न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

राज्य में कैसे सफल हो स्टार्ट अप पॉलिसी 2016, दो साल बाद भी नहीं गठित हुआ झारखंड वेंचर फंड

फंड के माध्यम से प्रति साल 50 करोड़ राशि करनी थी आवंटित

48

Ranchi : स्टार्ट अप पॉलिसी को लागू किए राज्य में दो साल बीत चुके हैं. लेकिन स्टार्ट अप पाॅलिसी बनाने वाली सरकार ही पाॅलिसी में सही से अमल नहीं कर पा रही है. पाॅलिसी के तहत स्टार्टअप के लिए झारखंड वेंचर फंड का गठन करना था. लेकिन अभी तक सरकार इसका गठन नहीं कर पायी है.

mi banner add

इस फंड के तहत स्टार्ट अप उद्यमियों के लिए 50 करोड़ राशि प्रति साल सरकार को आवंटित करना था. जो स्टार्ट अप उद्यमियों को विभिन्न किश्तों में दी जाती. लेकिन फंड का गठन नहीं होने के कारण राज्य के चयनित उद्यमियों के बीच राशि का आवंटन नहीं हो पा रहा है.

खुद कई चयनित उद्यमियों ने जानकारी दी है कि उन्हें एक बार भी प्रथम स्टाइपेंड की राशि जो कि 8,500 है वह सरकार की ओर से नहीं मिली है. वहीं उद्यमियों के चयन के लिए आयोजित होने वाली स्टेट इवोल्यूशन बोर्ड की बैठक पाॅलिसी लागू होने के दो साल में सिर्फ दो बार ही कि गयी. जिसमें मात्र 49 उद्यमियों का चयन किया गया.

इसे भी पढ़ेंःआजम खान और मेनका गांधी के प्रचार करने पर भी चुनाव आयोग ने लगायी पाबंदी

राशियों के आवंटन का ब्यौरा रखना है उद्देश्य

झारखंड स्टार्ट अप पाॅलिसी 2016 के तहत झारखंड वेंचर फंड की ओर से 250 करोड़ की राशि आवंटित की जाएगी. फंड के माध्यम से प्रति साल 50 -50 करोड़ करके उद्यमियों को विभिन्न चरणों की राशि दी जाएगी. एस्सेट मैनेजमेंट कंपनी या सोसाइटी ही फंड का प्रबंधन करती. वहीं इस फंड के तहत एक साल में आवंटित 50 करोड़ की राशि से जो भी राशि शेष बचती वो वापस दूसरे साल के फंड में जोड़ दिया जाता है.

इसे भी पढ़ेंःचुनाव आयोग के बैन के बाद अब हनुमान जी की शरण में योगी, पढ़ा चालीसा

इनोवेशन लैब तो बना, लेकिन कम ही बैठते है उद्यमी

Related Posts

पलामू : डायरिया से बच्चे की मौत, माता-पिता व भाई गंभीर, गांव में दर्जन भर लोग पीड़ित

स्वास्थ्य विभाग के डायरिया नियंत्रण की खुली पोल, आनन-फानन में कुछ लोगों को एंबुलेंस से भेजा अस्पताल

दो साल बीतने के बाद राज्य में 49 स्टार्ट अप उद्यमियों का चयन किया गया है. जिसमें 12 स्टार्ट अप उद्यमियों को कांके रोड एक्साइज भवन में स्थित झारखंड इनोवेशन लैब में बैठने के लिए जगह दी गई. लेकिन मुश्किल से दो तीन उद्यमी ही इस लैब में बैठते हैं.

वहीं सरकार की ओर से रातु रोड में अलग से लैब कार्यालय भी बनवाया जा रहा है. जबकि प्रबंधकों का कहना है कि उद्यमी किसी भी वक्त आकर लैब में बैठ सकते हैं. किसी तरह की कोई मनाही नहीं है. एक बेहतर सेट अप बन जाने के बाद उद्यमियों को असानी होगी.

कई उद्यमियों ने जानकारी दी कि सरकार की ओर से स्टाइपेंड की राशि तक नहीं दी गई, ऐसे में स्टार्ट अप आइडिया में इनोवेशन कार्य कैसे संभव है.

इसे भी पढ़ेंःBJP ने रवि किशन को गोरखपुर और प्रवीण निषाद को संत कबीर नगर से बनाया प्रत्याशी

अधिकारी नहीं चाहते जवाब देना

इस संबध में कई अधिकारियों से पूछा गया तो जवाब यही मिला कि इस संबध में कोई भी जानकारी नहीं है. कुछ बता नहीं सकते. क्योंकि अभी तक पूरा कार्यभार नहीं मिला है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: