
Manoj Kumar: Giridih
शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने के मामले सामने आते ही रहते हैं, लेकिन गिरिडीह का यह मामला कुछ अलग है. इस मामले फर्जी डिग्री के सहारे एक कथित शिक्षक 37 साल तक सरकारी नौकरी के बाद रिटायर भी हो गया. इस दौरान वेतन मद में 80 लाख से अधिक राशि भी उठाया. झारखंड गठन के पूर्व नौकरी ज्वाइन किया था और राज्य गठन के बाद अधिकारियों की आंख में धूल झोंकने में सफल रहा. झारखंड गठन के बाद 22 वर्षों में कई शिक्षा अधीक्षक आए और गए, मगर इनकी करतूत किसी की पकड़ में नहीं आई. शिक्षक का नाम डपरु राय है. अब जब जिले के नए शिक्षा अधीक्षक विनय कुमार को इसकी जानकारी मिली है तो डपरु के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है. उनका पेंशन बंद कर दिया गया है.

शिक्षा अधीक्षक विनय कुमार ने पूरे मामले की जानकारी जुटाई है. कथित शिक्षक डपरु राय जिले के देवरी के खेसोडीह स्कूल से सेवानिवृत हो चुके हैं. जानकारी मिलने के बाद डीएसई विनय कुमार ने फिलहाल इस सेवानिवृत शिक्षक के रिटायरमेंट पावना और पेंशन के भुगतान पर रोक लगा रखी है. इसकी पुष्टि खुद जिला शिक्षा अधीक्षक विनय कुमार ने की है. मामले की जांच के लिए डीएसई ने बीतें मार्च और अप्रेल माह में राज्य के झारखंड प्राथमिक शिक्षा निदेशक को पत्राचार भी किया.
इतने बड़ी गड़बड़ी को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने जांच के लिए तीन सदस्यी टीम का भी गठन करने का निर्देश दे दिया है. रिटायरमेंट पावना और पेंशन बंद होने के बाद इस सेवानिवृत शिक्षक डपरु राय ने हाईकोर्ट में अपील किया है. वैसे जब गिरिडीह शिक्षा विभाग ने जांच तेज किया, तो खुद को शिक्षक साबित करने के लिए इस शिक्षक ने एक और कारनामा कर दिया, और बिहार एकेडेमिक कांउसिल का फर्जी लेटर तक बनवा लिया. जबकि बिहार एकेडेमिक कांउसिल के लेटर में ना तो कोई पंत्राक नंबर था और ना कोई ऐसे तथ्य, जिसे लेटर सही साबित हो सके. लिहाजा, जब गिरिडीह शिक्षा विभाग ने जांच तेज किया.

जिला शिक्षा विभाग की माने तों साल १९८७ में देवरी के डपरु राय ने मैट्रिक के फर्जी प्रमाण पत्र पर गिरिडीह शिक्षा विभाग से सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की और नौकरी करता रहा. जब राज्य अलग हुआ, तो डपरू राय की नौकरी जारी रही, और उसे वेतन भी मिलता रहा. लेकिन २२ साल बाद साल २०१७ में मुख्यमंत्री जनसंवाद के माध्यम से डपरू राय के इस कारनामे की शिकायत भी हुई थी.




