नाबालिग थी, जिससे उन्हें नौरकी नहीं दी गयी.

जानकारी नहीं है कुछ नहीं कहा जा सकता

श्रम विभाग के अपर श्रमायुक्त सह निबंधक श्रमिक संघ श्याम सुंदर पाठक ने कहा कि कितने मजदूरों की नौकरी लगी है इसकी जानकारी नहीं है. न ही आंकड़े हैं. ऐसे में कुछ नहीं कहा जा सकता. वहीं लेबरनेट से भी कितनी नौकरी लगी ये आंकडे़ विभाग के पास नहीं हैं. बता दें श्रम विभाग ने फिया फाउंडेशन नामक संस्था को मजदूरों के रजिस्ट्रेशन का काम दिया. फिया फाउंडेशन कोरोना लॉकडाउन के वक्त से ही सरकार के साथ काम रही. ऐसे में लेबरनेट से हुए समझौते में ये संस्था भी शामिल रही. प्रवासी मजदूर कंट्रोल रूम इसी संस्था की ओर से चलाया जा रहा है.

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