
Ranchi : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा शिक्षकों के 26001 पदों के लिए जारी विज्ञापन पर भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने सवाल खड़े किये हैं. पार्टी कार्यालय में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य सरकार युवाओं से ठगी करने में लगी है. जारी विज्ञापन में कौन सी स्थानीय नीति और नियोजन नीति का पालन होना है, इसका पता नहीं है. सीएम हेमंत सोरेन या सरकारी विभागों के सक्षम पदाधिकारी आज ही बतायें कि आखिर किस नियम से नियुक्तियां होनी हैं. 60:40 के आधार पर अगर नियुक्ति है तो इससे स्थानीयों की हकमारी होगी. 1932 के खतियान पर या 2016 की स्थानीय नीति का पालन होना है या कोई और, इसे सरकार स्पष्ट करे. इस दौरान विधायक केदार हाजरा और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाडंगी भी उपस्थित थे.
1932 झामुमो के लिए केवल मुद्दा
भानु प्रताप शाही ने कहा कि झामुमो और कांग्रेस जैसे दलों ने 2019 में चुनावी घोषणा पत्र में पारा शिक्षकों को नियमित किये जाने की बात की थी. उनके लिए सम्मानजनक वेतन निर्धारण का आश्वासन दिया था. पर सरकार वोट लेकर सब भूल गयी औऱ वादाखिलाफी कर रही. केवल नाम बदलकर सहायक शिक्षक कर दिया है. जेएसएससी द्वारा जारी विज्ञापनों में उनके हिसाब से कोई सुविधा नहीं है.
भानु के मुताबिक पिछले दिनों सीएम हेमंत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि 1932 का खतियान उनके लिए एक मुद्दा है. भाजपा के लिए ऐसे विषय केवल सियासी मुद्दे नहीं होते. भाजपा ने राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था. कश्मीर से धारा 370 हटाने का लिया था. सभी संकल्पों को पूरा कर दिखाया.
सरकार ने शिक्षकों के लिए जारी विज्ञापन में एक शर्त लगायी है कि केवल टेट पास ही इसमें बैठेंगे. 2019 में ऐसा नियम राज्य में बना कि हर साल टेट परीक्षा हो. पर ऐसा हो नहीं हो रहा. 2016 से अब तक (जून 2023) टेट परीक्षा हुई ही नहीं. 8 लाख स्टूडेंट्स बीएड, डीएलएड किए बैठे हैं पर टेट पास नहीं होने से उन्हें शिक्षक नियुक्ति में मौका नहीं मिलेगा. ऊपर से उम्र सीमा पार होने से उनके सामने अलग चुनौती है. अब चूंकि टेट परीक्षा में कोई भी कहीं से शामिल हो सकता है. ऐसे में टेट पास दूसरे राज्यों के कैंडिडेट के लिए भी शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में शामिल होने का मौका रहेगा. कुछ दिनों पहले अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति में टेट पास की सीधी बहाली हो गयी. यह सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति को दिखाता है.
भानु के अनुसार जारी विज्ञापनों को देखें तो हर साल 5 लाख युवाओं को नौकरी देने वाली सरकार ने महज 25 हजार पदों के लिए आवेदन मांगे हैं. कभी पांच लाख, कभी एक लाख, कभी 50 हजार की बात करने वाली सरकार ने 25 हजार नौकरियों के लिए आवेदन मंगाये हैं. उसमें भी पूर्व में जारी विज्ञापनों की तुलना में पे ग्रेड भी 4200 से 2400 कर दिया है. जब कोर्ट में स्थानीय, नियोजन नीति संबंधी केस में सरकार पस्त होती तो राज्य सरकार कहती है कि भाजपा और गवर्नर इसके पीछे लगे हैं. वास्तव में सरकार का विधि विभाग खुद ही आपत्ति जताता रहा है.
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