JharkhandJharkhand StoryKhas-KhabarLead NewsMain SliderNEWSRanchiTOP SLIDERTop Story

जाली वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट देकर सड़क का ठेका लेने की कोशिश, ठेकेदार डिबार

Nikhil Kumar

Ranchi: जाली वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट देकर दूसरे सड़क निर्माण का ठेका लेने का प्रयास ठेकेदार को भारी पड़ गया है. पथ निर्माण विभाग ने संवेदक मेसर्स छिन्नमस्तिका कंस्ट्रक्शन रेलवे कॉलोनी रेड़मा, डालटेनगंज को पथ विभाग की निविदाओं में प्रतिभागिता से वंचित, डिबार करने का फैसला लिया है. इस संबंध में विभाग के अभियंता प्रमुख के हस्ताक्षर से आदेश जारी किया गया है और सभी मुख्य अभियंता, अधीक्षण व कार्यपालक अभियंता को सूचित कर दिया गया है.

दरअसल, पथ प्रमंडल खूंटी अंतर्गत सिसई- लापुंग-डोड़मा पथ एमडीआर-30 के 41वें किमी में छाता नदी पर उच्चस्तरीय पुल निर्माण का टेंडर जारी हुआ था। इस निविदा में निविदाकार मेसर्स छिन्नमस्तिका कंस्ट्रक्शन द्वारा भी भाग लिया गया था, जिसके बिड में संवेदक द्वारा गाला नाला में उच्चस्तीरय ब्रिज निर्माण, खैरा नाला में चैनेज, लातेहार-सरयू रोड का निर्माण कार्य इत्यादि का वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा किया गया. इस संबंध में पथ निर्माण विभाग ने जब कागजातों की जांच कराई गई तो पथ प्रमंडल लातेहार के कार्यपालक अभियंता ने खूंटी के कार्यपालक अभियंता को यह जानकारी दी कि उक्त वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट जाली है, काम पूरा नहीं हुआ है. इसके अलोक में पथ विभाग की विभागीय निविदा समिति की बैठक 26 दिसंबर को ही हुई थी और उपरोक्त संवेदक पर झारखंड पथ निर्माण संवेदक निबंधन संशोधन नियमावली 2018 के अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा की गयी. विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा करते हुए संवेदक को छह माह तक डिबार कर दिया है.

पहले डिबार किया, फिर किया मुक्त

इधर, पथ निर्माण विभाग ने एक और संवेदक मेसर्स आरएनएस कंस्ट्रक्शन लि.उत्तरप्रदेश की कंपनी को पहले गलत टर्नओवर बताने के आरोप में पहले डिबार करने के बाद अब फिर से उक्त ठेकेदार को आरोपों से मुक्त कर दिया है. दरअसल, पथ प्रमंडल सिमडेगा अंतर्गत पुतरीटोली- टीम्बर मोड़- रामपुर-बोरोसेता-जीतुटोली- बेराईरगी कोयल नदी तक रोड के 31 किमी तक राइडिंग क्वालिटी सुधारने का काम निकला था.

मेसर्स आरएनएस कंस्ट्रक्शन ने इसमें भाग लिया था, इनके विरूद्ध परिवाद पत्र समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा निविदा में समर्पित वर्ष 2017-18 के आडिट रिपोर्ट में मूल वित्तीय टर्नओवर में छेड़छाड़ का उल्लेख किया गया.

मामले में उनसे पूछताछ की गयी जिसमें संवेदक ने अपनी गलती स्वीकारी थी. बाद में समीक्षा के बाद संवेदक को डिबार कर दिया गया. इसी बीच मेसर्स आरएनएस कंस्ट्रशन ने अपना जवाब दिया और कहा कि उनकी मंशा गलत र्टनओवर जमा करने की नहीं थी, भविष्य में दोबारा गलती नहीं होगी. ऐेसे में विभाग ने समीक्षा के बाद उक्त संवेदक को डिबार मुक्त कर दिया है. इसका भी आदेश जारी कर दिया गया है.

Related Articles

Back to top button