
Amit Jha
Ranchi: वर्ष 2017 में झारखंड सरकार के खेल विभाग ने रांची और चंदनकियारी (बोकारो) में इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक बनाने की योजना सोची. इसी वर्ष रांची के लिए टेंडर जारी हुआ और 2019 में काम पूरा कर लिया गया.
नवंबर 2017 से जनवरी 2019 के बीच (करीब 14 महीने) मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में लगभग सवा सात करोड़ का ट्रैक तैयार कर लिया गया. एक साल होने को है. विभाग अब तक कायदे से इसे अपने नियंत्रण में ले पाने की स्थिति में नहीं है.
स्टेडियम में प्रैक्टिस करने की लालसा मन में लिये खिलाड़ी भी मोरहाबादी के आसपास उबड़-खाबड़ जमीन पर अपना पसीना बहा रहे हैं.
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विश्व ओलंपिक संघ के प्रावधानों को किया गया दरकिनार
रांची में बिरसा मुंडा फुटबाल स्टेडियम, मोरहाबादी में 7.27 करोड़ की लागत से 8 लेन का सिंथेटिक ट्रैक बिछाने में खेल विभाग ने लापरवाही बरती है.

अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ, भारत द्वारा देश में खेल-खिलाड़ियों के मामले में कई मापदंड तय किये गये हैं. उसके अनुसार (चैप्टर 2, बिंदु 2-2.6) किसी राज्य में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के सिंथेटिक्स ट्रैक बिछाने से पूर्व स्थानीय एथलेटिक्स संघ को जानकारी देनी होती है. औपचारिक सहमति भी जरूरी है.
इस मामले में समुचित प्रावधानों का खेल विभाग ने उल्लंघन किया. रांची और चंदनकियारी में अपने तौर तरीके से सिंथेटिक ट्रैक बिछाने की सहमति प्रदान कर दी और काम करा लिया गया.
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गुणवत्ता को लेकर उठते सवाल
सिंथेटिक ट्रैक बिछाने में मापदंडों का उल्लंघन कई बिंदुओं पर हुआ है. झारखंड एथलेटिक्स संघ ने खेल विभाग को इस संबंध में आपत्ति भी दर्ज करायी. सिंथेटिक ट्रैक के निर्माण से पूर्व ही इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिया के गाइडलाइन का उल्लंघन कर किसी अन्य से सर्टिफिकेशन भी ले लिया गया.

ऐसे संवेदनशील मसले को देखते हुए विभागीय निदेशक अनिल कुमार सिंह ने राज्य खेल समन्वयक उमाशंकर जायसवाल को 8 नवंबर, 2019 को पत्र लिखा. इसमें कहा गया कि डीडीसी, रांची ने मोरहाबादी में सिंथेटिक ट्रैक बिछा लिये जाने की जानकारी दी है. पर ट्रैक बिछाने के संबंध में कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं.
ऐसे में एथलेटिक्स संघ के तकनीकी पदाधिकारियों के साथ मिल कर ट्रैक बिछाने में की गयी गड़बड़ी की शिकायतों की जांच की जाये. जायसवाल ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिल कर इसका मुआयना किया.
13 नवंबर को उन्होंने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी. इसमें साफ साफ लिखा कि इंटरनेशनल ट्रैक की गुणवत्ता इतनी खराब है कि इस पर लोकल आयोजन भी संभव नहीं है. ज्यादा से ज्यादा यही हो सकता है कि कुछ खिलाड़ी हल्का फुल्का अभ्यास भर कर लें.
यह ट्रैक, जंप और थ्रो के मामले में किसी भी तरह से ट्रैक आदर्श नहीं है. ट्रैक की मोटाई कम से कम 20-25 मि.मी. होनी चाहिए जबकि यह मात्र 10-12 मि.मी. ही है.

ट्रैक पर जगह-जगह पर 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर और अन्य संकेतकों की मार्किंग नहीं की गयी है. पोल वाल्ट रनिंग ट्रैक से सटा हुआ है, जो खतरनाक है.
गोला फेंक का एरिया असमतल और असमान्य है. यह खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं. कुल मिला कर जांच समिति ने सिंथेटिक ट्रैक के समूचे एरिया को दोषपूर्ण पाया.
सिंथेटिक ट्रैक के लिए चाहिए आइएएफ का सर्टिफिकेशन
देशभर में कहीं भी इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक बिछाने में आइएएफ के स्पष्ट दिशा निर्देश हैं. जब ट्रैक बिछाया जाता है तो उसका सरफेस कटिंग लेकर बाहर के लैब में जांच के लिए भेजा जाता है.
इसमें उसके थिकनेस (Thickness) और अन्य गुणवत्ता को परखा जाता है. आइएएफ एक सर्वेयर भेजता है जो आकर उसका सुपरविजन करता है और तब उसके द्वारा सर्टिफिकेशन करके दिया जाता है. अभी मोरहाबादी में जो ट्रैक बिछाया गया है और बाहर के जिस व्यक्ति ने इसे सर्टिफिकेशन दिया है, उसमें इसका लेवल-2, कंस्ट्रक्शन क्वालिटी-3 है.
निर्माण की गुणवत्ता के लिहाज से चार श्रेणियां हैं-1, 2, 3 और 4. होटवार, रांची में लगे ट्रैक की गुणवत्ता-2 (निर्माण) है जबकि मोरहाबादी वाली 3. यानी सर्टिफिकेशन के लिहाज से भी यह बेहतर नहीं.
खेल विभाग की जांच समिति ने माना है कि सिंथेटिक ट्रैक बिछाने के मामले में आइएएफ के साथ समुचित वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन नहीं हुआ है. फिलहाल इस ट्रैक पर किसी तरह का आयोजन मुनासिब नहीं.
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