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नए आपराधिक कानून में आतंकवाद पर सख्त एक्शन, लड़कियों और बच्चों पर अपराध में सख्ती, जांच, ट्रायल और अदालती कार्यवाहियों में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

Ranchi: देश की कानून और न्याय व्यवस्था के लिए 1 जुलाई इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली तारीख है. नए कानून के अनुसार जो मुकदमे दर्ज होंगे, उनका ट्रायल भी नए कानून से होगा. जो मुकदमे 30 जून की रात 12 बजे के पहले पुराने कानून से दर्ज होंगे. उनका ट्रायल पुराने कानून से ही होगा. सोमवार से देश में तीन नए कानून अमल में आ रहे हैं. इन कानूनों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए झारखंड पूरी तरह तैयार है. आईपीसी की 511 धाराओं की जगह बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) में 358 धाराएं होंगी. इसमें 21 नए अपराध जुड़े हैं और 41 धाराओं में सजा बढ़ाई गई है. इसके अलावा पहली बार 6 अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा जोड़ी गई है. आतंकवादी गतिविधियों को पहली बार भारतीय न्याय संहिता के तहत पेश किया गया था. आर्थिक सुरक्षा को ख़तरा भी आतंकवादी गतिविधि के अंतर्गत आएगा. नए कानूनों के तहत, जो भी शख्स देश को नुकसान पहुंचाने के लिए डायनामाइट या जहरीली गैस जैसे खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें आतंकवादी माना जाएगा. इसमें खास बात ये है कि अगर कोई आरोपी शख्स भारत से बाहर भी छिपा हुआ है तो भी उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है. अगर वो 90 दिनों के भीतर कोर्ट में पेश होने में विफल रहता है, तभी केस चलेगा. ऐसे मामलों में, आरोपी शख्स की अनुपस्थिति में केस चलेगा और अभियोजन के लिए एक पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किया जाएगा. वही नए कानून में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों का भी जिक्र है. दंड संहिता में नरम प्रावधानों का फायदा उठाने से आरोपी व्यक्तियों को रोकने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं. इसमें नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले को पॉक्सो के साथ जोड़ा गया है. ऐसे केस में आजीवन कारावास या मृत्युदंड का भी प्रावधान किया गया है. गैंगरेप के मामलों में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, नाबालिग के साथ गैंगरेप को नए अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

जांच, ट्रायल और अदालती कार्यवाहियों में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

नए आपराधिक कानूनों में जांच, ट्रायल और अदालती कार्यवाहियों में तकनीक के इस्तेमाल पर खासा जोर दिया गया है. नए कानून लागू होने के बाद मुकदमा से लेकर अदालत का फैसला आने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. इतना ही नहीं भारत आपराधिक न्याय प्रणाली में तकनीकी का इस्तेमाल करने वाला देश भी बन जायेगा. इसलिए एनसीआरबी ने मौजूदा क्राइम एंड क्रिमनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) एप्लिकेशन में 23 फंक्शनल मॉडिफिकेशन किए हैं. ताकि नए सिस्टम में भी आसानी से कंप्यूटर से एफआईआर दर्ज होने समेत सीसीटीएनएस संबंधित अन्य तमाम कार्य करने में कोई प्रॉब्लम ना आए. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने भी नए कानूनों के तहत क्राइम स्पॉट, अदालती सुनवाई और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अदालती समन की तामील की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की सुविधा के लिए ई-साक्ष्य, न्यायश्रूति और ई-समन नाम से तीन नए ऐप भी बनाए हैं. नए कानून में सबसे अधिक सुविधा गवाह व वादी को दी गई है. अगर गवाह को सूचना नहीं मिल पा रही है तो वह व्हाट्सएप पर मिलने वाले समन व वारंट को भी प्राप्त होना माना जाएगा. अगर वह नहीं आ पा रहा है तो जिस जिले में मौजूद है, वहां के न्यायालय के वीडियो कान्फ्रेसिंग सेंटर से ऑनलाइन गवाही दे सकता है. पुलिस अब तक घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संकलन व पब्लिक के किसी भी गवाह के बयान अपने अनुसार लिख लेती थी. मगर अब सब कुछ वीडियो कैमरे की निगरानी में होगा.

पुलिसकर्मियों को नये कानून को लेकर किया गया है प्रशिक्षित

नए कानूनों को अमल में लाने और लागू करने के लिए पुलिस बल को सबसे ज्यादा सक्षम बनाने की जरूरत है. यही वजह है कि झारखंड में भी पुलिस बल और विवेचकों को इसके लिए तैयार किया गया है. इस दौरान इन तीनों कानूनों के बारे में पुलिस बल और विवेचकों को प्रशिक्षित किया गया है. मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलो तक के पुलिस पदाधिकारी और कर्मी को ट्रेनिंग दी गई. नए कानूनों से लोगों को अवगत कराने और उनमें जागरूकता लाने के मकसद से कार्यशालाएं हुईं, सेमिनार हुए और सामूहिक चर्चा हुई. इसके अलावा सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया गया है. भारत सरकार के ‘आईगोट कर्मयोगी‘ पोर्टल के माध्यम से तीन नए आपराधिक कानूनों को लेकर ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया.

कानून लागू होने के बाद होंगे बड़े बदलाव

भारतीय न्याूय संहिता में यह तय होगा कि कौन सा कृत्यग अपराध है और उसके लिए क्याप सजा होगी. आईपीसी कानून में 511 धाराएं थीं जबकि नए बीएनएस में 358 धाराएं होंगी. नए कानून में 21 नए अपराधों को भी सम्मोलि‍त किया गया है.

सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में 531 धाराएं होंगी. नए कानून में सीआरपीसी की 177 धाराओं को बदला गया है और 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं. नए कानून को लाते हुए 14 धाराएं समाप्तब भी गई हैं. गिरफ्तारी, जांच और मुकद्दमा चलाने आदि की प्रक्रिनया सीआरपीसी में होती है.

भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत 170 धाराएं होंगी, जबकि अभी तक इसमें 166 धाराएं हैं. मुकद्दमे के सबूतों को कैसे साबित किया जाएगा, बयान कैसे दर्ज होंगे, यह सब अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत 170 धाराओं के तहत ही होगा. नए कानून लाने में 24 घाराओं में बदलाव किया गया है और 2 नई धाराएं भी साक्ष्यन अधिनियम में जोड़ी गई हैं. नए कानून में पुरानी 6 धाराओं को समाप्त भी कि‍या गया है.

आतंकवाद, मॉब लींचिग और राष्ट्रीकय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए सजा को और सख्तव बनाया गया.
नए कानून में 23 अपराधों में अनिवार्य न्यू‍नतम सजा के प्रावधान को भी शामि‍ल किया गया है. 6 तरह के अपराधों में कम्युनिटी सर्विनस की सजा का प्रावधान भी किया गया है. नये कानून में केस का निपटारा करने के लिए टाइमलाइन होगी. इसमें फॉरेंसिक साइंस के इस्तेमाल का भी प्रावधान होगा.

राजद्रोह को अब अपराध नहीं माना जाएगा. नए कानून की धारा 150 के तहत एक नया अपराध जोड़ा गया है. इसके तहत भारत से अलग होने, पृथकावादी भावना रखने या भारत की एकता एवं संप्रभुता को खतरा पहुँचाने को अपराध बताया गया है. यह देशद्रोह का अपराध होगा.

नए कानूनों में मॉब लिंचिंग, यानी जब 5 या इससे ज्यारदा लोगों का एक समूह मिलकर जाति या समुदाय आदि के आधार पर हत्या करता है, तो ग्रुप के हर सदस्य को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी.

नए कानूनों में नाबालिग से दुष्कतर्म करने के दोषियों को अब फांसी की सजा दी जा सकेगी. गैंगरेप के मामलों में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा नाबालिग के साथ गैंगरेप को नए अपराध की श्रेणी में रखा गया है.
नए कानून में आतंकवादी कृत्य, जो पहले गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे खास कानूनों का हिस्सा थे, इसे अब भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया गया है. नए कानूनों के तहत जो भी शख्स देश को नुकसान पहुंचाने के लिए डायनामाइट या जहरीली गैस जैसे खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें आतंकवादी माना जाएगा.

पॉकेटमारी जैसे छोटे संगठित अपराधों पर भी नकेल कसने का प्रावधान नए कानूनों में किया गया है. इस तरह के संगठित अपराधों से निपटने के लिए राज्यों के अपने कानून थे.

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