
Amit Jha
Ranchi: मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फ़ुटबाल स्टेडियम में 2017-19 में खेल राज्य के खेल विभाग द्वारा बिछाये गये इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक को ब्रिटिश सर्वेयर से भी सर्टिफिकेशन मिल चुका है लेकिन खुद खेल विभाग की रिपोर्ट में ही उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े किये गये हैं.
बता दें कि ब्रिटिश सर्वेयर के सर्टिफिकेशन के बाद तत्कालीन विभागीय मंत्री अमर बावरी ने मार्च, 2019 में इसका उद्घाटन भी कर दिया था. एक इंटरनेशनल ब्रिटिश सर्वेयर द्वारा सर्टिफाइड स्टेडियम को अपने नियंत्रण में लेने के बाद खेल विभाग अब उसे खिलाड़ियों को उपलब्ध करा नहीं पा रहा है.
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छह महीने का काम सालभर में हुआ पूरा
एनआरइपी-2 ने संवेदक ग्रेट स्पोटर्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद (तेलंगाना) को नवम्बर 2017 में कार्यादेश जारी किया था. संविदा शर्तों के अनुसार उसे छह माह में काम पूरा कर लेना था.
इसके विपरीत स्टेडियम में ट्रैक बिछाने और आवश्यक कार्यों को निपटाने में उसे साल भर से अधिक समय लग गया.
उसके द्वारा एनआरइपी-2 को बताया गया कि ब्रिटिश सर्वेयर मैथ्यू कोहेन (ट्रैक मास्टर्स इंटरनेशनल लिमिटेड) द्वारा 14 जनवरी, 2019 को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुसार सर्वे कर लिया गया है.
इसमें कंसट्रक्शन क्वालिटी-3 बतायी गयी है. आइएएएफ टेक्निकल कमिटी चेयरमैन जॉर्ज सलकिडो के हस्ताक्षर से जारी सर्टिफिकेशन लेटर भी एनआरइपी को दे दिया.
सर्टिफिकेशन 22 फ़रवरी 19 को जारी किया गया. इसके अनुसार ट्रैक की लाइफ 2024 तक बनी रहेगी. एनआरइपी ने आवश्यक सर्टिफिकेशन लेटर प्राप्त होने के बाद खेल विभाग को जानकारी दी. इस दौरान संवेदक को 5 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान प्राप्त हो गया.
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आवश्यक तकनीकी मापदंडों का नहीं हुआ अनुपालन
स्टेडियम में ट्रैक बिछाने के दौरान विश्व एथलेटिक महासंघ के गाइडलाइन को तरीके से फॉलो नहीं किया गया. उसकी गाइड लाइन के एक बिंदु के अनुसार ट्रैक बिछाये जाने में भारतीय एथलेटिक महासंघ और झारखण्ड एथलेटिक संघ को सूचित करना चाहिए था.
उनसे तकनीकी पदाधिकारियों के लिए सहयोग लेना चाहिए था. इस मामले में उदासीनता बरती गयी.
खेल विभाग के पास इस सम्बन्ध में झारखण्ड एथलेटिक संघ की आपत्तियों को भी दरकिनार कर दिया गया था.
सर्वेयर ने जो सर्टिफिकेशन जारी किया है, उसे कायदे से भारतीय एथलेटिक महासंघ के पदाधिकारी के हाथों जारी किया जाना चाहिए था.
अगर संवेदक द्वारा विभाग को दिये गये सर्टिफिकेशन को आधार मानें तो इसमें कई सवाल खड़े होते हैं.
जैसे कि ट्रैक पर सर्वेयर ने समुचित मार्किंग क्यों नहीं करायी. उसकी थिकनेस, बेस वर्क पर भी सवाल हैं जो खेल विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा भी है.
एक तो ऐसे भी सवाल है कि रांची में होटवार के स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक होने और उसका सदुपयोग नहीं होने के बावजूद क्यों रांची में ही पैसे की बर्बादी की पहल हुई.
होटवार में दो ट्रैक हैं ही तो तीन ट्रैक का औचित्य क्या था. पैसे खर्च करने ही थे तो संताल, कोल्हान में इसे खर्च किया जाता.
कहने को इंटरनेशनल, स्टेट लेवल तक का आयोजन नहीं हो सका
मोरहाबादी के सब स्टैण्डर्ड ट्रैक की हालत यह है कि मंत्री के हाथों उद्घाटन किये सालभर हो गये पर 2017 से अब तक एक स्टेट लेवल का आयोजन भी नहीं हो सका है, जबकि होटवार में बिछाये गये ट्रैक पर नेशनल गेम्स और अन्य महत्वपूर्ण स्तर के खेलों का आयोजन सफलतापूर्वक हो चुका है.
फ़िलहाल तो रोचक बात यह है कि ट्रैक निर्माण के काम में पांच करोड़ रुपये स्वाहा हो गये. 2024 में ट्रैक की लाइफ ख़त्म हो जायेगी. अर्थ यह कि सात बरस की क्वालिटी लाइफ रखनेवाला ट्रैक तीन साल से बेकार पड़ा है. महज चार साल ही अब इसके बचे हैं.
खुद खेल विभाग की जांच रिपोर्ट सिंथेटिक ट्रैक निर्माण के पीछे हुई सुनियोजित लापरवाही की पोल खोल रही है.
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