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बेरमो उपचुनावः राजेंद्र और रवींद्र जैसे दिग्गज राजनीतिक घरानों में हो सकती है सीधी फाइट, जदयू भी मूड में

Akshay Kumar Jha

Ranchi: बेरमो कोयलांचल का मूड धीरे-धीरे चुनावी होता जा रहा है. कई तरह की बातें बाजार में चर्चा बटोर रही हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल जो चुनावी समीकरण बन रहा है, वो आगे चल कर काफी दिलचस्प होने जा रहा है. बेरमो में दो ऐसे राजनीतिक घराने हैं, जिनकी राजनीतिक हुकूमत दशकों से बेरमो कोयलांचल में देखी जा रही है. कांग्रेस की तरफ से वो घराना दिवंगत राजेंद्र सिंह का है तो वहीं बीजेपी की तरफ से वो घराना रवींद्र पांडे का है. राजेंद्र सिंह की दूसरी तो पांडे खानदान की तीसरी पुश्त अब चुनावी अखाड़े में उतरने की तैयारी में है.

जयमंगल सिंह.

बेरमो विधायक राजेंद्र सिंह के निधन के बाद से ही यह तय है कि उन्हीं के घर से उपचुनाव में कोई उम्मीदवार होगा. जयमंगल सिंह उर्फ अनुप सिंह के नाम पर लगभग मुहर लग भी चुकी है. जयमंगल सिंह जिस तरह से क्षेत्र में लगातार लोगों के बीच जा रहे हैं. लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं. उससे उनकी चुनावी तैयारी का पता चल रहा है. वहीं अब बीजेपी की तरफ से पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय के बेटे विक्रम पांडेय के चुनाव में उतरने के संकेत मिल रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो इस बार का बेरमो चुनाव काफी दिलचस्प होने जा रहा है.

रवींद्र पांडेय चल चुके अपना चुनावी दांव

विक्रम पांडेय.

दिग्गज और बीजेपी के पुराने नेता पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय की राजनीतिक सूझबूझ से सभी अवगत हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीटिंग सांसद रहते हुए पार्टी की बात मानी और अपनी सीट गठबंधन के लिए छोड़ दी. लेकिन फौरन बाद विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने बेटे विक्रम पांडेय को टुंडी से टिकट दिलवाया. हालांकि विक्रम पांडेय इस चुनाव में हार गये. अब फिर से एक बार रवींद्र पांडेय के पास अपने बेटे का राजनीतिक प्लेटफॉर्म तैयार करने का मौका है.

बेरमो इलाके में रवींद्र पांडेय की पकड़ा का अंदाजा सभी को है. पार्टी भी जानती है कि रवींद्र पांडेय क्षेत्र में काफी मजबूत हैं. ऐसे में रवींद्र पांडेय की तरफ से चुनाव के लिए राजनीतिक दांव चल दी जा चुकी है. बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं का ये कहना है कि भले ही एक बार उनका टिकट पार्टी ने काटा हो. लेकिन पार्टी में रवींद्र पांडेय की पकड़ से इंकार नहीं किया जा सकता है. ऐसा भी हो सकता है कि आखिर में पार्टी रवींद्र पांडेय के सामने उन्हीं को टिकट देने का प्रस्ताव रख दे. दोनों ही स्थिति में रवींद्र पांडेय को फायदा होना तय है.

बीजेपी में बेरमो से फेस नहीं मिलने का हो सकता है फायदा

बेरमो विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से कोई बड़ा चेहरा अभी तक सामने नहीं आया है. जिनका भी नाम आ रहा है उससे पार्टी को बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं दिख रही है. बीजेपी से चुनाव लड़ने की तैयारी में पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल, लक्ष्मण नायक, जगरनाथ राम, विनोद महतो, वासुदेव मिश्रा और भरत यादव जैसे नाम हैं. इन नामों में से कोई भी नाम ऐसा नहीं है जिस पर दावे से चुनाव जीत जाने का भरोसा किया जा सकता है. इस फेस क्राइसिस के गैप को रवींद्र पांडेय का घराना भर सकता है. वो चाहे खुद रवींद्र पांडेय हो या फिर उनका बेटा विक्रम पांडेय.

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बीजेपी करायेगी सर्वे, तब होगा फैसला      

इस मामले पर न्यूज विंग ने बीजेपी के कुछ बड़े और दिग्गज नेताओं से बात की. सभी का कहना है कि अभी कुछ भी कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी. पार्टी की तरफ से एक सर्वे कराया जायेगा. गिने-चुने लोग जो टिकट का दावा कर रहे हैं, उनमें से कौन बेहतर प्रदर्शन कर पायेगा इसका आकलन होगा. इसके बाद ही पार्टी किसे टिकट देगी इस पर फैसला होगा.

जदयू की बन रही अपनी रणनीति

इधर पुराने और दिग्गज नेता लालचंद महतो भी चुनाव में दो-दो हाथ करने की मूड में लग रहे हैं. उनकी तरफ से कहा जा रहा है कि पार्टी अगर उन्हें चुनाव लड़ने का मौका देती है, तो वो निश्चित तौर पर चुनाव लड़ेंगे. जदयू के अंदरखाने से जो बात निकल आ रही है वो ये है कि अगर पार्टी को आर्थिक मदद चुनाव के दौरान मिलती है तो वो उपचुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है. पार्टी की तरफ से लालचंद महतो ही जदयू का चेहरा हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1977 में की थी. वो डुमरी से सिर्फ 26 साल की उम्र में विधायक बन गये थे. वो तीन बार डुमरी से विधानसभा चुनाव जीत कर आये. बेरमो में मजदूरों की राजनीति से लालचंद महतो ने खूब की है. बेरमा में जनसंघ और बीएमएस की बुनियाद रखनेवालों के नाम में लालचंद महतो का नाम शुमार है. बेरमो इलाके में लालचंद महतो को विस्थापितों के नेता के तौर पर भी देखा जाता है.

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