
♦बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन से की नियुक्ति करने की अपील
Ranchi. झारखंड राज्य सूचना आयोग में दो महीने से सन्नाटा पसरा है. 8 मई को प्रभारी सूचना आयुक्त हिमांशू शेखर चौधरी के रिटायर होने के बाद से आयोग में कई सारे काम ठप पड़े हैं. सूचना आयुक्त का पद खाली रहने की वजह से आयोग के कर्मियों के वेतन का भी मामला फंस चुका है. इसे लेकर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. उन्होंने आयोग में सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्ति किये जाने की अपील की है.
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राज्य सूचना आयोग है बदहाल
राज्य सूचना आयोग का काम झारखंड में सूचना के अधिकार (RTI) को प्रभावी और पारदर्शी बनाना है. भ्रष्टाचार व गड़बड़ी को सार्वजनिक करने के लिए आरटीआइ लोगों के लिए अचूक हथियार है. इसके लिए सूचना आयोग का सशक्त होना जरूरी है. फिलहाल राज्य में आयोग ही बदहाल है. बगैर सूचना आयुक्तों के आयोग बेजान सा हो गया है. आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों के पद खाली पड़े हैं. आयुक्तों के बिना किसी भी आयोग का कोई औचित्य नहीं है.
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आयोग से लगेगी करप्शन और निरंकुशता पर लगाम
झारखंड देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां आयोग में सूचना आयुक्तों के पद खाली हैं. स्वस्थ और पारदर्शी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से यह सही नहीं है. इससे नौकरशाहों में भ्रष्टाचार व निरंकुशता बढ़ना लाजिमी है. आयोग में लगभग 7500 से अधिक अपील लंबित हैं. हर महीने 500 के आसपास अपील आयोग में पहुंचती है. हाल तक केवल एक सूचना आयुक्त सह प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त के सहारे यह आयोग चल रहा था. 8 मई से प्रभारी सूचना आयुक्त का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद आयोग पूरी तरह से डेड हो गया है. इसकी वजह से आयोग के कर्मियों को सैलरी भी नहीं मिल पा रही है.
सीएम करें पहल
बाबूलाल मरांडी के अनुसार सीएम खुद सशक्त सूचना आयोग के हिमायती रहे हैं. राज्य सरकार ने इसी साल जनवरी में हाइकोर्ट में शपथ-पत्र दायर किया था. कहा था कि एक मुख्य सूचना आयुक्त और पांच सूचना आयुक्तों की नियुक्ति जल्द कर ली जायेगी. राज्य सरकार द्वारा विज्ञापन निकाल कर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ भी की गयी थी. पंरतु अब तक इस महत्वपूर्ण मामले को लटकाये रखा गया है. सरकार को इसमें दिलचस्पी लेकर पहल करनी चाहिए. इससे करप्शन और गड़बड़ियों के मामलों पर अंकुश भी लग सकेगा.
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